
लखनऊ: समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रमुख अखिलेश यादव ने भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते पर मोदी सरकार को कड़ी नसीहत दी है। उनका कहना है कि यह समझौता भारत के कृषि क्षेत्र को नुकसान पहुंचाने वाला साबित होगा, क्योंकि इससे भारतीय कृषि बाजार को अमेरिकी उत्पादों के लिए खोल दिया जाएगा। अखिलेश यादव ने सरकार पर तीखा हमला करते हुए इसे देश की 70 प्रतिशत आबादी, जो कि कृषि पर निर्भर है, के साथ धोखा करार दिया।
मोदी सरकार पर आरोप
अखिलेश यादव ने मोदी सरकार पर हमला करते हुए कहा कि यह समझौता भारत के किसानों के लिए खतरे की घंटी है। उनके अनुसार, इस कदम से भारतीय कृषि बाजार में अमेरिकी उत्पादों की आमद होगी, जो भारतीय किसानों को प्रतिस्पर्धा में पीछे छोड़ देंगे। उन्होंने कहा कि अमेरिका के उत्पादों के आने से भारतीय किसानों की आमदनी पर सीधा असर पड़ेगा और उनकी उपज की कीमतें गिर सकती हैं।
अखिलेश यादव ने कृषि पर निर्भर 70 प्रतिशत भारतीय आबादी को नुकसान पहुंचाने वाले इस व्यापार समझौते को सतत कृषि विकास के खिलाफ बताया। उनका कहना था कि भारतीय कृषि को विश्व बाजार के अनुसार प्रतिस्पर्धी बनाने के बजाय, यह समझौता केवल अमेरिकी उत्पादों के लिए दरवाजे खोलने का काम करेगा। इससे भारतीय कृषि नीति पर गंभीर असर पड़ने वाला है।
बिचौलियों और मुनाफाखोरी का खतरा
अखिलेश यादव ने यह भी आरोप लगाया कि इस समझौते के बाद **बिचौलियों और मुनाफाखोरों** का एक नया वर्ग उभर सकता है, जो किसानों से सस्ते दामों पर उत्पाद खरीदकर उन्हें ऊंचे दामों पर बेचेंगे। इससे **खाने-पीने की चीजें** महंगी हो सकती हैं और आम आदमी की जेब पर भी असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार की नीतियां केवल **सार्वजनिक हित** की अनदेखी कर रही हैं और इससे समाज का गरीब वर्ग ही प्रभावित होगा।
क्या है समझौता?
भारत और अमेरिका के बीच यह व्यापार समझौता फार्म उत्पादों और खाद्य सामग्री के व्यापार को लेकर किया गया है, जिसके तहत अमेरिकी उत्पाद भारतीय बाजार में अधिक मात्रा में बेचे जाएंगे। इसके परिणामस्वरूप, भारतीय कृषि उत्पादों की **मांग में कमी** आ सकती है, जबकि अमेरिकी उत्पादों को बढ़ावा मिलेगा। व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत के किसानों के लिए प्रसार क्षेत्र और मूल्य निर्धारण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
किसान नेता और अन्य नेताओं की प्रतिक्रिया
अखिलेश यादव अकेले नहीं हैं जो इस समझौते पर चिंता जता रहे हैं। किसान नेता भी इसे किसानों के लिए खतरनाक मानते हैं और उन्होंने सरकार से इस समझौते पर पुनर्विचार करने की अपील की है। किसानों का कहना है कि आर्थिक असमानता और विपणन के मोर्चे पर दबाव पहले ही उनके लिए एक बड़ी समस्या बने हुए हैं। अगर इस समझौते को लागू किया जाता है, तो उनके लिए व्यापार और भी कठिन हो जाएगा।
साथ ही, विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरने के लिए सामने आ रहे हैं। इन नेताओं का कहना है कि मोदी सरकार को इस समझौते की सामाजिक और आर्थिक प्रभावों को गंभीरता से विचार करना चाहिए और किसानों के हितों को प्राथमिकता देनी चाहिए।
क्या होगा आगामी प्रभाव?
इस व्यापार समझौते का सबसे बड़ा प्रभाव भारतीय कृषि पर पड़ेगा। यदि अमेरिकी उत्पाद भारतीय बाजार में अधिक मात्रा में आयेंगे, तो यह भारतीय किसानों को सस्ते आयात का सामना कराएगा, जिससे भारतीय उत्पादों की कीमतें गिर सकती हैं। इससे किसानों को उनके उत्पादों के उचित दाम मिलने में समस्या हो सकती है।
इस समझौते का प्रभाव मूल्य वृद्धि पर भी देखा जा सकता है, क्योंकि अमेरिकी उत्पादों की बाजार में अधिक आपूर्ति से भारतीय उपभोक्ताओं को महंगे दामों पर इन वस्तुओं को खरीदना पड़ सकता है। इसके अलावा, कृषि के क्षेत्र में बिचौलियों का प्रभुत्व बढ़ सकता है, जिससे किसानों को कम दाम मिलेंगे और बिचौलियों को अधिक लाभ होगा।
अखिलेश यादव की अपील
अखिलेश यादव ने मोदी सरकार से किसान हितों को ध्यान में रखते हुए इस समझौते की पुन: समीक्षा करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि किसी भी व्यापार समझौते का असर देश के किसान वर्ग और आम जनता पर न पड़े। उनका कहना था कि भारत को अपनी कृषि नीति को स्थिर और न्यायसंगत बनाना चाहिए, ताकि **देशी उत्पादों** को बढ़ावा मिले और विदेशी उत्पादों का प्रभाव कम हो।



