Kanpur News: किसानों को मोती की खेती का दिया गया प्रशिक्षण: अब अनाज के साथ मोती उगाकर बढ़ेगी आय

Kanpur News: उत्तर प्रदेश के कानपुर नगर में किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को बहुआयामी बनाने की दिशा में एक सराहनीय पहल की गई है। भूमि संरक्षण कार्यालय, कानपुर में खेत तालाब योजना के अंतर्गत निर्मित तालाबों में मोती की खेती को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से एक दिवसीय प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में किसानों को मोती उत्पादन की आधुनिक तकनीक, लागत, संभावित लाभ और विपणन की संभावनाओं के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई।
दरअसल, बदलते समय के साथ खेती को लाभकारी बनाने के लिए नवाचार आधारित कृषि गतिविधियों की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है। इसी क्रम में मोती की खेती को एक वैकल्पिक और अतिरिक्त आय के साधन के रूप में प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को यह समझाना था कि सीमित संसाधनों और कम पानी में भी वे बेहतर आमदनी हासिल कर सकते हैं।
मणि एग्रो हब कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. अयूब हुसैन ने किया जागरूक
कार्यक्रम में मणि एग्रो हब कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. अयूब हुसैन ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि खेत तालाबों में मोती की खेती पारंपरिक फसलों के साथ-साथ आय बढ़ाने का एक प्रभावी माध्यम बन सकती है। उन्होंने बताया कि मोती उत्पादन एक वैज्ञानिक और तकनीकी प्रक्रिया है, जिसे सही प्रशिक्षण और मार्गदर्शन के साथ आसानी से अपनाया जा सकता है।
इसके अलावा, डॉ. अयूब हुसैन ने यह भी स्पष्ट किया कि मोती की खेती में पानी की खपत अपेक्षाकृत कम होती है और सीमित स्थान में भी इसका सफल उत्पादन संभव है। उन्होंने कहा कि यदि किसान अनाज उत्पादन के साथ मोती की खेती को जोड़ते हैं, तो यह उनके लिए आर्थिक रूप से मजबूत विकल्प साबित हो सकता है। साथ ही, गुणवत्तापूर्ण मोतियों की बाजार में लगातार मांग बनी रहती है, जिससे किसानों को उचित मूल्य मिलने की संभावना भी बढ़ जाती है।
आनंद त्रिपाठी ने बताए व्यावसायिक पहलू
वहीं, मणि एग्रो हब कंपनी के निदेशक आनंद त्रिपाठी ने मोती की खेती के व्यावसायिक पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने उत्पादन लागत, समय-सीमा और विपणन रणनीतियों पर प्रकाश डालते हुए किसानों को इस नवाचार आधारित कृषि गतिविधि से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि कंपनी किसानों को उत्पादन से लेकर विपणन तक तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराएगी।
किसानों ने निभाई सहभागिता
कार्यक्रम में कानपुर और उन्नाव जनपद के बड़ी संख्या में किसानों ने सहभागिता की। मोती मत्स्य उत्पादन में रुचि रखने वाले कई कृषकों ने प्रशिक्षण का लाभ उठाया और इसे अपनाने में गहरी रुचि दिखाई। इनमें वीरेन्द्र बहादुर सिंह (ग्राम सिकटिया, सरसौल), देवेन्द्र कुमार वर्मा (ग्राम घाटमपुर), अमिता सचान (ग्राम बिच्छीपुर) सहित सैकड़ों किसान शामिल रहे।
यह अधिकारी रहे मौजूद
इसके साथ ही, कार्यक्रम में कृषि और संबंधित विभागों के कई वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे। इनमें संयुक्त कृषि निदेशक देव शर्मा, उप कृषि निदेशक डॉ. आर. एस. वर्मा, भूमि संरक्षण अधिकारी आर. पी. कुशवाहा, जिला कृषि अधिकारी प्राची पाण्डेय, पूर्व अपर कृषि निदेशक बी. पी. राजपूत, पूर्व संयुक्त कृषि निदेशक उमेश कटियार और सहायक निदेशक मत्स्य सुनील कुमार प्रमुख रूप से शामिल थे। अधिकारियों ने किसानों को सरकारी योजनाओं के लाभ और तकनीकी सहायता के बारे में भी जानकारी दी।
अंततः, यह प्रशिक्षण कार्यक्रम किसानों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोलने वाला साबित हुआ। विशेषज्ञों का मानना है कि मोती की खेती जैसे नवाचारों को अपनाकर किसान न केवल अपनी आय में वृद्धि कर सकते हैं, बल्कि कृषि को अधिक टिकाऊ और लाभकारी भी बना सकते हैं। आने वाले समय में यदि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम निरंतर आयोजित किए जाएं, तो निश्चित रूप से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और किसान आत्मनिर्भरता की ओर एक कदम और आगे बढ़ेंगे।



