
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में राज्यकर्मियों को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने मानव संपदा पोर्टल पर संपत्ति का ब्योरा न देने वाले 47,816 कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी है। सरकार ने यह कदम उन कर्मचारियों के खिलाफ उठाया है जिन्होंने 31 जनवरी 2026 तक पोर्टल पर अपनी चल और अचल संपत्ति का विवरण अपलोड नहीं किया।
मुख्य सचिव के निर्देश पर राज्यकर्मियों का जनवरी माह का वेतन रोका जाएगा और उनके पदोन्नति पर भी रोक लगा दी जाएगी। साथ ही, विभागीय प्रमुखों को एक सप्ताह के भीतर संबंधित कर्मचारियों के मामले की रिपोर्ट सौंपी जाएगी। यदि वेतन भुगतान किया गया तो डीडीओ (डिवीजनल डिस्ट्रिक्ट ऑफिसर्स) पर भी कार्रवाई की जाएगी।
जानिए क्यों जरूरी है संपत्ति का विवरण?
उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्यकर्मियों से मानव संपदा पोर्टल पर अपनी संपत्ति का ब्योरा जमा करने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए थे। यह पोर्टल सरकारी कर्मचारियों की संपत्ति की जानकारी इलेक्ट्रॉनिक रूप में इकट्ठा करने और उनकी आर्थिक स्थिति की निगरानी के लिए शुरू किया गया था। राज्य सरकार का यह कदम गवर्नेंस में पारदर्शिता और भ्रष्टाचार पर नियंत्रण लाने के उद्देश्य से है।
राज्यकर्मियों से संपत्ति विवरण एकत्रित करना सरकार की ओर से आर्थिक निगरानी का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। यह प्रक्रिया यह सुनिश्चित करती है कि सरकारी कर्मचारियों की संपत्ति में कोई अत्यधिक वृद्धि न हो और कानूनी तरीके से उनकी संपत्ति अर्जित की जाए।
47,816 कर्मचारियों पर कार्रवाई
इसी क्रम में, सरकार ने उन 47,816 कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की घोषणा की है, जिन्होंने निर्धारित समय तक अपनी संपत्ति का ब्योरा पोर्टल पर नहीं डाला। 8,17,644 कर्मचारी समय पर संपत्ति विवरण अपलोड करने में सफल रहे हैं, लेकिन 47,816 कर्मियों ने पोर्टल के बंद होने तक संपत्ति का ब्योरा नहीं दिया। इस कारण अब उनके वेतन और पदोन्नति पर रोक लगा दी गई है।
राज्यकर्मियों के इस मामले में लापरवाही की वजह से सरकार को मजबूरन कड़े कदम उठाने पड़े हैं। मुख्य सचिव ने यह स्पष्ट किया है कि इस दिशा में कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी। इसके अलावा, उन कर्मचारियों के खिलाफ जो निर्धारित समय में संपत्ति विवरण नहीं देते हैं, अनुशासनात्मक कार्रवाई की भी बात की गई है।
वेतन और पदोन्नति पर रोक
वेतन रोकने और पदोन्नति पर रोक लगाने का निर्णय कर्मचारियों को अनुशासन में लाने के लिए लिया गया है। सरकार ने यह कदम उन कर्मचारियों के खिलाफ उठाया है, जिन्होंने अपनी संपत्ति का ब्योरा देने में असमर्थता दिखाई है। हालांकि, सरकार ने यह भी कहा है कि यदि वे कर्मचारी अगले कुछ दिनों में संपत्ति का ब्योरा देते हैं तो वे वेतन और पदोन्नति के मामले में राहत पा सकते हैं।
इसके साथ ही, डीडीओ (डिवीजनल डिस्ट्रिक्ट ऑफिसर्स) पर भी जिम्मेदारी डाली गई है। यदि कर्मचारियों का वेतन निर्धारित समय पर जारी किया गया और सरकार की जांच के दौरान यह पाया गया कि नियमों का उल्लंघन हुआ है, तो डीडीओ के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
विभागीय प्रमुखों को निर्देश
राज्य सरकार ने सभी विभागीय प्रमुखों को आदेश दिया है कि वे अगले एक सप्ताह में उन कर्मचारियों के मामलों की रिपोर्ट सौंपें जिन्होंने संपत्ति का ब्योरा नहीं दिया। विभागीय प्रमुखों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि सभी कर्मचारियों को संपत्ति विवरण देने के निर्देश स्पष्ट रूप से दिए गए हैं। इसके साथ ही, विभागीय प्रमुखों को यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया है कि उन कर्मचारियों पर कड़ी निगरानी रखी जाए जो नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं।
भविष्य के लिए दिशा-निर्देश
यह कदम राज्य सरकार के सम्पत्ति विवरण नीति को लागू करने और उसकी गंभीरता को स्थापित करने के लिए उठाया गया है। सरकार का उद्देश्य यह है कि सभी सरकारी कर्मचारियों द्वारा आर्थिक पारदर्शिता बनाई जाए, ताकि किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार या अवैध संपत्ति अर्जन को रोका जा सके। इसी के तहत सभी कर्मचारियों को एक निर्धारित समय सीमा में संपत्ति का विवरण देना अनिवार्य कर दिया गया है।



