आगरा: फुब्बारा दवा मार्केट में 15 टीमों की छापेमारी, संदिग्ध दवाओं और स्टॉक की हुई गहन जांच

आगरा (उत्तर प्रदेश): आगरा के फुब्बारा दवा मार्केट में रविवार शाम को औषधि विभाग ने एक बड़ी कार्रवाई की। इस छापेमारी में 15 टीमों ने मिलकर दवा व्यापारियों के रिकॉर्ड की गहन जांच की। सहायक औषधि आयुक्त अतुल उपाध्याय के नेतृत्व में औषधि विभाग ने इस कार्रवाई को अंजाम दिया। यह कार्रवाई दवा कारोबार में हो रही अनियमितताओं और संदिग्ध दवाओं की बिक्री पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से की गई।
माहेश्वरी मार्केट में छापेमारी का विस्तार
इस छापेमारी के दौरान औषधि विभाग ने माहेश्वरी मार्केट के थोक दवा व्यापारियों के रजिस्टर और बिल बुक की गहन जांच की। इन दुकानों से खरीदी और बेची गई दवाओं के रिकॉर्ड का मिलान किया गया और यह सुनिश्चित करने की कोशिश की गई कि दवाएं निर्धारित मानकों के अनुरूप हैं। विभाग की टीम ने इस दौरान संदिग्ध दवाओं की भी जांच की और उनकी स्टॉक स्थिति का मिलान किया।
संदिग्ध दवाओं की जांच और स्टॉक का किया गया मिलान
ऑपरेशन का मुख्य उद्देश्य संदिग्ध दवाओं का पता लगाना और उनके रिकॉर्ड का मिलान करना था। दवा व्यापारी जो ग्राहकों को बेचने के लिए दवाओं का भंडारण करते हैं, उनकी पूरी स्टॉक सूची को जांचा गया। इसी दौरान कई दुकानें ऐसी पाई गईं जिनमें दवाओं के भंडारण और बिक्री में गड़बड़ी पाई गई। इस कार्रवाई के तहत यह भी सुनिश्चित किया गया कि दवाओं के पैकेजिंग पर सही लेबल और वैध लाइसेंस का जिक्र हो।
टीम ने बना रखा ही कार्रवाई का दायरा
छापेमारी की कार्रवाई केवल माहेश्वरी मार्केट तक सीमित नहीं रही। औषधि विभाग की टीमों ने फुब्बारा दवा बाजार के अन्य हिस्सों में भी सघन चेकिंग की। यहां तक कि इस जांच की कार्रवाई हींग की मंडी तक भी पहुंची, जहां से बड़ी मात्रा में दवाएं मंगाई जाती हैं। टीम ने यह सुनिश्चित किया कि यहां पर कोई भी बिना लाइसेंस या अवैध दवाओं का व्यापार न हो।
रात भर जारी रह सकती है छापेमारी
यह कार्रवाई देर रात तक जारी रह सकती है। विभाग के अधिकारियों के अनुसार, टीमों ने बाजार के विभिन्न हिस्सों में छापेमारी की और दवाओं के वैध होने का सत्यापन किया। विभाग का मानना है कि इस कार्रवाई के परिणामस्वरूप आगरा में दवा व्यापार में पारदर्शिता आएगी और अवैध दवाओं की बिक्री पर रोक लगेगी।
दवा व्यापारियों की जांच पर हुई कार्रवाई
इस कार्रवाई का उद्देश्य दवा व्यापारियों की कार्यप्रणाली पर नियंत्रण रखना था। खासतौर पर उन व्यापारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई, जो बिना पंजीकरण के दवाओं का भंडारण कर रहे थे या संदिग्ध दवाओं का व्यापार कर रहे थे। औषधि विभाग ने यह सुनिश्चित किया कि सभी व्यापारियों के पास वैध लाइसेंस हो और वे निर्धारित मानकों का पालन कर रहे हों। इस दौरान कई व्यापारियों को चेतावनी भी दी गई और उन्हें सुधारने के लिए निर्देश दिए गए।
ड्रग इंस्पेक्टर्स की रही यह भूमिका
इस छापेमारी में कई जिलों के ड्रग इंस्पेक्टर भी शामिल थे, जिन्होंने जांच में अहम भूमिका निभाई। इन अधिकारियों ने दवा के लेबल, वितरण की प्रक्रिया, और दवाओं की गुणवत्ता के बारे में विस्तृत जांच की। ड्रग इंस्पेक्टरों की टीम ने यह भी सुनिश्चित किया कि सभी दवाएं मानक गुणवत्ता की हों और कोई भी बेमेल या अवैध दवाएं बिक्री के लिए नहीं हैं।
आगे की कार्रवाई पर जताई जा रही उम्मीदें
इस बड़ी कार्रवाई के बाद, विभाग ने कहा है कि वे लगातार इस प्रकार की छापेमारी करेंगे, ताकि दवा व्यापार में पारदर्शिता बनी रहे। सहायक औषधि आयुक्त अतुल उपाध्याय ने कहा, “हमारे विभाग की यह जिम्मेदारी बनती है कि हम दवा के व्यापार में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को रोकें। यह कार्रवाई सिर्फ एक शुरुआत है, और आगे भी ऐसी छापेमारी जारी रहेगी।”



