कानपुर की सुजातगंज रोड पर विकास बनाम राजनीति: गड्ढों, हादसों और जवाबदेही के बीच फंसी जनता

उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर में स्थित COD से सुजातगंज रोड इन दिनों स्थानीय लोगों के लिए गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है। जर्जर सड़क, गहरे गड्ढे, अंधेरा और गंदगी—इन सबके बीच यह मार्ग अब केवल आवागमन का रास्ता नहीं, बल्कि रोज़मर्रा की परेशानी और संभावित हादसों का केंद्र बन चुका है। स्थानीय लोग इसे विकास की विफलता का प्रतीक बता रहे हैं।
हर जगह सिर्फ धक्के ही धक्के
सबसे पहले बात करें सड़क की मौजूदा स्थिति की, तो COD से सुजातगंज तक का यह मार्ग कई स्थानों पर बुरी तरह क्षतिग्रस्त है। जगह-जगह गड्ढे हैं, जिनमें बारिश के बाद पानी भर जाता है। नतीजतन, दोपहिया वाहन चालकों, स्कूली बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह रास्ता बेहद जोखिम भरा हो गया है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, यह इलाका अब “हादसों का हॉटस्पॉट” बन चुका है, जहाँ आए दिन गिरने और चोटिल होने की घटनाएं सामने आती हैं।
राजनीति के बीच फंसा है विकास
इसी बीच, सड़क की बदहाली को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज़ हो गए हैं। क्षेत्र में विकास कार्यों के श्रेय को लेकर बीजेपी और समाजवादी पार्टी के बीच टकराव देखा जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क सुधार जैसे बुनियादी मुद्दे पर ध्यान देने के बजाय, राजनीतिक दल एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालने में लगे हुए हैं।
सपा विधायक हसन रूमी को लेकर भी क्षेत्र में सवाल उठ रहे हैं। कुछ स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि पिछले तीन वर्षों में क्षेत्र में कोई ठोस विकास कार्य नहीं हुआ, जबकि चुनाव के समय सड़क, नाला और रोशनी से जुड़े कई वादे किए गए थे। हालांकि, इस पर सपा की ओर से अब तक कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
वहीं दूसरी ओर, भाजपा समर्थक भी स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठा रहे हैं कि जब केंद्र और राज्य में सरकार है, तो फिर सुजातगंज रोड जैसी बुनियादी सड़क की हालत क्यों नहीं सुधर रही। लोगों का कहना है कि बीजेपी सांसदों की चुप्पी भी अब सवालों के घेरे में है, क्योंकि यह इलाका लंबे समय से समस्याओं से जूझ रहा है।
पढ़िए क्या कहना है स्थानीय निवासियों का
स्थानीय नागरिकों का ध्यान COD नाला और सड़क के लिए स्वीकृत करोड़ों रुपये के बजट पर भी गया है। लोगों का आरोप है कि यदि वास्तव में इतना बड़ा बजट स्वीकृत हुआ था, तो उसका उपयोग ज़मीन पर क्यों दिखाई नहीं देता। हालाँकि, यह आरोप फिलहाल जांच और आधिकारिक पुष्टि की मांग करता है, लेकिन सवाल यह जरूर उठता है कि जनता को राहत क्यों नहीं मिली।
इसके अलावा, सुजातगंज क्षेत्र में स्ट्रीट लाइट्स की कमी और गंदगी भी समस्या को और गंभीर बना रही है। रात के समय सड़क पर चलना बेहद कठिन हो जाता है। कई स्थानों पर नालियां खुली हैं, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका और बढ़ जाती है। स्थानीय महिलाओं और बुजुर्गों ने इसे सुरक्षा से जुड़ा बड़ा मुद्दा बताया है।
हाल के दिनों में #JusticeForSujatganj हैशटैग के साथ सड़क की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। इन तस्वीरों में गड्ढों से भरी सड़क, कीचड़ और जाम की स्थिति साफ देखी जा सकती है। सोशल मीडिया पर लोगों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से जल्द कार्रवाई की मांग की है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जहां एक ओर नेताओं के काफिले आराम से निकल जाते हैं, वहीं आम जनता के लिए पैदल चलना तक मुश्किल हो गया है। यही वजह है कि क्षेत्र में आक्रोश धीरे-धीरे बढ़ रहा है।
आखिर कब तक होगा विकास
कुल मिलाकर, सुजातगंज रोड का मामला अब सिर्फ सड़क की मरम्मत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह विकास, राजनीति और जवाबदेही से जुड़ा बड़ा प्रश्न बन चुका है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि इस गंभीर स्थिति पर कब और कैसे ठोस कदम उठाते हैं, ताकि जनता को राहत मिल सके।



