Dharmik Morning: प्रसिद्ध है उज्जैन का हनुमान मंदिर: पढ़िए चमत्कारी प्रतिमा और न बुझने वाली ज्योति का रहस्य

Dharmik Morning: मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन न केवल महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि यहां स्थित कई प्राचीन और चमत्कारी मंदिर भी श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र हैं। इन्हीं में से एक है उज्जैन का अखंड ज्योति हनुमान मंदिर, जो अपनी विशिष्ट हनुमान प्रतिमा और निरंतर प्रज्वलित रहने वाली अखंड ज्योति के कारण विशेष पहचान रखता है। यह मंदिर दूर-दूर से आने वाले भक्तों के लिए विश्वास, भक्ति और आशा का प्रतीक माना जाता है।
हनुमान जी की है अद्भुत और दुर्लभ प्रतिमा
इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यहां स्थापित **सिंदूरी हनुमान जी की प्रतिमा** है। यह प्रतिमा सामान्य हनुमान मंदिरों से अलग मानी जाती है। यदि इस मूर्ति को ध्यान से देखा जाए, तो हनुमान जी के पैरों के नीचे एक राक्षसी आकृति दिखाई देती है। मान्यता के अनुसार, यह राक्षसी लंकिनी है, जिसने लंका के द्वार पर हनुमान जी का मार्ग रोका था।
रामायण की कथा के अनुसार, जब हनुमान जी लक्ष्मण के प्राण बचाने के लिए संजीवनी बूटी लेने जा रहे थे, तब लंकिनी ने उन्हें रोकने का प्रयास किया। उस समय हनुमान जी ने उसे अपने पैरों के नीचे दबाकर आगे बढ़ने का मार्ग बनाया। उज्जैन के इस मंदिर में भक्तों को हनुमान जी के उसी स्वरूप के दर्शन होते हैं, जो इसे और भी विशिष्ट बनाता है।
दक्षिणमुखी है स्वरूप और शस्त्र-आभूषण
मंदिर में स्थापित हनुमान जी की प्रतिमा दक्षिणमुखी है, जिसे तांत्रिक दृष्टि से अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है। इस स्वरूप में हनुमान जी के एक हाथ में संजीवनी पर्वत और कंधे पर गदा सुशोभित है। इसके अलावा, प्रतिमा में उनके हाथों में बाजूबंद, कलाई में कड़े और पैरों में पाजेब भी स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं। मान्यता है कि इस स्वरूप के दर्शन मात्र से ही भक्तों के कष्ट दूर होने लगते हैं।
24 घंटे जलने वाली है अखंड ज्योति
हनुमान जी की प्रतिमा के साथ-साथ इस मंदिर की दूसरी सबसे बड़ी विशेषता है यहां प्रज्वलित रहने वाली अखंड ज्योति। यह ज्योति दिन-रात, सप्ताह के सातों दिन निरंतर जलती रहती है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यह ज्योति कभी नहीं बुझती और इसमें स्वयं हनुमान जी का आशीर्वाद समाहित है।
कहा जाता है कि इस अखंड ज्योति के दर्शन करने मात्र से ही भक्तों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आने लगता है। यही कारण है कि यहां श्रद्धालुओं की आस्था केवल मूर्ति तक सीमित नहीं रहती, बल्कि ज्योति के दर्शन भी विशेष महत्व रखते हैं।
शनि दोष और साढ़ेसाती से मुक्ति की है मान्यता
इस मंदिर को लेकर एक प्रचलित मान्यता यह भी है कि यहां अखंड ज्योति के दर्शन करने से शनि देव के अशुभ प्रभाव कम होते हैं। जिन लोगों की कुंडली में शनि की स्थिति कमजोर होती है या जो शनि की साढ़ेसाती से पीड़ित होते हैं, वे विशेष रूप से इस मंदिर में दर्शन के लिए आते हैं।
मान्यता है कि यदि भक्त यहां आटे का दीपक जलाकर अखंड ज्योति के दर्शन करें, तो शनिदेव के प्रकोप से राहत मिलने लगती है। इसी कारण शनिवार और अमावस्या के दिन यहां विशेष भीड़ देखने को मिलती है।
जानिए प्रसाद और मनोकामना पूर्ति की परंपरा
इस मंदिर में हनुमान जी को चढ़ाए जाने वाले प्रसाद की भी अलग परंपरा है। भक्त अपनी मनोकामना के अनुसार प्रसाद चढ़ाते हैं। यदि कोई व्यक्ति कानूनी विवाद या झगड़ों से परेशान है, तो वह यहां नारियल अर्पित करता है। वहीं, संतान प्राप्ति की कामना रखने वाले श्रद्धालु अखंड ज्योति में तेल अर्पित करते हैं।
इसके अलावा, सामान्य मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए बड़ी संख्या में भक्त हनुमान जी को रोटी का भोग लगाते हैं। खास बात यह है कि यह प्रसाद मनोकामना पूर्ण होने के बाद चढ़ाया जाता है।
संध्या आरती में उमड़ती है श्रद्धा की भीड़
हर दिन संध्या काल की आरती के समय मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। इस दौरान भक्त हनुमान जी की प्रतिमा, अखंड ज्योति और पास में रखी चंदन की गदा के भी दर्शन करते हैं। मान्यता है कि ये सभी वस्तुएं भक्तों को भक्ति, शक्ति और सद्बुद्धि प्रदान करती हैं।
देश में है धार्मिक आस्था
उज्जैन का अखंड ज्योति हनुमान मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यह भक्तों के लिए आशा, विश्वास और आध्यात्मिक ऊर्जा का स्रोत भी माना जाता है। चमत्कारी प्रतिमा, न बुझने वाली ज्योति और शनि दोष से मुक्ति की मान्यताओं के कारण यह मंदिर विशेष महत्व रखता है और निरंतर श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है।



