कानपुर पुलिस उपायुक्त कार्यालय में आयोजित हुआ CPR प्रशिक्षण कार्यक्रम, सिखाया गया जीवन रक्षक कौशल

कानपुर: हाल ही में कानपुर पुलिस उपायुक्त (Central Zone) कार्यालय, स्वरूप नगर में एक महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें पुलिस कर्मियों को कार्डियोपल्मोनरी रेसुसिटेशन (CPR) के बारे में जानकारी दी गई। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. राजीव कुमार गुप्ता द्वारा प्रदान किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य पुलिस कर्मियों को आपातकालीन स्थितियों में जीवनरक्षक तकनीकों से परिचित कराना था, ताकि वे किसी भी आपात स्थिति में त्वरित और प्रभावी सहायता प्रदान कर सकें।
पुलिस कर्मियों को जीवन रक्षक कौशल सिखाया गया
सीपीआर प्रशिक्षण कार्यक्रम में पुलिस उपायुक्त सेन्ट्रल, श्री अतुल कुमार श्रीवास्तव, अपर पुलिस उपायुक्त/सहायक पुलिस आयुक्त स्वरूप नगर श्री सुमित सुधाकर रामटेके सहित कार्यालय के अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित थे। प्रशिक्षण के दौरान, डॉ. राजीव कुमार गुप्ता ने सीपीआर के महत्व, छाती पर दबाव (Chest Compression) की सही तकनीक और आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई के बारे में विस्तृत जानकारी दी।

इसके अलावा, पुलिस कर्मियों को व्यावहारिक तौर पर भी सीपीआर का अभ्यास कराया गया, जिससे उन्हें सही तरीके से इस प्रक्रिया को अपनाने का अभ्यास हो सके। यह कदम पुलिस कर्मियों को आपातकालीन स्थिति में अधिक आत्मविश्वास प्रदान करने के उद्देश्य से उठाया गया था।
आपातकालीन परिस्थितियों में पुलिस कर्मियों की भूमिका
पुलिसकर्मी प्रायः आपातकालीन परिस्थितियों में सबसे पहले घटनास्थल पर पहुंचते हैं। ऐसे में उनका त्वरित और सही निर्णय किसी की जान बचाने में अहम भूमिका निभा सकता है। पुलिस उपायुक्त श्री अतुल कुमार श्रीवास्तव ने इस अवसर पर कहा कि “पुलिस कर्मियों का यह प्रशिक्षण जीवन रक्षक सिद्ध हो सकता है। हमें यह समझना होगा कि आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित निर्णय और सही कार्रवाई से किसी की जिंदगी बचाई जा सकती है।”
उन्होंने डॉ. राजीव कुमार गुप्ता का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम पुलिस कर्मियों की क्षमता को और अधिक बढ़ाते हैं और उन्हें हर स्थिति में बेहतर निर्णय लेने में सक्षम बनाते हैं। यह प्रशिक्षण सिर्फ पुलिस विभाग के लिए नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए भी उपयोगी साबित हो सकता है, क्योंकि पुलिस कर्मी हमेशा लोगों के संपर्क में रहते हैं और कई बार वे सबसे पहले उस व्यक्ति तक पहुंचते हैं, जिन्हें चिकित्सा सहायता की आवश्यकता होती है।
CPR प्रशिक्षण का महत्व
सीपीआर (Cardiopulmonary Resuscitation) एक ऐसी तकनीक है, जिसे हृदय गति रुकने या सांस रुकने की स्थिति में किसी व्यक्ति को बचाने के लिए अपनाया जाता है। इस तकनीक में, छाती पर दबाव डालने और मुंह से मुंह का सांस देने जैसी प्रक्रियाओं का पालन किया जाता है। यह व्यक्ति के दिल और मस्तिष्क तक ऑक्सीजन पहुंचाने का कार्य करता है और उसे पुनः जीवित करने में मदद करता है।
डॉ. राजीव कुमार गुप्ता ने इस प्रशिक्षण में सीपीआर की मानक विधि के बारे में बताया और इस बात पर जोर दिया कि किस प्रकार से प्रत्येक पुलिस कर्मी को इस तकनीक का अभ्यास करना चाहिए, ताकि वह किसी भी आपातकालीन स्थिति में जल्दी से प्रतिक्रिया दे सके। उन्होंने यह भी बताया कि सीपीआर की सही तकनीक के साथ किए गए प्रयास जीवन बचाने में प्रभावी साबित होते हैं, जबकि गलत तरीके से सीपीआर देने से व्यक्ति को और अधिक नुकसान भी हो सकता है।
प्रशिक्षण का उद्देश्य
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम पुलिस कर्मियों को आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित और प्रभावी सहायता देने के लिए सक्षम बनाने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था। आपात स्थिति में पुलिस कर्मी हमेशा पहले उस स्थान पर पहुंचते हैं, जहां चिकित्सा सहायता की आवश्यकता होती है। ऐसे में इस प्रकार का प्रशिक्षण उन्हें और अधिक दक्ष बनाता है।

इस प्रशिक्षण से न केवल पुलिस कर्मियों को पेशेवर मदद देने की क्षमता मिलती है, बल्कि यह समाज में एक सकारात्मक संदेश भी भेजता है कि पुलिस विभाग न केवल कानून व्यवस्था बनाए रखने में मदद करता है, बल्कि लोगों के जीवन की रक्षा करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
पुलिस कर्मियों का धन्यवाद
पुलिस उपायुक्त श्रीवास्तव ने प्रशिक्षण के समापन पर सभी उपस्थित पुलिस कर्मियों को धन्यवाद दिया और उन्हें प्रेरित किया कि वे इस प्रशिक्षण को अपने कार्य जीवन में लागू करें। उन्होंने कहा कि यह एक अवसर है, जब हम अपनी क्षमता को और बेहतर बना सकते हैं और आपातकालीन परिस्थितियों में जान बचाने में मदद कर सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन भविष्य में भी किया जाएगा, ताकि पुलिस कर्मियों की क्षमता और अधिक बढ़ाई जा सके।
माना जा रा है महत्वपूर्ण कदम
कानपुर पुलिस द्वारा आयोजित CPR प्रशिक्षण कार्यक्रम न केवल पुलिस कर्मियों की पेशेवर क्षमता को बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण कदम था, बल्कि यह समाज के प्रति पुलिस विभाग की जिम्मेदारी को भी दर्शाता है। पुलिसकर्मी, जो आपात स्थितियों में पहले पहुंचते हैं, इस तरह के प्रशिक्षण से जीवन बचाने की अपनी क्षमता को और बेहतर बना सकते हैं। इस प्रकार के कार्यक्रमों से पुलिस और समाज के बीच एक मजबूत रिश्ते की नींव रखी जा रही है, जो हर किसी की सुरक्षा और भलाई के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।



