
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत से निराला नगर स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में मुलाकात की। यह मुलाकात शिष्टाचार भेंट के रूप में आयोजित की गई थी, लेकिन इसके पीछे कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई, जो प्रदेश की सियासी और सामाजिक स्थिति से जुड़े थे।
मुलाकात का मुख्य उद्देश्य: सियासी और सामाजिक हालात पर चर्चा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और संघ प्रमुख मोहन भागवत के बीच यह मुलाकात लगभग आधे घंटे से अधिक समय तक चली। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच प्रदेश की सियासी और सामाजिक स्थिति को लेकर बातचीत हुई। मुख्यमंत्री ने मोहन भागवत को राज्य की मौजूदा राजनीतिक स्थिति के साथ-साथ सरकार के कार्यों की जानकारी दी। इस मुलाकात में आगामी विधानसभा चुनावों के संदर्भ में भी कुछ चर्चाएँ हुईं, क्योंकि अगले साल उत्तर प्रदेश में चुनाव होने हैं।
इसके अलावा, इस मुलाकात में संघ के शताब्दी वर्ष के मौके पर होने वाले कार्यक्रमों और आगामी योजनाओं पर भी चर्चा की गई। यह मुलाकात राज्य में संघ के बढ़ते प्रभाव और आगामी राजनीतिक गतिविधियों के संदर्भ में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। भागवत की सक्रियता इन दिनों उत्तर प्रदेश में काफी अधिक देखी जा रही है, और इससे पहले वह गोरखपुर से लखनऊ पहुंचे थे, जहां उन्होंने सद्भाव बैठक, कुटुंब सम्मेलन, युवा संवाद और प्रमुख जन संवाद जैसे कार्यक्रमों में हिस्सा लिया था।
पिछली मुलाकात: 26 नवंबर को हुई थी अयोध्या में मुलाकात
यह मुलाकात एक महीने के भीतर दोनों के बीच दूसरी मुलाकात थी। इससे पहले, 26 नवंबर को अयोध्या में दोनों के बीच लगभग 90 मिनट तक अकेले में बातचीत हुई थी। अयोध्या में हुई मुलाकात को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा था, क्योंकि दोनों ने वहां भी प्रदेश के सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा की थी। इस बार की मुलाकात को लेकर यह कयास लगाए जा रहे हैं कि दोनों नेताओं के बीच अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर बातचीत हुई है।
सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत का बयान: शिक्षा और स्वास्थ्य को व्यवसाय नहीं बनाना चाहिए
इस मुलाकात के बाद, सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत लखनऊ विश्वविद्यालय में आयोजित शोधार्थी संवाद कार्यक्रम में भी शामिल हुए। इस कार्यक्रम में उन्होंने शिक्षा और स्वास्थ्य पर महत्वपूर्ण विचार साझा किए। भागवत ने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य कोई व्यवसाय नहीं हो सकते, बल्कि ये सभी के लिए सुलभ और उपलब्ध होने चाहिए। उन्होंने कहा, “पश्चिमी देशों ने शिक्षा के साथ खिलवाड़ किया और अपनी शिक्षा व्यवस्था को भारत पर थोप दिया। हमें अपनी शिक्षा व्यवस्था को सुधारने की आवश्यकता है, जो अंग्रेजों द्वारा बिगाड़ा गया था।”
संघ का कार्य: देश को परम वैभव तक ले जाना
डॉ. मोहन भागवत ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि संघ का मुख्य उद्देश्य देश को परम वैभव और संपन्नता की ओर ले जाना है। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि संघ किसी के विरोध में नहीं है, बल्कि उसका काम समाज की एकता और गुणवत्ता को बढ़ावा देना है। भागवत ने यह भी कहा कि संघ को लोकप्रियता, प्रभाव और शक्ति की कोई आवश्यकता नहीं है; उसका काम केवल समाज को संगठित करना है।
शोधार्थियों को सत्य की ओर मार्गदर्शन
शोधार्थियों के साथ संवाद करते हुए, डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि भारत की दिशा और दशा बदलने में शोध का बहुत बड़ा योगदान हो सकता है। उन्होंने शोधार्थियों से अपील की कि वे अपने शोध कार्यों को उत्कृष्ट, प्रामाणिक और निस्वार्थ भाव से करें। “शोध करना केवल व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि देश की भलाई के लिए होना चाहिए,” उन्होंने कहा। उन्होंने यह भी कहा कि संघ के बारे में बहुत दुष्प्रचार किया जाता है, और शोधार्थियों का कर्तव्य है कि वे सत्य को सामने लाकर समाज के बीच वास्तविकता को उजागर करें।
संघ की भूमिका और समाज में उसकी प्रतिष्ठा
भागवत ने इस दौरान यह भी कहा कि संघ समाज में एकता और समृद्धि की दिशा में काम कर रहा है। उनका मानना है कि समाज की एकता और गुणवत्ता की चिंता करना संघ का कार्य है, और वह समाज के विभिन्न वर्गों को जोड़ने के लिए प्रयासरत है। उन्होंने यह भी कहा कि संघ को समझने के लिए आपको अंदर आकर उसे देखना होगा, क्योंकि इसे केवल पढ़कर समझना संभव नहीं है।
सियासी गलियारों में इस मुलाकात की चर्चा हुई तेज
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत की मुलाकात ने प्रदेश की सियासी और सामाजिक स्थिति पर गहरी चर्चा का अवसर प्रदान किया है। साथ ही, संघ के शताब्दी वर्ष और उसकी आगामी योजनाओं पर भी विचार किया गया। डॉ. मोहन भागवत का यह बयान कि शिक्षा और स्वास्थ्य को सुलभ और गैर-व्यावसायिक बनाना चाहिए, न केवल समाज के लिए बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी महत्वपूर्ण है। इस प्रकार की चर्चाएँ निश्चित रूप से प्रदेश और देश के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए सकारात्मक दिशा में योगदान करेंगी।



