बाल श्रमिक विद्या योजना से बदली ज़िंदगी: काम छोड़ स्कूल पहुंचे बच्चे, पढ़िए शिक्षा से जुड़ रहा भविष्य

उत्तर प्रदेश सरकार की बाल श्रमिक विद्या योजना कानपुर नगर में बाल श्रम उन्मूलन और शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में प्रभावशाली परिणाम दे रही है। यह योजना उन बच्चों के जीवन में बदलाव ला रही है, जो कभी मजबूरी में बाल श्रम करने को विवश थे। अब वही बच्चे काम छोड़कर स्कूल की दहलीज पार कर रहे हैं और कक्षा आठ, नौ और दस तक की पढ़ाई नियमित रूप से कर रहे हैं।
पढ़िए इनके लिए उम्मीद बन रही है यह योजना
दरअसल, योजना का उद्देश्य ऐसे बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना है, जिनके माता-पिता दिवंगत हैं, दिव्यांग हैं या जिनके परिवार में आजीविका का कोई स्थायी साधन नहीं है। आर्थिक तंगी के कारण पढ़ाई से दूर हुए इन बच्चों के लिए यह योजना एक नई उम्मीद बनकर सामने आई है। अब शिक्षा उनके लिए सपना नहीं, बल्कि एक वास्तविकता बन चुकी है।
प्रतिमाह मिलेगी राहत राशि
योजना के अंतर्गत बच्चों को पढ़ाई जारी रखने के लिए नियमित आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। इसके तहत बालकों को एक हजार रुपये प्रतिमाह और बालिकाओं को बारह सौ रुपये प्रतिमाह की सहायता राशि सीधे उनके बैंक खाते में भेजी जाती है। इससे बच्चों को स्कूल जाने, किताबें खरीदने और अन्य शैक्षिक जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल रही है।
इसके अलावा, बच्चों को पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से एकमुश्त प्रोत्साहन राशि का भी प्रावधान है। कक्षा आठ, कक्षा नौ अथवा हाईस्कूल परीक्षा उत्तीर्ण करने पर बच्चों को छह हजार रुपये दिए जाते हैं। इससे न केवल बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुचि बढ़ रही है, बल्कि वे बीच में पढ़ाई छोड़ने से भी बच रहे हैं।
कानपुर में इतने बच्चों का किया गया चयन
कानपुर नगर में इस योजना के अंतर्गत कुल 100 बच्चों का चयन किया गया है। अप्रैल से दिसंबर माह की अवधि में 72 बच्चों को 5 लाख 49 हजार 400 रुपये की धनराशि का भुगतान किया जा चुका है। वहीं, शेष लाभार्थियों का भुगतान प्रक्रिया में है और जल्द ही उन्हें भी योजना का लाभ दिया जाएगा। चयनित बच्चों में 33 बालिकाएं और 39 बालक शामिल हैं।
शैक्षिक स्तर की बात करें तो योजना से जुड़े 9 बच्चे कक्षा आठ, 14 बच्चे कक्षा नौ और 13 बच्चे कक्षा दस में अध्ययनरत हैं। इसके साथ ही अन्य बच्चों को आगे की पढ़ाई के लिए तैयार किया जा रहा है, ताकि वे भी अपनी शिक्षा निरंतर जारी रख सकें। यह आंकड़े साफ तौर पर दर्शाते हैं कि योजना बच्चों को शिक्षा से जोड़ने में सफल हो रही है।
श्रम विभाग करेगा सत्यापन
योजना के तहत पात्र बच्चों का चयन श्रम विभाग द्वारा मौके पर जाकर सत्यापन और निरीक्षण के बाद किया जाता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि योजना का लाभ केवल वास्तविक जरूरतमंद बच्चों तक ही पहुंचे। अधिकारियों द्वारा परिवार की स्थिति, आय के स्रोत और बच्चे की वर्तमान परिस्थिति का गहन आकलन किया जाता है।
योजना से लाभान्वित बच्चों के अनुभव भी इसके सकारात्मक प्रभाव को दर्शाते हैं। कक्षा नौ में पढ़ रहे राहुल ने बताया कि पहले उसे मजदूरी करनी पड़ती थी, लेकिन अब आर्थिक सहायता मिलने से वह नियमित रूप से स्कूल जा पा रहा है। वहीं, कक्षा आठ की छात्रा पूजा का कहना है कि योजना से मिलने वाली मदद से उसकी पढ़ाई आसान हो गई है और अब वह आगे भी पढ़कर कुछ बनना चाहती है।
सहायक श्रमायुक्त राम लखन पटेल ने बताई सरकार की योजना
इस संबंध में सहायक श्रमायुक्त राम लखन पटेल ने बताया कि सरकार की स्पष्ट मंशा है कि कोई भी बच्चा बाल श्रम में न लगे और हर बच्चा शिक्षा से जुड़े। उन्होंने कहा कि दिसंबर तक अधिकांश बच्चों को भुगतान किया जा चुका है और शेष लाभार्थियों को भी शीघ्र योजना का लाभ प्रदान किया जाएगा।
अंततः, बाल श्रमिक विद्या योजना न केवल बच्चों को शिक्षा की ओर वापस ला रही है, बल्कि उनके भविष्य को भी सुरक्षित कर रही है। यह योजना साबित कर रही है कि सही नीति और प्रभावी क्रियान्वयन से समाज में सकारात्मक बदलाव संभव है। आने वाले समय में यदि इस योजना का विस्तार किया जाए, तो निश्चित रूप से बाल श्रम उन्मूलन की दिशा में और ठोस परिणाम देखने को मिलेंगे।



