बलिया के ‘रूपवार तवायफ’ गांव का नाम बदलकर ‘देवपुर’ रखा गया, ग्रामीणों को मिली राहत

उत्तर प्रदेश: बलिया जिले के सिकंदरपुर तहसील के ‘रूपवार तवायफ’ गांव का नाम अब बदलकर ‘देवपुर’ रखा जाएगा। यह बदलाव गांव के निवासियों के लिए एक बड़ी राहत लेकर आया है, जिन्होंने वर्षों तक अपने गांव के नाम के कारण समाज में असहजता और शर्मिंदगी का सामना किया। इस निर्णय से न केवल ग्रामीणों को मानसिक शांति मिली है, बल्कि यह उनके लिए सम्मान और समृद्धि की नई दिशा भी खोल सकता है।
नाम में बदलाव का कारण
गांव का नाम ‘रूपवार तवायफ’ था, जिसमें ‘तवायफ’ शब्द का प्रयोग हुआ था। यह शब्द ऐतिहासिक दृष्टि से एक नकारात्मक छवि से जुड़ा हुआ था, जिसके कारण इस गांव के लोग समाज में उपहास का सामना करते थे। खासकर, जब बाहर पढ़ाई करने वाले छात्रों को अपने गांव का नाम बताने में शर्मिंदगी होती थी। स्कूल-कॉलेज के फॉर्म, पहचान पत्र और अन्य आधिकारिक दस्तावेजों में भी इस नाम का उल्लेख करते समय उन्हें मानसिक दबाव महसूस होता था। इसके अलावा, युवाओं के रिश्ते भी कभी-कभी सिर्फ नाम के कारण प्रभावित होते थे।
मीडिया का योगदान
इस मामले को मीडिया में प्रमुखता से उठाया गया। खासकर, UP Now चैनल ने इस मुद्दे को अपनी रिपोर्टिंग का हिस्सा बनाया और इसे व्यापक दर्शकों तक पहुँचाया। चैनल द्वारा यह मुद्दा प्रमुखता से उठाने के बाद प्रशासन ने इस मामले पर गंभीरता से विचार करना शुरू किया। इसके साथ ही, स्थानीय प्रशासन ने गांव में एक खुली बैठक का आयोजन किया, जिसमें ग्रामीणों की राय ली गई।
खुली बैठक में हुआ नाम परिवर्तन का प्रस्ताव
गांव के निवासियों ने खुली बैठक में इस प्रस्ताव पर चर्चा की और सर्वसम्मति से गांव का नाम बदलने का निर्णय लिया। बैठक में ग्रामीणों ने इस बात पर जोर दिया कि नाम परिवर्तन से उनका सामाजिक सम्मान बढ़ेगा और साथ ही, यह उनकी आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सकारात्मक बदलाव होगा। ग्रामीणों का मानना था कि ‘देवपुर’ नाम का चयन इस गांव को एक नई पहचान देगा, जिससे समाज में उनके प्रति दृष्टिकोण बदल सकेगा।
गांव के प्रधान ने बताया कि नाम परिवर्तन से न केवल गांव का सम्मान बढ़ेगा, बल्कि यह विकास की नई राह भी खोलेगा। इसके बाद, प्रशासन ने औपचारिक प्रक्रिया के लिए प्रस्ताव संबंधित विभाग को भेज दिया है। अब यह प्रक्रिया जल्द ही पूरी की जाएगी, और गांव का नया नाम ‘देवपुर’ आधिकारिक रूप से लागू हो जाएगा।
सामाजिक प्रभाव
नाम परिवर्तन से गांव में खुशी का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि यह बदलाव उनके लिए एक नई शुरुआत है। पुराने नाम से जुड़ी नकारात्मक छवि को खत्म करने में मदद मिलेगी, और अब उनके बच्चों को भी समाज में अधिक सम्मान मिलेगा। कई लोग यह मानते हैं कि यह निर्णय गांव के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
गांव के युवाओं ने भी इस बदलाव का स्वागत किया है। एक युवा ने कहा, “हमारे लिए यह बहुत बड़ी राहत है, क्योंकि नाम की वजह से कई बार हमें सामाजिक तौर पर दबाव का सामना करना पड़ता था। अब हम गर्व से अपने गांव का नाम ले सकते हैं।”
यह रही प्रशासन की भूमिका
गांव का नाम बदलने की प्रक्रिया में प्रशासन की सक्रिय भूमिका रही है। अधिकारियों ने ग्रामीणों की भावना को समझते हुए इस फैसले को प्राथमिकता दी। स्थानीय प्रशासन ने मामले की संवेदनशीलता को पहचाना और तेजी से कार्रवाई की। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “हमने ग्रामीणों की राय ली और इस बदलाव के लिए आवश्यक कदम उठाए। यह बदलाव उनके अधिकारों और सम्मान को बहाल करने का एक प्रयास है।”
पढ़िए भविष्य में क्या होगा?
अब, जब गांव का नाम ‘देवपुर’ रखा जाएगा, तो यह ग्रामीणों के जीवन में कई सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है। इस बदलाव से गांव के विकास कार्यों में तेजी आने की उम्मीद है। साथ ही, इस कदम से अन्य गांवों और क्षेत्रों में भी एक संदेश जाएगा कि सामाजिक पहचान और सम्मान को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
ग्रामीणों का कहना है कि अब उन्हें अपने गांव का नाम गर्व से हर जगह बताने में कोई झिझक नहीं होगी। इस नाम परिवर्तन से उनका आत्मसम्मान भी बढ़ेगा और वे समाज में एक नई पहचान बना पाएंगे।
सामाजिक प्रतिष्ठा का उदाहरण है बदला हुआ नाम
यह बदलाव सिर्फ एक नाम परिवर्तन नहीं, बल्कि एक सामाजिक परिवर्तन की ओर बढ़ाया गया कदम है। ‘रूपवार तवायफ’ से ‘देवपुर’ तक का यह सफर सामाजिक सशक्तिकरण, सम्मान और विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह फैसला न केवल गांव के लोगों की असहजता को समाप्त करेगा, बल्कि यह भविष्य में आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगा।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि ‘देवपुर’ का नाम भविष्य में गांव के विकास के साथ-साथ उसके सामाजिक स्थिति को कैसे बदलता है। यह कदम निश्चित रूप से अन्य स्थानों के लिए भी एक उदाहरण बनेगा, जहां सामाजिक पहचान और सम्मान को प्राथमिकता दी जाती है।



