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Kanpur Sachendi Case: फरार दरोगा पर इनाम के बाद एक और आरोप, तुरंत पढ़िए अब क्या किया फरार अमित ने?

Kanpur Sachendi Case: उत्तर प्रदेश में इन दिनों कानपुर का सचेंडी प्रकरण लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। इस मामले में सामने आ रहे नए-नए घटनाक्रम न केवल जांच एजेंसियों के सामने चुनौतियां खड़ी कर रहे हैं, बल्कि आम जनता में भी कई सवाल उत्पन्न कर रहे हैं। शुरुआत एक गंभीर आपराधिक आरोप से हुई, जिसके बाद प्रशासनिक स्तर पर त्वरित कार्रवाई देखने को मिली। हालांकि, जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, मामला और अधिक जटिल होता चला गया।

इस तरह शुरू हुआ सिलसिला 

सबसे पहले, घटना सामने आने के बाद कानपुर के कमिश्नर ऑफ पुलिस रघुवीर लाल ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके तहत पीड़िता के बयान दर्ज कराए गए और जांच को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया गया। प्रारंभिक जांच में एक पुलिसकर्मी, दरोगा अमित मौर्य का नाम सामने आने के बाद प्रशासन की सक्रियता और बढ़ गई।

फरार दरोगा पर घोषित किया गया इनाम 

इसके बाद, जब दरोगा अमित मौर्य जांच के दौरान फरार पाया गया, तो पुलिस विभाग ने उस पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित कर दिया। यह कदम स्पष्ट संकेत देता है कि पुलिस इस मामले में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं बरतना चाहती। साथ ही, आरोपी की गिरफ्तारी के लिए कई टीमें गठित की गईं और संभावित ठिकानों पर दबिश दी जाने लगी।

फरार दरोगा ने की फरियाद 

इसी बीच, मामले में एक नया मोड़ तब आया जब फरार दरोगा अमित मौर्य की ओर से एक पत्र सामने आया। इस पत्र में आरोपी ने स्वयं को निर्दोष बताते हुए पूरे मामले की CBI जांच की मांग की। उसने दावा किया कि उसे साजिश के तहत फंसाया जा रहा है और निष्पक्ष जांच के लिए केंद्रीय एजेंसी से जांच कराना आवश्यक है। इस पत्र के सार्वजनिक होते ही राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया।

फरियाद के बाद फरार दरोगा पर लगा यह आरोप 

हालांकि, यह विवाद अभी शांत भी नहीं हुआ था कि पीड़िता पक्ष की ओर से एक और गंभीर आरोप सामने आया। पीड़िता के भाई ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराते हुए कहा कि फरार दरोगा अमित मौर्य की ओर से उन्हें लगातार व्हाट्सएप के माध्यम से धमकी भरे संदेश भेजे जा रहे हैं। शिकायत के अनुसार, संदेशों में नौकरी से जुड़ी धमकियां दी गईं और मानसिक दबाव बनाने की कोशिश की गई।

पीड़िता के भाई का आरोप है कि इन संदेशों में स्पष्ट रूप से कहा गया कि “नौकरी से मत खेलो, वरना रोना पड़ेगा।” इस शिकायत के बाद एक बार फिर पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। परिवार का कहना है कि आरोपी के फरार होने के बावजूद इस तरह की धमकियां मिलना जांच प्रक्रिया की सुरक्षा पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।

इसके अतिरिक्त, यह भी सवाल उठाया जा रहा है कि इनाम घोषित होने के आठ दिन बाद भी आरोपी की गिरफ्तारी क्यों नहीं हो सकी। इस विषय पर पुलिस अधिकारियों का कहना है कि गिरफ्तारी के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं और आरोपी को जल्द ही कानून के दायरे में लाया जाएगा।

लगातार जारी है जांच 

वहीं, पुलिस प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि धमकी के आरोपों की अलग से जांच की जा रही है। यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार, पीड़िता और उसके परिवार की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।

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