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कानपुर में डिजिटल गैंग का भंडाफोड़, सोशल मीडिया फॉलोअर्स बढ़ाने के लिए करते थे ब्लैकमेल, जानें नाम

कानपुर, उत्तर प्रदेश: कानपुर पुलिस ने एक ऐसे डिजिटल गैंग का पर्दाफाश किया है, जो सोशल मीडिया पर फॉलोवर बढ़ाने के लिए लोगों को वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करता था। यह गैंग अपनी डिजिटल पहचान बढ़ाने के लिए भोले-भाले लोगों को शिकार बनाता था, और फिर उन्हें ब्लैकमेल कर मोटी रकम ऐठने का काम करता था।

कानपुर में डिजिटल गैंग का भंडाफोड़

उत्तर प्रदेश की कानपुर पुलिस ने एक संगठित डिजिटल गैंग का भंडाफोड़ किया है, जिसने अपनी सोशल मीडिया गतिविधियों के माध्यम से लोगों को ब्लैकमेल किया। यह मामला तब सामने आया जब गुजैनी इलाके की एक महिला, प्रतिभा शुक्ला ने अपने बेटे को ब्लैकमेल किए जाने की शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के बाद डीसीपी दीपेंद्रनाथ चौधरी के नेतृत्व में पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए एक विशेष टीम बनाई और जांच शुरू की।

पुलिस की जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी सोशल मीडिया पर फॉलोअर्स बढ़ाने के लिए भोले-भाले लोगों को अपने जाल में फंसाते थे। वह उनका वीडियो बनाते थे और बाद में उसे ब्लैकमेल करके उनसे पैसा मांगते थे। इस प्रकार के कई मामले सामने आए, और अंततः पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

जानिए गिरफ्तार अभियुक्तों के नाम

डीसीपी दीपेंद्रनाथ चौधरी ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि गिरफ्तार किए गए आरोपियों में अरविंद सिंह, लकी, चंदन कुमार, मोहम्मद शाहिद, और अमन कटियार शामिल हैं। इन सभी आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया और उनके द्वारा इस्तेमाल की जा रही इंस्टाग्राम आईडी को भी ब्लॉक कर दिया है। यह कदम इस गैंग की आगे की गतिविधियों को रोकने के लिए उठाया गया है।

डीसीपी ने कहा कि इस गैंग के सदस्य सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी पहचान बनाने के लिए लोगों के वीडियो रिकॉर्ड करते थे और फिर उन्हें धमकी देकर पैसे मांगते थे। पुलिस ने इन आरोपियों से पूछताछ की और उनके अन्य सहयोगियों के बारे में जानकारी जुटाई है।

इस तरह से हुई पुलिस की कार्रवाई

पुलिस ने गैंग के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है और उनके द्वारा इस्तेमाल की जा रही सोशल मीडिया आईडी को ब्लॉक कर दिया है। इसके साथ ही, आरोपियों के पास से जब्त की गई डिजिटल सामग्री की जांच भी की जा रही है। पुलिस ने बताया कि यह गैंग पहले से ही कई लोगों को शिकार बना चुका था और उनकी पहचान को नुकसान पहुंचाने का काम करता था।

डीसीपी ने यह भी कहा कि इस प्रकार के मामलों में पुलिस पूरी तरह से सतर्क है और डिजिटल अपराधों को लेकर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। उन्होंने सोशल मीडिया पर सक्रिय लोगों को भी सावधान किया और कहा कि किसी भी अजनबी से संपर्क करने और अपने वीडियो या जानकारी को साझा करने से पहले सावधानी बरतें।

सोशल मीडिया पर बढ़ते डिजिटल अपराध

यह घटना इस बात का प्रमाण है कि सोशल मीडिया पर डिजिटल अपराधों में तेजी से वृद्धि हो रही है। आजकल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लोग अपनी पहचान बनाने के लिए कुछ भी कर सकते हैं, लेकिन कई बार यह उनके लिए खतरनाक साबित हो सकता है। इस गैंग की गिरफ्तारी ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि सोशल मीडिया के माध्यम से ब्लैकमेलिंग और धोखाधड़ी के मामले बढ़ते जा रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के अपराधों को रोकने के लिए सोशल मीडिया कंपनियों को भी अपनी नीतियों को और सख्त करना होगा, ताकि ऐसी गतिविधियों पर काबू पाया जा सके। साथ ही, लोगों को भी डिजिटल सुरक्षा के बारे में जागरूक किया जाना चाहिए, ताकि वे ऐसे धोखेबाजों से बच सकें।

पढ़िए पुलिस और प्रशासन का संदेश

डीसीपी दीपेंद्रनाथ चौधरी ने कहा कि पुलिस प्रशासन का मुख्य उद्देश्य शहर को अपराध मुक्त बनाना है और ऐसे गैंग्स को पकड़े जाने से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि समाज में ऐसी अवैध गतिविधियों को रोका जा सके। उन्होंने आम जनता से अपील की कि वे किसी भी तरह की धोखाधड़ी के मामले में तुरंत पुलिस से संपर्क करें।

पुलिस ने यह भी कहा कि वे लगातार डिजिटल अपराधों पर निगरानी रखेंगे और किसी भी व्यक्ति को इस प्रकार के अपराधों में शामिल नहीं होने देंगे। कानपुर पुलिस की यह कार्रवाई एक महत्वपूर्ण कदम है जो डिजिटल अपराधों के खिलाफ लोगों में जागरूकता और सुरक्षा का संदेश देती है।

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