
रिपोर्ट – ब्रजेश शर्मा
उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटर को लेकर चल रही बहस एक बार फिर तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए स्मार्ट मीटर प्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में “स्मार्ट मीटर की परेशानियां खत्म नहीं हो रही हैं” और आम जनता को अनावश्यक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

अखिलेश यादव ने अपने पोस्ट में कहा कि उत्तर प्रदेश में अब “पीड़ित लोगों की एक नई श्रेणी बन गई है,” जिसे उन्होंने ‘प्रीपेड पीड़ित’ नाम दिया। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
‘प्रीपेड पीड़ित’ शब्द से उठाया मुद्दा
अखिलेश यादव ने कहा कि स्मार्ट मीटर की खामियों के कारण लोग अंधेरे और गर्मी के संकट से जूझने को मजबूर हैं। उनका आरोप है कि प्रीपेड व्यवस्था में पहले भुगतान लिया जाता है, लेकिन सेवा में समस्याएं बनी रहती हैं।

उन्होंने लिखा कि बिजली कंपनियों को पैसा पहले मिल जाता है, जबकि उपभोक्ता शिकायत लेकर दर-दर भटकने को मजबूर हैं। इसके साथ ही उन्होंने सरकार से सवाल किया कि यदि स्मार्ट मीटर व्यवस्था इतनी प्रभावी है, तो उपभोक्ताओं की शिकायतों का त्वरित समाधान क्यों नहीं हो पा रहा है।
सरकार और कंपनियों पर उठाए सवाल
अखिलेश यादव ने अपने पोस्ट में यह भी पूछा कि आखिर सरकार और बिजली कंपनियां जनता को क्यों परेशान कर रही हैं। उन्होंने दावा किया कि आम उपभोक्ता की सुनवाई नहीं हो रही है और शिकायत तंत्र प्रभावी नहीं है।

हालांकि, सरकार की ओर से अब तक इस पोस्ट पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। दूसरी ओर, ऊर्जा विभाग पहले भी यह स्पष्ट कर चुका है कि स्मार्ट मीटर पारदर्शिता बढ़ाने और बिलिंग प्रणाली को बेहतर बनाने के लिए लगाए जा रहे हैं।
स्मार्ट मीटर क्या है और विवाद क्यों?
स्मार्ट मीटर एक डिजिटल प्रणाली है, जिसमें उपभोक्ता को प्रीपेड या पोस्टपेड मोड में बिजली उपयोग का भुगतान करना होता है। प्रीपेड मोड में उपभोक्ता पहले रिचार्ज कराता है और उसी के अनुसार बिजली आपूर्ति मिलती है।

सरकार का दावा है कि इससे बिलिंग में पारदर्शिता आएगी, लाइन लॉस कम होगा और उपभोक्ताओं को वास्तविक खपत के अनुसार भुगतान करना होगा। वहीं, विपक्ष का आरोप है कि कई स्थानों पर मीटर रीडिंग, तकनीकी खामियों और अचानक बिजली कटने जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं।
राजनीतिक संदर्भ में बयान
गौरतलब है कि प्रदेश में आगामी चुनावी माहौल के बीच बिजली और महंगाई जैसे मुद्दे राजनीतिक विमर्श के केंद्र में हैं। ऐसे में अखिलेश यादव का यह बयान सीधे तौर पर सरकार की नीतियों पर सवाल खड़ा करता है।

जानकारों का मानना है कि स्मार्ट मीटर जैसी तकनीकी योजनाओं के सफल क्रियान्वयन के लिए मजबूत शिकायत निवारण तंत्र और जनजागरूकता आवश्यक है। यदि उपभोक्ताओं को समय पर समाधान नहीं मिलता, तो असंतोष बढ़ सकता है।
पढ़िए क्या है उपभोक्ताओं की प्रतिक्रिया
प्रदेश के कई जिलों से समय-समय पर स्मार्ट मीटर से जुड़ी शिकायतें सामने आई हैं। हालांकि, कई उपभोक्ता ऐसे भी हैं जो इसे सुविधाजनक बता रहे हैं। इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि पूरी व्यवस्था असफल है या सफल।

फिलहाल, अखिलेश यादव के ‘प्रीपेड पीड़ित’ वाले बयान ने इस मुद्दे को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है। अब देखना यह होगा कि सरकार इस पर क्या प्रतिक्रिया देती है और क्या उपभोक्ताओं की शिकायतों के समाधान के लिए कोई नई पहल की जाती है।



