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पढ़िए क्यों चढ़ाई जाती है भगवान गणेश को दुर्वा की गांठें, जानिए इसका रहस्य, तुरंत करें सिर्फ एक क्लिक

भारत में भगवान गणेश की पूजा हर कोई विधि पूर्वक करता है, खासकर बुधवार के दिन। वे सभी देवी-देवताओं में सबसे पहले पूजे जाते हैं और हर पूजा की शुरुआत उनके नाम से होती है। गणेश जी की पूजा में विशेष रूप से दूर्वा (दूब घास) का महत्व है, क्योंकि यह भगवान गणेश के लिए अत्यधिक प्रिय मानी जाती है। ऐसा कहा जाता है कि भगवान गणेश को दूर्वा की 21 गांठों का अर्पण करने से सभी प्रकार की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। लेकिन इस विशेष परंपरा के पीछे एक दिलचस्प और धार्मिक पौराणिक कथा भी छिपी हुई है।

दूर्वा की पूजा है एक दिव्य रहस्य

दूर्वा, जिसे दूब घास भी कहा जाता है, एक प्रकार की घास है जो विशेष रूप से गणेश पूजा में उपयोग की जाती है। अन्य पूजा में यह घास कम ही पाई जाती है, लेकिन गणेश जी के साथ इसका गहरा संबंध है। इसे भगवान गणेश की कृपा प्राप्त करने के लिए आवश्यक माना जाता है। लेकिन सवाल यह है कि भगवान गणेश को दूर्वा इतनी प्रिय क्यों है? इसके पीछे एक प्राचीन कथा है, जो बहुत ही रोचक है।

जानिए पौराणिक कथा: अनलासुर का वध और दूर्वा का महत्व

इस रहस्य को समझने के लिए हमें प्राचीन भारतीय कथाओं की ओर लौटना होगा। एक समय की बात है, जब पृथ्वी और स्वर्ग में हाहाकार मचा हुआ था। अनलासुर नामक एक दैत्य ने दोनों लोकों में आतंक मचा रखा था। वह दैत्य मुनि-ऋषियों और साधारण मानवों को बिना किसी कारण के जिंदा निगल जाता था। उसके अत्याचारों से त्रस्त होकर इन्द्रदेव और सभी देवी-देवता भगवान महादेव के पास पहुंचे और उनसे अनलासुर का नाश करने की प्रार्थना की।

भगवान महादेव ने सबकी प्रार्थना सुनी और कहा कि अनलासुर का वध केवल भगवान गणेश ही कर सकते हैं। इसके बाद, गणेश जी ने अनलासुर को अपने पेट में निगल लिया, जिससे दैत्य का अंत हो गया। हालांकि, जैसे ही गणेश जी ने अनलासुर को निगला, उनके पेट में अत्यधिक जलन होने लगी, जो लगातार बढ़ती ही चली गई। गणेश जी की यह तकलीफ बहुत गंभीर हो गई और वह कष्ट से बेहाल हो गए।

कश्यप ऋषि का उपाय और दूर्वा की 21 गांठें

गणेश जी के पेट की जलन शांत करने के लिए तमाम उपाय किए गए, लेकिन कोई भी उपाय असरदार नहीं हुआ। तब कश्यप ऋषि ने एक अनोखा उपाय सुझाया। उन्होंने दूर्वा की 21 गांठें बनाकर भगवान गणेश को अर्पित करने के लिए दी। जैसे ही भगवान गणेश ने उन 21 गांठों को ग्रहण किया, उनकी पेट की जलन शांत हो गई। तभी से यह मान्यता बन गई कि भगवान गणेश को दूर्वा की 21 गांठें अर्पित करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

यह होता है गणेश पूजा में दूर्वा का महत्व

भगवान गणेश को समर्पित पूजा में दूर्वा का अत्यधिक महत्व है। यह केवल एक घास नहीं, बल्कि भगवान गणेश की कृपा का प्रतीक मानी जाती है। खासकर बुधवार के दिन, जो गणेश जी का प्रिय दिन होता है, भक्त पूरी श्रद्धा के साथ गणेश जी को 21 गांठें दूर्वा अर्पित करते हैं। यह अर्पण न केवल गणेश जी के प्रति आस्था को दर्शाता है, बल्कि एक प्राचीन धार्मिक परंपरा को जीवित रखने का माध्यम भी है।

इसके अलावा, दूर्वा का महत्व यह भी है कि यह एक पवित्र और शुद्ध वस्तु मानी जाती है। दूर्वा घास को शुद्धि और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इसकी चढ़ाई से न केवल भगवान गणेश की कृपा प्राप्त होती है, बल्कि जीवन में सुख, समृद्धि और शांति की प्राप्ति भी होती है।

पढ़िए गणेश पूजा की विधि और दूर्वा का सही प्रयोग

गणेश पूजा में दूर्वा को सही तरीके से चढ़ाने का विशेष महत्व है। पूजा में हमेशा 21 गांठें दूर्वा की चढ़ाई जाती हैं, क्योंकि यह संख्या धार्मिक दृष्टि से अत्यधिक शुभ मानी जाती है। इन 21 गांठों को पूजा के समय भगवान गणेश के चरणों में अर्पित किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि 21 गांठों का यह अर्पण न केवल भगवान गणेश को प्रसन्न करता है, बल्कि समस्त दोषों और विघ्नों को नष्ट कर देता है।

दूर्वा को लेकर यह कहना है वैज्ञानिक पक्ष का 

दूर्वा का केवल धार्मिक महत्व ही नहीं, बल्कि इसके कई औषधीय गुण भी होते हैं। यह घास कई प्रकार के आयुर्वेदिक औषधियों में उपयोग की जाती है। इसके सेवन से शरीर को ऊर्जा मिलती है, और यह विभिन्न प्रकार की शारीरिक समस्याओं को भी ठीक करने में सहायक मानी जाती है। दूर्वा में एंटीऑक्सीडेंट, मिनरल्स और विटामिन्स होते हैं जो शरीर को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करते हैं। इसके अलावा, दूर्वा का उपयोग मानसिक शांति और तनाव को दूर करने के लिए भी किया जाता है।

अब जानिए सबसे बड़ा महत्व 

भगवान गणेश की पूजा में दूर्वा की 21 गांठों का विशेष महत्व है, जो एक प्राचीन पौराणिक कथा से जुड़ा हुआ है। यह केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि एक ऐसा उपाय है जिससे जीवन में समृद्धि, शांति और भगवान गणेश का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इसके अलावा, दूर्वा का शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। गणेश पूजा के दौरान दूर्वा को सही विधि से अर्पित करने से न केवल भगवान गणेश की कृपा मिलती है, बल्कि जीवन की समस्याएं भी सुलझती हैं।

इसलिए, अगली बार जब आप भगवान गणेश की पूजा करें, तो यह सुनिश्चित करें कि आप 21 गांठों को दूर्वा की अर्पित कर रहे हैं। इससे न केवल भगवान गणेश प्रसन्न होंगे, बल्कि आपके जीवन में भी समृद्धि और शांति का वास होगा।

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