ऑपरेशन में बड़ी लापरवाही: महिला के पेट में छोड़ा बैंडेज, वाराणसी में दोबारा सर्जरी के बाद खुला राज!

रिपोर्ट – जीतेन्द्र चतुर्वेदी
बलिया/गाजीपुर (कासिमाबाद): सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की संवेदनहीनता और लापरवाही का एक खौफनाक मामला सामने आया है। कासिमाबाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में एक महिला के प्रसव ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों ने कथित तौर पर उसके पेट में बैंडेज (पट्टी) छोड़ दिया। इस गंभीर लापरवाही के कारण महिला महीनों तक दर्द से तड़पती रही, जिसका खुलासा वाराणसी के एक निजी अस्पताल में दोबारा हुए ऑपरेशन के बाद हुआ।
बुधवार को इस घटना से आक्रोशित परिजनों और ग्रामीणों ने सीएचसी कासिमाबाद पर जमकर हंगामा किया और दोषी स्टाफ पर कार्रवाई की मांग की।
क्या है पूरा मामला?
बरेसर थाना क्षेत्र के बदरपुर चांद गांव निवासी नीतीश कुमार ने बताया कि उन्होंने अपनी बहन इंद्र कला देवी को प्रसव के लिए 29 दिसंबर को सीएचसी कासिमाबाद में भर्ती कराया था। वहां डॉक्टरों ने ऑपरेशन (सिजेरियन) किया। परिजनों का आरोप है कि सरकारी अस्पताल होने के बावजूद उनसे:
- ₹7,000 नकद वसूले गए।
- ₹2,000 ऑनलाइन ट्रांसफर के जरिए लिए गए।
- ₹1,400 की दवाएं भी बाहर से मंगवाई गईं।
महीनों तक दर्द और मवाद से जूझती रही पीड़िता
ऑपरेशन के बाद से ही महिला की स्थिति बिगड़ने लगी। ऑपरेशन वाली जगह पर असहनीय दर्द और मवाद (Pus) की शिकायत होने लगी। स्थानीय स्तर पर सुधार न होने पर परिजन उन्हें वाराणसी ले गए। वहां गुरुदयाल अस्पताल में जब जांच हुई, तो डॉक्टर भी हैरान रह गए। रिपोर्ट में पता चला कि पिछले ऑपरेशन के दौरान पेट के अंदर बैंडेज का टुकड़ा छोड़ दिया गया था।
दोबारा हुई सर्जरी: हालत बिगड़ने पर 9 फरवरी को वाराणसी में फिर से ऑपरेशन कर वह बैंडेज निकाला गया। हालांकि, पीड़िता की हालत अब भी गंभीर बनी हुई है।
अस्पताल में भारी हंगामा और प्रशासन का रुख
बुधवार को जब यह मामला तूल पकड़ा, तो दर्जनों ग्रामीण अस्पताल पहुंचे और नारेबाजी की। परिजनों ने संबंधित डॉक्टरों और रिश्वत लेने वाले कर्मचारियों के खिलाफ तत्काल एफआईआर और बर्खास्तगी की मांग की है।
अस्पताल प्रशासन का पक्ष: सीएचसी कासिमाबाद के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. सरफराज अहमद ने मामले पर सफाई देते हुए कहा:
“परिजनों के आरोपों को सुना गया है। यदि वे लिखित शिकायत दर्ज कराते हैं, तो मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।”
उठते सवाल:
- सरकारी अस्पताल में प्रसव के नाम पर हजारों रुपये की वसूली किसके संरक्षण में हो रही है?
- एक जीवन रक्षक ऑपरेशन में बैंडेज छोड़ देना ‘मानवीय भूल’ है या ‘आपराधिक लापरवाही’?
- क्या प्रशासन केवल जांच का आश्वासन देगा या पीड़ित परिवार को न्याय मिलेगा?



