जानिए भगवान श्री गणेश और उनके परिवार की पूजा का महत्व: बुधवार को करें विशेष आराधना और ऐसे पाएं सुख-समृद्धि

सनातन धर्म में भगवान श्रीगणेश को प्रथम पूज्य देवता माना गया है। किसी भी शुभ, मांगलिक या धार्मिक कार्य की शुरुआत भगवान गणेश की आराधना के बिना अधूरी मानी जाती है। वे न केवल विघ्नहर्ता हैं, बल्कि बुद्धि, विवेक, समृद्धि और सौभाग्य के भी प्रतीक हैं। यही कारण है कि देवताओं से लेकर मानव जीवन तक, हर क्षेत्र में गणेश पूजा का विशेष महत्व बताया गया है।
भगवान श्री गणेश का पारिवारिक स्वरूप
सामान्यतः लोग भगवान गणेश को माता पार्वती और भगवान शिव के पुत्र के रूप में जानते हैं, लेकिन बहुत कम लोग उनके संपूर्ण पारिवारिक स्वरूप से परिचित हैं। धार्मिक मान्यताओं और पुराणों के अनुसार भगवान गणेश की दो पत्नियां मानी गई हैं—ऋद्धि और सिद्धि। ये दोनों देवी क्रमशः समृद्धि और सफलता की प्रतीक हैं।
इसके अलावा, शुभ और लाभ को भगवान गणेश की संतान माना गया है। यही कारण है कि आज भी घरों के मुख्य द्वार, दुकानों, कार्यालयों और पूजा घरों में “शुभ” और “लाभ” शब्द अंकित किए जाते हैं। यह परंपरा समृद्धि, स्थायित्व और सकारात्मक ऊर्जा का संकेत मानी जाती है।
पढ़िए क्यों अनिवार्य है गणेश जी की अग्रपूजा
शास्त्रों में उल्लेख मिलता है कि स्वयं देवताओं ने भगवान गणेश को अग्रपूजा का अधिकार दिया है। एक पौराणिक कथा के अनुसार, जब भगवान शिव त्रिपुरासुर का वध करने में असफल रहे, तब उन्होंने आत्मचिंतन किया। तभी उन्हें यह बोध हुआ कि वे गणेश जी की पूजा किए बिना युद्ध के लिए निकल पड़े थे।
इसके पश्चात महादेव ने विधिपूर्वक भगवान गणेश का पूजन किया, उन्हें लड्डुओं का भोग लगाया और आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके बाद जब उन्होंने त्रिपुरासुर पर आक्रमण किया, तो विजय प्राप्त हुई। इस कथा से यह स्पष्ट होता है कि बिना गणेश पूजन के कोई भी कार्य पूर्ण नहीं होता।
विघ्नहर्ता गणेश और ग्रह दोषों का नाश
सनातन धर्म के अनुसार भगवान गणेश को विघ्नहर्ता कहा गया है, अर्थात वे जीवन की सभी बाधाओं को दूर करने वाले हैं। इतना ही नहीं, पुराणों में यह भी बताया गया है कि गणेश जी की भक्ति से शनि सहित सभी ग्रह दोष शांत होते हैं।
विशेष रूप से बुधवार का दिन भगवान गणेश को समर्पित माना गया है। इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक गणेश जी की पूजा करने से व्यक्ति के जीवन में आने वाली रुकावटें दूर होती हैं और सुख-सौभाग्य में वृद्धि होती है।
बुधवार को गणेश परिवार की पूजा का विशेष महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यदि बुधवार के दिन भगवान गणेश की उनके संपूर्ण परिवार सहित पूजा की जाए, तो विशेष फल की प्राप्ति होती है। इस पूजा में ऋद्धि-सिद्धि और शुभ-लाभ का पूजन भी शामिल होता है।
ऐसा माना जाता है कि केवल विघ्नों का नाश ही नहीं, बल्कि आर्थिक स्थिरता, पारिवारिक सुख और मानसिक शांति भी इस पूजा से प्राप्त होती है। इसलिए, जो लोग जीवन में निरंतर प्रगति और समृद्धि चाहते हैं, उनके लिए यह पूजा अत्यंत शुभ मानी जाती है।
जानिए पूजा की विधि (संक्षेप में)
सबसे पहले सुबह या शाम के समय स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद:
- ऋद्धि-सिद्धि सहित भगवान गणेश की मूर्ति या चित्र को पवित्र जल से स्नान कराएं
- पूजा स्थल को स्वच्छ करें और दो स्वस्तिक बनाएं, जिन्हें लाभ-क्षेम का प्रतीक माना जाता है
- भगवान गणेश और उनके परिवार को केसरिया वस्त्र, चंदन, सिंदूर, अक्षत और दूर्वा अर्पित करें
- लड्डू या मोदक का भोग लगाएं
- “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करें
इस पूजा को शांत मन और पूर्ण श्रद्धा के साथ करने से साधक को सकारात्मक परिणाम प्राप्त होते हैं।
जीवन में मिलता है सुख-समृद्धि का आधार
भगवान गणेश जहां विघ्नहर्ता हैं, वहीं ऋद्धि-सिद्धि से विवेक और समृद्धि प्राप्त होती है। शुभ और लाभ घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं और आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाते हैं। यही कारण है कि गणेश परिवार की पूजा को केवल धार्मिक कर्मकांड नहीं, बल्कि जीवन को संतुलित और सफल बनाने का माध्यम भी माना गया है।



