कानपुर में ‘पेशाब कांड’ के बाद शादी के जश्न में मच गई हिंसा, पुलिस बनी मूकदर्शक – जानिए कहां

कानपुर: बिठूर क्षेत्र में एक शादी समारोह के दौरान हुआ एक गंभीर विवाद, जो ‘पेशाब कांड’ के नाम से मशहूर हो गया, न केवल विवाह के जश्न को गंदा कर दिया, बल्कि यह हिंसा और दंगे का रूप भी ले लिया। यह मामला बिठूर में बारातियों और स्थानीय ग्रामीणों के बीच हुई जबरदस्त मारपीट से जुड़ा हुआ है, जो नशे की हालत में हुई। इस हिंसा के दौरान, न केवल सड़क पर जुलूस के माहौल में तनाव था, बल्कि पुलिस भी मूकदर्शक बनी रही, जिससे स्थिति और भी विकट हो गई।
बिठूर में नशे में धुत बाराती और विवाद
शादी का दिन होना, आम तौर पर खुशियों का दिन माना जाता है, लेकिन बिठूर में यह दिन खूनी संघर्ष का रूप ले लिया। घटनाक्रम कुछ इस प्रकार था कि बारातियों और स्थानीय ग्रामीणों के बीच एक साधारण विवाद शुरू हुआ। यह विवाद तब हुआ जब एक बाराती ने खुले में पेशाब किया, जिससे वहां के स्थानीय लोग आपत्ति जताने लगे। पेशाब करने को लेकर हुई इस बहस ने बाद में हिंसा का रूप ले लिया और देखते ही देखते बाराती और स्थानीय ग्रामीण आपस में भिड़ गए।
बारातियों के नशे में धुत होने के कारण स्थिति और भी बिगड़ गई। बारातियों ने स्थानीय लोगों को सरेआम सड़कों पर दौड़ा-दौड़ा कर पीटना शुरू कर दिया। यह सब पुलिस के सामने हो रहा था, लेकिन पुलिस ने किसी प्रकार की हस्तक्षेप करने के बजाय मूकदर्शक बने हुए थे।
पुलिस की रही मूकदर्शक भूमिका
जब बिठूर की सड़कों पर हिंसा मच रही थी, तब पुलिस का कोई सक्रिय कदम न उठाना लोगों के लिए आश्चर्यजनक था। घटनास्थल पर पुलिस की उपस्थिति के बावजूद, बाराती और ग्रामीणों के बीच हिंसा होती रही। लोगों का आरोप था कि पुलिस ने कुछ नहीं किया, जिसके चलते स्थिति और भी बिगड़ी और बिठूर की सड़कों पर ‘जंग का मैदान’ बन गया।
घटना के बाद लोग कह रहे थे कि यह कोई सामान्य विवाद नहीं था, बल्कि यह दिखाता है कि हमारे समाज में नशे के चलते लोग किस तरह से हिंसा पर उतर सकते हैं। यही नहीं, यह भी एक बड़ा सवाल खड़ा करता है कि जब लोग कानून और व्यवस्था की उम्मीद कर रहे होते हैं, तो पुलिस की निष्क्रियता से स्थिति कितनी विकट हो सकती है।
नशे में धुत बारातियों ने किया तांडव
शादी के इस झगड़े में नशे में धुत बारातियों की भूमिका अत्यधिक महत्वपूर्ण रही। शराब के प्रभाव में इन बारातियों ने न केवल अपने ही शादी के दिन को गंदा किया, बल्कि पूरे बिठूर इलाके को भी असुरक्षित बना दिया। जिनके ऊपर कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी थी, वे घटनास्थल पर मौजूद होने के बावजूद स्थिति को नियंत्रित करने में नाकाम रहे।
शादी के इस खूबसूरत अवसर पर यदि इसी प्रकार की हिंसा होती है, तो यह सवाल उठता है कि क्या कभी हम इस प्रकार के विवादों से बच सकते हैं? क्या समाज में व्याप्त नशे की लत को नियंत्रित किया जा सकता है?
ग्रामीणों और बारातियों के बीच जमकर हुआ संघर्ष
ग्रामीणों और बारातियों के बीच जब हिंसा का यह दौर बढ़ने लगा, तो मामला और भी गंभीर हो गया। स्थानीय लोगों का कहना था कि यह विवाद एक छोटे से मुद्दे से शुरू हुआ था, लेकिन नशे की हालत में बाराती स्थिति को और बिगाड़ते गए। लड़ाई बढ़ते-बढ़ते, सड़क पर चल रहे राहगीरों को भी प्रभावित करने लगी, और बिठूर का इलाका असुरक्षित हो गया।
अंत में, यह घटना एक ‘पेशाब कांड’ के रूप में लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई। लोग कहते हैं कि यदि विवाह समारोह में इस प्रकार का हिंसक माहौल बन सकता है, तो हमारे समाज में व्याप्त गुस्से और नशे की स्थिति को कैसे सुधारा जा सकता है?



