
लखनऊ, उत्तर प्रदेश: 17 फरवरी को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में कांग्रेस पार्टी एक बड़ा राजनीतिक प्रदर्शन करने जा रही है। पार्टी ने मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना) के अस्तित्व को बचाने के लिए विधानसभा का घेराव करने का ऐलान किया है। कांग्रेस का यह कदम उस समय उठाया गया है जब केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा की वित्तीय सहायता में कमी और योजना की प्रक्रिया में बदलाव के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार संकट बढ़ रहा है। इस प्रदर्शन को कांग्रेस ने ‘हल्ला बोल’ नाम दिया है, जिसका उद्देश्य न केवल सरकार के खिलाफ आवाज उठाना है, बल्कि ग्रामीण जनता के हितों की रक्षा करना भी है।
यह रहेगा कांग्रेस का ‘हल्ला बोल’ अभियान
कांग्रेस पार्टी का कहना है कि अगर मनरेगा जैसी योजनाओं को सख्त तौर पर लागू किया जाए तो देश के करोड़ों ग्रामीण श्रमिकों को रोजगार मिल सकता है और उनका जीवन स्तर बेहतर हो सकता है। पार्टी का आरोप है कि केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा की वित्तीय सहायता में कमी की जा रही है, जिससे योजना का प्रभाव कम हो गया है। कांग्रेस का मानना है कि मनरेगा का असल उद्देश्य गरीब और भूमिहीन ग्रामीणों को रोजगार प्रदान करना था, लेकिन सरकार की नीतियों ने इसे कमजोर कर दिया है।
कांग्रेस ने इस आंदोलन के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया है कि जब तक मनरेगा की वित्तीय स्थिति सुधारी नहीं जाती, तब तक वह शांति से बैठने वाली नहीं है। पार्टी के नेताओं ने इस प्रदर्शन को एक ‘शक्ति प्रदर्शन’ के रूप में देखने की बात कही है, जिसमें बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और समर्थक हिस्सा लेंगे।
आर-पार होगी मनरेगा के अस्तित्व की जंग
मनरेगा, जो कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार प्रदान करने वाली योजना है, पिछले कुछ वर्षों से संकट का सामना कर रही है। सरकार द्वारा इस योजना में वित्तीय कटौती और विभिन्न राज्यों में कार्यान्वयन में आने वाली दिक्कतों ने इसे कमजोर कर दिया है। कांग्रेस पार्टी का कहना है कि अगर मनरेगा को खत्म किया जाता है या इसमें और कटौती की जाती है, तो यह लाखों लोगों की आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगा, जो पहले ही COVID-19 महामारी के कारण कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं।
कांग्रेस नेता इस मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार को घेरने का कोई भी मौका नहीं छोड़ रहे हैं। वे इसे किसानों, श्रमिकों और ग्रामीणों के अधिकारों की रक्षा के रूप में पेश कर रहे हैं। इस मुद्दे पर पार्टी के नेताओं ने दावा किया कि अगर इस योजना को तत्काल रूप से प्रभावी रूप से लागू किया जाए, तो यह लाखों परिवारों को राहत दे सकता है।
17 फरवरी को है ‘शक्ति प्रदर्शन’
17 फरवरी को लखनऊ में होने वाला कांग्रेस का प्रदर्शन न केवल मनरेगा के मुद्दे पर केंद्रित होगा, बल्कि यह एक शक्ति प्रदर्शन भी होगा। कांग्रेस पार्टी का उद्देश्य विधानसभा के समक्ष अपनी ताकत दिखाना है। पार्टी के नेताओं ने दावा किया कि इस प्रदर्शन में हजारों कार्यकर्ता और समर्थक शामिल होंगे, जो प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से आएंगे। कांग्रेस ने इस प्रदर्शन को लेकर अपनी पूरी तैयारियां कर ली हैं और प्रशासन से अनुमति मिलने के बाद इस प्रदर्शन को और बड़े स्तर पर आयोजित करने की योजना बनाई गई है।
पार्टी के सूत्रों का कहना है कि प्रदर्शन में मुख्य रूप से मनरेगा के मुद्दे पर केंद्र सरकार से जवाब मांगने के साथ-साथ अन्य लोक कल्याणकारी योजनाओं पर भी चर्चा की जाएगी। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता इस मौके पर मनरेगा के महत्व पर जोर देंगे और मांग करेंगे कि केंद्र सरकार इसके लिए अधिक बजट आवंटित करे, ताकि यह योजना सभी ग्रामीण इलाकों तक प्रभावी रूप से पहुंच सके।
राजनीति में आई गर्माहट और आगामी चुनाव
लखनऊ में हो रहे इस प्रदर्शन को आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के परिपेक्ष्य में भी देखा जा रहा है। कांग्रेस पार्टी का यह कदम अपनी राजनीतिक जमीन को मजबूत करने के लिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह प्रदर्शन विपक्ष के तौर पर कांग्रेस की ताकत को दिखाने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। वहीं, भाजपा और अन्य राजनीतिक दलों के नेताओं ने कांग्रेस के इस कदम को एक चुनावी स्टंट बताया है, जिसका उद्देश्य केवल ध्यान आकर्षित करना है।
हालांकि, कांग्रेस इस आरोप को नकारते हुए दावा कर रही है कि उनका प्रदर्शन पूरी तरह से जनहित में है और उनका उद्देश्य केवल मनरेगा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर सरकार का ध्यान आकर्षित करना है। वे इसे राजनीति से हटकर एक सामाजिक मुद्दे के रूप में देख रहे हैं।
पढ़िए कांग्रेस की रणनीति और प्रतिक्रिया
कांग्रेस पार्टी ने 17 फरवरी के प्रदर्शन को लेकर अपनी रणनीति तैयार कर ली है। पार्टी का कहना है कि यह प्रदर्शन शांतिपूर्ण होगा, लेकिन अगर प्रशासन ने किसी तरह की बाधा डालने की कोशिश की, तो वह इसका विरोध करेंगे। कांग्रेस ने यह भी कहा है कि इस प्रदर्शन से उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं के बीच एकजुटता का संदेश जाएगा, और इससे पार्टी को आगामी चुनावों में मजबूती मिलेगी।
कांग्रेस नेताओं ने यह भी स्पष्ट किया कि वे इस प्रदर्शन के दौरान राज्य और केंद्र सरकार से जनहित में फैसला लेने की अपील करेंगे। उनका मानना है कि यदि मनरेगा जैसे कार्यक्रम को सही ढंग से लागू किया जाए तो न केवल ग्रामीण इलाकों में रोजगार मिलेगा, बल्कि देश के आर्थिक विकास में भी मदद मिलेगी।



