सरकार ने AI और डीपफेक सामग्री पर सख्त नियम लागू करने का किया ऐलान, सोशल मीडिया को मिलेगा नया दिशा-निर्देश

भारत सरकार ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है और अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर AI और डीपफेक (deepfake) सामग्री के प्रसार को रोकने के लिए नए और सख्त नियम लागू करने का निर्णय लिया है। सूचना प्रौद्योगिकी (इंटरमीडियरी गाइडलाइंस और डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड) नियम, 2021 में संशोधन करते हुए, सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को अब AI से उत्पन्न या संशोधित कंटेंट पर स्पष्ट लेबल लगाना अनिवार्य होगा। यह नियम 20 फरवरी 2026 से प्रभावी होगा और इसका उद्देश्य डिजिटल पारदर्शिता को बढ़ाना है, जिससे भ्रामक और आपत्तिजनक सामग्री का प्रसार कम हो सके।
AI और डीपफेक सामग्री: डिजिटल दुनिया की नई चुनौतियां
AI और डीपफेक तकनीकों का इस्तेमाल सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से बढ़ा है। इन तकनीकों के माध्यम से, किसी भी व्यक्ति की आवाज़, चेहरा या वीडियो को वास्तविकता जैसा बना दिया जाता है, और इसके चलते कई बार गलत सूचना, अफवाहें और भ्रामक सामग्री फैलने लगती है। इससे न केवल व्यक्तिगत प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचता है, बल्कि समाज में तनाव और असमंजस भी पैदा हो सकता है।
इसके अलावा, जब यह भ्रामक या झूठी सामग्री वायरल होती है, तो यह लोगों को गलत दिशा में मार्गदर्शन करने का काम करती है। यही कारण है कि सरकार ने इसे लेकर सख्त कदम उठाने का निर्णय लिया है। नए नियमों के तहत, अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को यह सुनिश्चित करना होगा कि AI द्वारा उत्पन्न या संशोधित किसी भी कंटेंट को स्पष्ट रूप से लेबल किया जाए, ताकि उपयोगकर्ता यह पहचान सकें कि यह सामग्री वास्तविक है या इसे AI ने बनाया है।
नए नियमों के तहत क्या होगा यह बदलाव?
2026 से लागू होने वाले इन नए नियमों में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। इनमें सबसे प्रमुख यह है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को भ्रामक या आपत्तिजनक सामग्री को 3 घंटे के भीतर हटाना होगा, जबकि पहले यह समय सीमा 36 घंटे थी। यह बदलाव इस उद्देश्य से किया गया है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर गलत सूचना फैलने से पहले उसे जल्दी से हटाया जा सके। इससे न केवल भ्रामक खबरों का प्रसार रोका जाएगा, बल्कि उपयोगकर्ताओं को एक साफ और पारदर्शी डिजिटल अनुभव भी मिलेगा।
सोशल मीडिया पर बढ़ते खतरे को लेकर सरकार का रुख
सरकार का यह कदम उस बढ़ती समस्या को लेकर है, जिससे दुनियाभर में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जूझ रहे हैं। AI और डीपफेक वीडियो के कारण, दुनिया भर में कई बार राजनीतिक और सामाजिक स्थिरता को खतरा हुआ है। भारत में भी ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां AI द्वारा बनाए गए भ्रामक वीडियो और खबरों ने समाज में हलचल मचा दी थी।
इस संदर्भ में, सरकार ने डिजिटल पारदर्शिता को बढ़ावा देने के लिए यह कदम उठाया है, ताकि डिजिटल मीडिया पर कोई भी व्यक्ति या समूह अपने फायदे के लिए झूठी जानकारी को फैलाने में सफल न हो सके।
पढ़ें क्या होगा इस कदम का प्रभाव?
नई दिशा-निर्देशों का सबसे बड़ा प्रभाव यह होगा कि सोशल मीडिया कंपनियां अपने प्लेटफॉर्म पर साझा की जाने वाली सामग्री के प्रति अधिक जिम्मेदार बनेंगी। वे यह सुनिश्चित करने के लिए बाध्य होंगी कि भ्रामक और डीपफेक सामग्री को जल्दी से हटाया जाए और उपयोगकर्ताओं को सुरक्षित डिजिटल अनुभव प्रदान किया जाए।
इसके अतिरिक्त, इस कदम से यह भी अपेक्षित है कि भविष्य में और अधिक तकनीकी नवाचारों के साथ सरकार नियमों को अपडेट करती रहेगी, ताकि इन नई तकनीकों के खतरे से निपटा जा सके। इस प्रकार, ये नए नियम डिजिटल दुनिया में एक और कदम आगे बढ़ने की दिशा में हैं।
डिजिटल मीडिया में दिखेगी सुधार की दिशा
इसके अलावा, सरकार ने इस कदम से डिजिटल मीडिया के प्रभावी नियंत्रण की दिशा में भी अपनी प्रतिबद्धता को जाहिर किया है। सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान किया जाता है, लेकिन यह सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण है कि यह स्वतंत्रता लोगों के बीच गलत जानकारी और भ्रामक संदेशों के प्रसार का कारण न बने।
सरकार के इस कदम से यह भी प्रतीत होता है कि वह ऑनलाइन सामग्री के नियंत्रण में अधिक सक्रिय और जिम्मेदार भूमिका निभाना चाहती है। डिजिटल माध्यमों पर होने वाले अत्यधिक प्रभाव के कारण, यह जरूरी हो गया है कि गलत सूचना और डीपफेक सामग्री को तत्काल और प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जाए।
एक बार फिर मानी जा रही है महत्वपूर्ण पहल
भारत सरकार द्वारा AI और डीपफेक सामग्री पर सख्त नियम लागू करने का कदम एक महत्वपूर्ण पहल है, जो डिजिटल पारदर्शिता को बढ़ाने और उपयोगकर्ताओं को भ्रामक जानकारी से बचाने में मदद करेगा। 20 फरवरी 2026 से लागू होने वाले नए नियमों के तहत, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को अब ज्यादा जिम्मेदारी से काम करना होगा। यह कदम न केवल भारत के डिजिटल भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि इससे पूरी दुनिया में सोशल मीडिया के संचालन में सुधार होगा।



