कानपुर में शिवाजी महाराज की जयंती पर छात्र शक्ति की हुंकार, मोतीझील में उमड़ा जनसैलाब

कानपुर: कानपुर के मोती झील स्थित परिसर में इस बार शिवाजी महाराज की जयंती को बेहद धूमधाम और जोश के साथ मनाया गया। यह आयोजन छात्र शक्ति द्वारा किया गया था, जिसमें छात्रों की भारी भीड़ और जोश ने पूरे वातावरण को प्रफुल्लित कर दिया। इस कार्यक्रम ने न केवल शिवाजी महाराज के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित की, बल्कि युवाओं को उनकी वीरता और संघर्ष के मार्ग पर चलने की प्रेरणा भी दी।
शिवाजी महाराज की जयंती के अवसर पर आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में हजारों की संख्या में छात्र-छात्राएं और नागरिक उपस्थित हुए। आयोजन का मुख्य उद्देश्य महापुरुष के योगदान को याद करना और उनके विचारों को आज के युवाओं तक पहुंचाना था। इस अवसर पर छात्र शक्ति ने ‘जय भवानी’ के नारों से मोतीझील को गुंजायमान कर दिया और एकता, शक्ति और देशभक्ति के संदेश को फैलाया।
शिवाजी के जीवन से प्रेरणा लेने का संकल्प
कार्यक्रम में छात्र शक्ति ने एक नई ऊर्जा के साथ शिवाजी महाराज के जीवन से प्रेरणा लेने का संकल्प लिया। छात्रों ने मोतीझील में स्थित छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा के समक्ष श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। शिवाजी के शौर्य और नेतृत्व के आदर्शों को जीवन में उतारने के लिए छात्रों ने सामूहिक शपथ ली।
कार्यक्रम में अनस, अमन, गौरांग और शुभम की अगुवाई में छात्रशक्ति ने एकता और अखंडता का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया। इनके नेतृत्व में छात्र शक्ति ने विभिन्न सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों में भाग लिया और इस आयोजन को सफल बनाने में अपना योगदान दिया। इस अवसर पर छात्रों ने अपने ‘शेर दिल’ अंदाज से यह सिद्ध कर दिया कि वे न केवल पढ़ाई में, बल्कि समाज सेवा और देशभक्ति में भी अग्रणी हैं।
महापुरुषों के सम्मान में भव्य माल्यार्पण
कार्यक्रम का एक और मुख्य आकर्षण था महापुरुषों के सम्मान में मोतीझील में आयोजित भव्य माल्यार्पण। यह माल्यार्पण न केवल शिवाजी महाराज, बल्कि उन तमाम महापुरुषों के प्रति श्रद्धा और सम्मान का प्रतीक था जिन्होंने देश की स्वतंत्रता और संस्कृति की रक्षा के लिए संघर्ष किया। इस कार्यक्रम में छात्रों ने एकजुट होकर न केवल शिवाजी महाराज की प्रतिमा पर फूल चढ़ाए, बल्कि उनके योगदान को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी।
महाराज के सम्मान में दुग्धाभिषेक
सिर्फ माल्यार्पण ही नहीं, बल्कि इस आयोजन का एक और विशेष आयोजन था छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा पर भव्य दुग्धाभिषेक। यह दृश्य बेहद भावुक था और छात्रों के समर्पण और श्रद्धा का प्रतीक था। इस अभिषेक ने सभी उपस्थित लोगों को देश की संस्कृति और विरासत की याद दिलाई। यह आयोजन निश्चित ही कानपुर के इतिहास में एक महत्वपूर्ण स्थान बनाएगा।
शिवाजी महाराज की जयंती पर शौर्य और पराक्रम का वंदन
कार्यक्रम के दौरान छात्र शक्ति ने शौर्य और पराक्रम का वंदन करते हुए यह संदेश दिया कि वे अपनी संस्कृति और स्वाभिमान की रक्षा करने के लिए हमेशा तैयार हैं। “अपनी संस्कृति और स्वाभिमान की रक्षा ही सबसे बड़ा छात्र धर्म है” का नारा लगाते हुए छात्रों ने यह सिद्ध कर दिया कि वे अपने राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारी को पूरी तरह से समझते हैं और उसे निभाने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं।
छात्र शक्ति का नेतृत्व और एकता का प्रदर्शन
इस कार्यक्रम में छात्र नेताओं ने अपने ‘शेर दिल’ अंदाज का प्रदर्शन किया और यह दिखाया कि वे केवल कागजों में नहीं, बल्कि कार्यों में भी अपने आदर्शों का पालन करते हैं। मोतीझील में आयोजित यह भव्य कार्यक्रम यह साबित करने के लिए काफी था कि छात्रशक्ति किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह से तैयार है।
अनस, अमन, गौरांग और शुभम जैसे युवा नेता, जिन्होंने इस कार्यक्रम को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई, ने यह सिद्ध किया कि नेतृत्व और प्रेरणा की शक्ति छात्रों के अंदर ही समाहित है। इन नेताओं के नेतृत्व में छात्र शक्ति ने अपनी एकजुटता और सामूहिक शक्ति का प्रदर्शन किया, जिससे पूरे कानपुर शहर में एक सकारात्मक संदेश गया।
कानपुर विश्वविद्यालय की छात्रा शक्ति का भविष्य
इस कार्यक्रम से यह भी स्पष्ट हुआ कि कानपुर विश्वविद्यालय की छात्रा शक्ति शून्य से शिखर तक का सफर तय करने के लिए पूरी तरह से तैयार है। शिवाजी महाराज के विचारों को अपने जीवन में उतारते हुए छात्र शक्ति ने यह प्रमाणित किया कि वे भविष्य में समाज के हर क्षेत्र में अपना योगदान देंगे।
कार्यक्रम में उपस्थित छात्र-छात्राओं ने एकजुट होकर यह संदेश दिया कि वे अपने समग्र समर्पण और जोश के साथ समाज में बदलाव लाने के लिए तैयार हैं।



