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IQR रिपोर्ट में दुनिया का 58वां सबसे प्रदूषित शहर है लखनऊ – जानिए IAS मंगेश घिल्डियाल को मिला क्या?

रिपोर्ट – ब्रजेश शर्मा

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी, प्रदूषण के मामले में दिन-ब-दिन गंभीर होती जा रही है। हाल ही में, आईक्यूएयर द्वारा जारी की गई रिपोर्ट के अनुसार, लखनऊ दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में 58वें स्थान पर आ गया है। प्रदूषण का स्तर बढ़ता जा रहा है और इसे लेकर नागरिकों के बीच चिंता भी बढ़ी है।

आईक्यूएयर रिपोर्ट में लखनऊ का स्थान

आईक्यूएयर रिपोर्ट में लखनऊ को दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में 58वां स्थान मिला है। इस रिपोर्ट के अनुसार, लखनऊ में हवा की गुणवत्ता बेहद खराब हो चुकी है, जिससे लोगों की सेहत पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने का खतरा है। भारत के 259 शहरों में लखनऊ की रैंक 34वीं है, जो प्रदूषण की स्थिति को और भी चिंताजनक बनाता है।

जानिए भारत में प्रदूषण की स्थिति

भारत में प्रदूषण की समस्या काफी गंभीर हो चुकी है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में भारत के 64 शहर शामिल हैं। इनमें दिल्ली, लखनऊ, कानपुर, मुंबई और अन्य प्रमुख शहर शामिल हैं। यह स्थिति देशभर में बढ़ते प्रदूषण, बढ़ती वाहनों की संख्या, निर्माण कार्य, जलवायु परिवर्तन, और कृषि में उपयोग होने वाले रसायनों के कारण उत्पन्न हो रही है।

यूपी के 11 शहर प्रदूषण सूची में शामिल

उत्तर प्रदेश के 11 शहर प्रदूषण की इस सूची में शामिल हैं, जिसमें लखनऊ के अलावा कानपुर, आगरा, मेरठ, और इलाहाबाद जैसे शहरों का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है। यह बात यह दर्शाती है कि प्रदेश में प्रदूषण की समस्या केवल राजधानी तक ही सीमित नहीं है, बल्कि अन्य प्रमुख शहरों में भी यह गंभीर समस्या बन चुकी है।

प्रदूषण से स्वास्थ्य पर पड़ रहा असर

प्रदूषण का सीधा असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ता है। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और श्वसन रोगों से ग्रसित लोगों के लिए यह और भी खतरनाक साबित हो सकता है। प्रदूषित हवा में विभिन्न प्रकार के हानिकारक तत्व जैसे कि पीएम 2.5, पीएम 10, और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड होते हैं, जो शरीर के अंदर जाकर सांस लेने में दिक्कत, अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, और अन्य श्वसन संबंधी बीमारियां उत्पन्न कर सकते हैं।

पढ़ें अब आगे क्या कदम उठाए जा रहे हैं?

लखनऊ और अन्य प्रदूषित शहरों में प्रदूषण को कम करने के लिए सरकार और प्रशासन विभिन्न कदम उठा रहे हैं। सरकार ने कई योजनाओं की शुरुआत की है, जैसे कि सड़कों की सफाई, निर्माण कार्यों में धूल नियंत्रण, सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना, और सख्त वाहनों की जाँच। इसके अलावा, नागरिकों से अपील की जा रही है कि वे अपने वाहनों का ठीक से रख-रखाव करें, ताकि प्रदूषण को कम किया जा सके।

दिल्ली: IAS मंगेश घिल्डियाल को मिला सेवा विस्तार

दिल्ली में पीएमओ (प्रधानमंत्री कार्यालय) में निदेशक के तौर पर कार्यरत IAS अधिकारी मंगेश घिल्डियाल को 31 मार्च 2027 तक का एक साल का सेवा विस्तार दिया गया है। यह सेवा विस्तार उन्हें उनके कार्यकाल की सफलता और उनके द्वारा किए गए प्रभावशाली कार्यों के कारण दिया गया है।

जानें सेवा विस्तार के पीछे क्या कारण हैं?

IAS मंगेश घिल्डियाल को उनकी समर्पित सेवा और प्रशासनिक कौशल के लिए जाना जाता है। पीएमओ में निदेशक के तौर पर उनकी कार्यशैली ने कई अहम मुद्दों को सुलझाने में मदद की है। उनके काम की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय ने उन्हें यह सेवा विस्तार प्रदान किया है।

पढ़िए कितना रहा IAS मंगेश घिल्डियाल का योगदान

मंगेश घिल्डियाल का दिल्ली प्रशासन में कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स और सरकारी योजनाओं में अहम योगदान रहा है। उन्होंने प्रशासनिक सुधारों, नीति निर्माण, और कार्यान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनकी कार्यशैली और नेतृत्व क्षमता ने उन्हें उच्च अधिकारियों और सार्वजनिक सेवा क्षेत्र में एक प्रतिष्ठित नाम बना दिया है।

जानिए आगे की योजनाएं और कार्य

अब सेवा विस्तार मिलने के बाद, मंगेश घिल्डियाल आगामी समय में कई अहम प्रशासनिक कार्यों को आगे बढ़ाएंगे। उनके द्वारा किए गए प्रयासों से यह उम्मीद की जा रही है कि प्रधानमंत्री कार्यालय में और भी सुधार होंगे और विकास योजनाओं का प्रभावी कार्यान्वयन होगा।

लखनऊ में प्रदूषण की स्थिति ने नागरिकों के बीच चिंता को बढ़ा दिया है। सरकार को प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए और कड़े कदम उठाने होंगे। वहीं, दिल्ली में IAS मंगेश घिल्डियाल को मिला सेवा विस्तार उनके उत्कृष्ट कार्यों का परिणाम है, जो प्रशासनिक सेवा में एक प्रेरणा का स्रोत बनकर उभरा है।

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