कानपुर: चकेरी में प्लॉट कब्जे का आरोप आया सामने – पीड़ित ने पुलिस पर निष्क्रियता का लगाया आरोप

रिपोर्ट – शुभम शर्मा
कानपुर: थाना चकेरी क्षेत्र से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने स्थानीय प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पीड़ित परिवार का आरोप है कि दबंगों ने उनके प्लॉट पर अवैध कब्जा कर लिया, मकान को बुलडोजर से गिरा दिया और विरोध करने पर धमकियां दीं। इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी दावा किया कि शिकायत करने के बावजूद पुलिस ने समय पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।

हालांकि, पुलिस की ओर से अभी तक आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन पीड़ित पक्ष ने पुलिस कमिश्नर कार्यालय में पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई है। इस पूरे घटनाक्रम ने क्षेत्र में चर्चा का विषय बना दिया है।
जानिए क्या है पूरा मामला?
पीड़ित के रिश्तेदार अजीत के अनुसार, मामला थाना चकेरी क्षेत्र के पटेल नगर स्थित प्लॉट संख्या 42/36 ए का है। उनका कहना है कि उनके परिचित केशरानी, जो पीएसी लाइन चकेरी के निवासी हैं, पिछले लगभग 40 वर्षों से उक्त स्थान पर रह रहे थे।

अजीत का दावा है कि यह भूमि मूल रूप से अम्बिका प्रसाद की है, जिनकी 25 बीघा जमीन में से 6 बीघा भूमि निवास और देखरेख के उद्देश्य से दी गई थी। इसी आधार पर केशरानी और उनका परिवार वहां रह रहा था।
हालांकि, 4 फरवरी को कथित रूप से कुछ लोगों ने एकजुट होकर बुलडोजर से मकान गिरा दिया। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि घटना के दौरान घर का सामान भी वाहन में लादकर ले जाया गया।
पढ़िए आरोपियों के नाम और उन पर लगे गंभीर आरोप
पीड़ित पक्ष ने कुछ स्थानीय व्यक्तियों पर साजिश और अवैध कब्जे का आरोप लगाया है। आरोप है कि विकास पांडेय, अभिषेक पांडे, विशाल पांडे, प्रिंस श्रीवास्तव, अर्पित वाजपेई, अवनीश शुक्ला, सोनू माली, रेखा मिश्रा, सचिन पाल और अभिषेक तिवारी सहित अन्य लोगों ने मिलकर यह कार्रवाई की।

हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और आरोपित पक्ष की ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में मामला पूरी तरह जांच के अधीन है।
पीड़ित ने उठाये पुलिस की भूमिका पर सवाल
अजीत का कहना है कि जब उन्होंने डायल 112 पर सूचना दी, तब मौके पर पुलिस नहीं पहुंची। इसके अतिरिक्त, उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय थाने की पुलिस ने उनकी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया।

पीड़ित के अनुसार, जब वे अपने प्लॉट पर पहुंचे तो आरोपियों ने कथित रूप से हथियार दिखाकर उन्हें भगा दिया। इतना ही नहीं, केशरानी को थाने में बैठाकर झूठे मुकदमे में जेल भेजने की धमकी देने का भी आरोप लगाया गया है। हालांकि, इन सभी आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी शेष है और पुलिस की ओर से विस्तृत बयान का इंतजार किया जा रहा है।
पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंचा पीड़ित परिवार
न्याय की उम्मीद में पीड़ित परिवार ने पुलिस कमिश्नर कार्यालय का रुख किया। उन्होंने लिखित शिकायत देकर निष्पक्ष जांच की मांग की है।

परिवार का कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच हो तो सच्चाई सामने आ सकती है। साथ ही, उन्होंने सुरक्षा की भी मांग की है ताकि किसी प्रकार की अप्रिय घटना न हो।
शहर में बढ़ी हैं भूमि विवादों की घटनाएं
कानपुर सहित प्रदेश के कई हिस्सों में भूमि विवाद से जुड़े मामले समय-समय पर सामने आते रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भूमि के स्वामित्व, लीज, कब्जा और देखरेख से जुड़े दस्तावेजों की स्पष्टता न होने के कारण ऐसे विवाद जन्म लेते हैं।

इस मामले में भी यदि भूमि के स्वामित्व और निवास संबंधी दस्तावेज स्पष्ट रूप से उपलब्ध हों, तो जांच एजेंसियों के लिए सच्चाई तक पहुंचना आसान हो सकता है।
पढ़िए कानूनी प्रक्रिया क्या कहती है?
कानून के अनुसार, किसी भी संपत्ति पर कब्जे को लेकर विवाद होने पर न्यायालय और राजस्व विभाग की प्रक्रिया अपनाई जाती है। यदि अवैध कब्जे का आरोप है, तो पुलिस जांच के साथ-साथ सिविल कोर्ट में भी मामला विचाराधीन हो सकता है।

इसी प्रकार, यदि किसी मकान को गिराने का आरोप है, तो संबंधित प्राधिकरण की अनुमति और वैधानिक प्रक्रिया की जांच आवश्यक होती है।
जांच के बाद ही स्पष्ट होगी तस्वीर
फिलहाल, मामला आरोप और प्रत्यारोप के बीच उलझा हुआ है। एक ओर पीड़ित पक्ष पुलिस और आरोपियों पर गंभीर आरोप लगा रहा है, तो दूसरी ओर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।
ऐसे में यह जरूरी है कि संबंधित अधिकारी निष्पक्ष और पारदर्शी जांच करें। यदि कहीं भी लापरवाही पाई जाती है, तो नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं, यदि आरोप निराधार साबित होते हैं, तो कानून के तहत उचित कदम उठाए जाएंगे।

कानपुर चकेरी प्लॉट कब्जा मामला अब प्रशासनिक और कानूनी जांच के दायरे में आ चुका है। पीड़ित परिवार ने जहां न्याय की गुहार लगाई है, वहीं क्षेत्रीय पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं।
हालांकि, अंतिम सत्य जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। इसलिए सभी पक्षों के बयान और साक्ष्यों के आधार पर ही आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी।



