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Shravasti: पाकिस्तान बम ब्लास्ट के विरोध में शिया, हिंदू और मुस्लिम समुदाय ने किया संयुक्त प्रदर्शन

रिपोर्ट – सूर्य प्रकाश शुक्ला 

उत्तर प्रदेश: श्रावस्ती जिले के नासिरगंज कस्बे में शिया जामा मस्जिद में पाकिस्तान में हुए बम ब्लास्ट के विरोध में आज शाम एक बड़ा और ऐतिहासिक प्रदर्शन आयोजित किया गया। यह प्रदर्शन विशेष रूप से शिया समुदाय के अंजुमन हुसैनिया नासिरगंज द्वारा आयोजित किया गया था, जिसमें स्थानीय हिंदू और मुस्लिम समुदायों के लोगों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

शिया समुदाय ने सबसे पहले 6 फरवरी को इस्लामाबाद, पाकिस्तान में शिया जामा मस्जिद पर हुए भयानक बम धमाके में शहीद हुए लोगों को श्रद्धांजलि देने के लिए दो मिनट का मौन रखा। इसके बाद ही एक विरोध मार्च का आयोजन किया गया, जो हुसैनिया इमामबाड़े से प्रारंभ होकर मुख्य चौराहे तक गया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर पाकिस्तान सरकार और आतंकवाद के खिलाफ कड़े नारे लगाए।

पाकिस्तानी सरकार का दहन किया गया पुतला 

विशेष रूप से इस प्रदर्शन में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री आसिम मुनीर और पाकिस्तान सरकार के पुतले का दहन किया गया। प्रदर्शनकारियों ने जोर-जोर से “आतंकवाद मुर्दाबाद” और “पाकिस्तान मुर्दाबाद” के नारे लगाए। इस विरोध प्रदर्शन में आरएसएस, विश्व हिंदू परिषद के कई नेता भी उपस्थित थे, साथ ही स्थानीय हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोगों ने भी इसे अपना समर्थन दिया।

प्रदर्शन के दौरान नासिरगंज प्रशासन ने सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए थे। बड़ी संख्या में पुलिस बलों की तैनाती की गई थी ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके। नायब तहसीलदार जमुनहा को प्रधानमंत्री के नाम एक ज्ञापन भी सौंपा गया, जिसमें पाकिस्तान में हो रहे आतंकवादी हमलों की कड़ी निंदा की गई और भारत सरकार से कार्रवाई की मांग की गई।

प्रदर्शनकारियों ने बुलंद की अपनी आवाज 

प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट रूप से कहा कि आतंकवाद और इस्लाम का कोई संबंध नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि “जहां आतंकवाद है, वहां इस्लाम नहीं है और जहां इस्लाम है, वहां आतंकवाद नहीं है।” इस बात ने एक संदेश दिया कि धार्मिक समुदायों के बीच भाईचारा और एकता को बनाए रखना अत्यंत महत्वपूर्ण है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के संयुक्त विरोध प्रदर्शन, जहां विभिन्न धार्मिक समुदाय एक साथ शामिल होते हैं, वह न केवल आतंकवाद के खिलाफ जन चेतना बढ़ाते हैं बल्कि सामाजिक एकता और सामुदायिक सह-अस्तित्व के लिए भी प्रेरक साबित होते हैं।

इसके अलावा, इस विरोध प्रदर्शन ने यह संदेश भी दिया कि आतंकवाद को किसी धर्म या जाति से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। प्रदर्शन में शामिल लोगों ने एकता और शांति का संदेश देते हुए कहा कि सभी धर्मों के लोग आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठाएं।

शांतिपूर्ण संपन्न हुआ विरोध प्रदर्शन 

श्रावस्ती जिले में इस तरह के शांतिपूर्ण और संगठित विरोध प्रदर्शन का आयोजन यह दर्शाता है कि नागरिकों में सामाजिक और राष्ट्रीय चेतना किस हद तक विकसित हो रही है। प्रदर्शनकारियों ने यह भी संकेत दिया कि वे आतंकवाद और उससे जुड़े कृत्यों के खिलाफ हमेशा सतर्क रहेंगे और इसके लिए शांति और संयम का मार्ग अपनाएंगे।

इस अवसर पर स्थानीय प्रशासन ने भी पूरे संयम और अनुशासन के साथ स्थिति का प्रबंधन किया। उन्होंने सुनिश्चित किया कि प्रदर्शन के दौरान न तो कोई हिंसा हो और न ही किसी नागरिक या संपत्ति को नुकसान पहुंचे। प्रदर्शन के अंत में, सभी समुदायों के लोगों ने एक साथ पाकिस्तान में शहीद हुए लोगों के लिए प्रार्थना की और आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होने का संकल्प लिया।

आतंकवाद के विरोध से मिलती है एकता 

इस विरोध प्रदर्शन ने यह साबित किया कि चाहे किसी भी धर्म, जाति या समुदाय के लोग हों, वे आतंकवाद के खिलाफ समान रूप से खड़े हो सकते हैं। यह उदाहरण हमारे समाज के लिए प्रेरक है कि जब सही दिशा में एकजुट होकर कदम उठाए जाएं, तो किसी भी चुनौती का सामना किया जा सकता है।

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