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Lord Shri Shanidev: न्याय, करुणा और धर्म के प्रतीक, पढ़िए किसकी भक्ति से मिलती है शनि पीड़ा से मुक्ति

Lord Shri Shanidev: शनिवार का दिन भगवान श्री शनिदेव को समर्पित माना जाता है। हिंदू धर्म में शनिदेव को न्याय, कर्म और अनुशासन का देवता कहा गया है। हालांकि, लंबे समय से समाज में उनके नाम से भय जोड़ा जाता रहा है, लेकिन धर्मग्रंथों और विद्वानों के अनुसार यह धारणा पूरी तरह सत्य नहीं है। वास्तव में भगवान शनिदेव करुणा और न्याय की मूर्ति हैं, जो मनुष्य को उसके कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं।

जानिए क्यों कहा जाता है चरित्र निर्माण के देवता

दरअसल, जब शनि किसी व्यक्ति के जीवन में प्रवेश करते हैं, तो वह मनुष्य को कमजोर नहीं बनाते, बल्कि उसे समय और परिस्थितियों से संघर्ष करने की शक्ति प्रदान करते हैं। ऐसे में व्यक्ति अन्याय के विरुद्ध खड़े होने का साहस जुटाता है और आत्मबल के साथ जीवन की कठिन परीक्षाओं का सामना करता है। इसलिए शनिदेव को दंड देने वाला नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण करने वाला देवता माना गया है।

ग्रहों में है विशेष स्थान 

यदि नवग्रहों की बात की जाए, तो शनि देव का स्थान सबसे अलग और विशिष्ट है। मान्यता है कि अन्य ग्रह जहां केवल फल देकर अपने प्रभाव से हट जाते हैं, वहीं भगवान शनिदेव मनुष्य को कष्ट देने के बाद उसके उद्धार का मार्ग भी स्वयं प्रशस्त करते हैं। इसी कारण उन्हें नवग्रहों का ‘मुकुट मणि’ कहा गया है।

हनुमान जी की मित्र हैं शनि महाराज 

इसके साथ ही भगवान शनिदेव और श्री हनुमान जी महाराज के संबंधों का विशेष उल्लेख धार्मिक कथाओं में मिलता है। कहा जाता है कि शनिदेव स्वयं श्री हनुमान जी को अपना अनन्य मित्र मानते हैं। यही कारण है कि जो भी व्यक्ति सच्चे मन से हनुमान जी की भक्ति करता है, उस पर शनि की पीड़ा प्रभाव नहीं डालती। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हनुमान भक्तों से शनिदेव अपनी दृष्टि भी फेर लेते हैं।

जानिए क्यों किए जाते है दर्शन 

इसी क्रम में यह भी कहा जाता है कि शनिदेव के दर्शन के बाद यदि श्रद्धालु श्री हनुमान जी के दर्शन अवश्य करे, तो उसका जीवन संतुलित और बाधा रहित बनता है। लोक मान्यता है कि जहां शनि देव का वास होता है, वहां हनुमान जी की उपस्थिति भी अवश्य रहती है। यही कारण है कि कई शनि मंदिरों में हनुमान जी की प्रतिमा भी देखने को मिलती है।

हालांकि, आज के समय में शनि पीड़ा से मुक्ति के लिए अनेक उपाय और साधन बताए जाते हैं, लेकिन धर्माचार्यों का मत है कि केवल बाहरी साधन पर्याप्त नहीं होते। वास्तव में शनि पीड़ा से मुक्ति का सबसे सरल और प्रभावशाली उपाय श्री हनुमान जी की निष्काम भक्ति है। इसके साथ-साथ सत्य, संयम और सदाचार से युक्त जीवन ही शनिदेव की कृपा प्राप्त करने का मार्ग प्रशस्त करता है।

रूद्र अवतारी हैं शनिदेव 

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार भगवान श्री शनिदेव को रुद्र का अवतार भी माना गया है। वे मनुष्य के बाहरी आडंबर को नहीं, बल्कि उसके चरित्र और कर्मों को देखकर व्यवहार करते हैं। साधु वृत्ति और धर्म मार्ग पर चलने वाले लोगों के लिए शनिदेव कल्याणकारी होते हैं, वहीं दुष्ट प्रवृत्ति और अन्याय करने वालों के लिए वे काल स्वरूप माने गए हैं।

इस मंत्र का करें जाप 

शनिदेव की कृपा प्राप्त करने के लिए शास्त्रों में मंत्र जाप का भी विशेष महत्व बताया गया है। श्रद्धालुओं द्वारा नियमित रूप से इस मंत्र का जाप करने की परंपरा है—

“ॐ नीलांजन समाभासं रवि पुत्रं यमाग्रजम्।
छाया मार्तण्ड सम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्॥
ॐ शं शनैश्चराय नमः।”

अंततः यही कहा जा सकता है कि भगवान श्री शनिदेव भय के नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और आत्मशुद्धि के देवता हैं। वे मनुष्य को उसके कर्मों का बोध कराते हैं और सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। सच्ची भक्ति, हनुमान जी में अटूट विश्वास और धर्मयुक्त जीवन ही शनिदेव की अनुकंपा प्राप्त करने का मूल मंत्र है।

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