बलिया: 21 साल पुराने हत्या कांड में ऐतिहासिक फैसला, 4 दोषियों को उम्रकैद की सजा और जुर्माना

रिपोर्ट – जितेंद्र चतुर्वेदी
बलिया (उत्तर प्रदेश): बलिया में 21 साल पुरानी हत्या के एक चर्चित मामले में अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, कोर्ट-04 ने चार अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई और प्रत्येक पर 11-11 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। यह फैसला पुलिस अधीक्षक ओमवीर सिंह के निर्देशन में चलाए जा रहे “ऑपरेशन कंविक्शन” के तहत प्रभावी पैरवी का परिणाम बताया जा रहा है।
यह मामला 3 नवंबर 2004 को हुआ था, जब श्री अमरनाथ मिश्र पीजी कॉलेज के छात्रसंघ चुनाव परिणाम के बाद एक विजय जुलूस निकाला गया था। इस दौरान शुभनथही गांव में हिंसा हुई, जिसमें टेंगरही के पूर्व प्रधान लल्लन पांडे को गोली लगी और इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। इस घटना के बाद मृतक के पुत्र जितेंद्र पांडे ने बैरिया थाने में हत्या और हत्या के प्रयास के आरोप में चार आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था।
जानिए क्या था प्रकरण और किस पर था आरोप
3 नवंबर 2004 को छात्रसंघ चुनाव के बाद विजय जुलूस के दौरान शुभनथही गांव में हुई मारपीट और फायरिंग के चलते टेंगरही के पूर्व प्रधान लल्लन पांडे को गोली लगी। गोली लगने के बाद उनका इलाज शुरू हुआ, लेकिन वह घायल होकर चल बसे। इस घटना के बाद मृतक के पुत्र जितेंद्र पांडे ने बैरिया थाने में इस मामले की शिकायत दर्ज कराई थी। इस आरोप में धर्मेंद्र पासवान, ओमप्रकाश यादव उर्फ लालू यादव, राजेश यादव और बृजेश यादव को आरोपी ठहराया गया था।
जितेंद्र पांडे के शिकायत के बाद पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धारा 302 (हत्या), 307 (हत्या का प्रयास) और 504 (जानबूझकर अपमान करना) के तहत मुकदमा दर्ज किया। इसके बाद इस मामले की सुनवाई शुरू हुई और लगभग 21 वर्षों तक चले मुकदमे का फैसला हाल ही में आया।
सजा का ऐतिहासिक माना जा रहा निर्णय
अदालत ने सभी चार आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उन्हें उम्रभर की सजा सुनाई। साथ ही, प्रत्येक पर 11-11 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। एक आरोपी, ओमप्रकाश यादव उर्फ लालू यादव, जो पूर्व में छात्रसंघ अध्यक्ष और जिला पंचायत सदस्य रह चुके थे, उनके खिलाफ यह फैसला और भी अहम माना जा रहा है।
अदालत ने यह फैसला पुलिस प्रशासन की मेहनत और “ऑपरेशन कंविक्शन” के तहत चलाए गए अभियोजन पक्ष के प्रभावी प्रयासों को ध्यान में रखते हुए सुनाया। इस फैसले ने बलिया में न्याय की उम्मीद को जिंदा किया है और यह साबित किया है कि कोई भी अपराधी बच नहीं सकता, चाहे मामला कितना भी पुराना क्यों न हो।
एडीजीसी संदीप कुमार तिवारी की प्रभावी रही पैरवी
इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से एडीजीसी (अधिशासी जिला सरकारी वकील) संदीप कुमार तिवारी ने प्रभावी पैरवी की। उन्होंने मामले के सभी पहलुओं को न्यायालय में प्रस्तुत किया और यह सुनिश्चित किया कि न्याय के रास्ते में कोई रुकावट न आए। संदीप कुमार तिवारी की कड़ी मेहनत और समर्पण ने मामले के फैसले में अहम भूमिका निभाई।
परिजनों को मिला संतोष और पूरी हुई न्याय की उम्मीद
अदालत के फैसले के बाद मृतक लल्लन पांडे के परिजनों ने संतोष व्यक्त किया। जितेंद्र पांडे ने कहा, “आज 21 साल बाद हमें न्याय मिला है। यह फैसला हमें बहुत शांति और संतोष दे रहा है। हम अदालत के इस फैसले का सम्मान करते हैं और उम्मीद करते हैं कि भविष्य में इस तरह के मामलों में भी जल्दी और प्रभावी न्याय मिलेगा।”
ऑपरेशन कंविक्शन” का भी पड़ा प्रभाव
पुलिस अधीक्षक ओमवीर सिंह ने “ऑपरेशन कंविक्शन” की सफलता पर खुशी जताई। उन्होंने कहा, “यह अभियान विशेष रूप से लंबे समय से लंबित मामलों में न्याय सुनिश्चित करने के लिए चलाया गया था। आज का फैसला इस अभियान की सफलता का प्रतीक है। हम भविष्य में भी ऐसे अभियानों को चलाकर न्याय के रास्ते को और प्रभावी बनाएंगे।”
माननीय न्यायालय के प्रति दिखा विश्वास
बलिया में 21 साल पुरानी हत्या कांड के मामले में आया फैसला न केवल कानूनी दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह यह भी साबित करता है कि न्यायालय में समय के साथ-साथ हर अपराधी को सजा मिलती है। इस फैसले ने बलिया में कानून और व्यवस्था की ताकत को दिखाया और यह संदेश दिया कि कोई भी अपराधी चाहे कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, वह बच नहीं सकता।



