राष्ट्रीय युवा दिवस पर कामता सेवा संस्थान का गरिमामय वार्षिकोत्सव, सेवा, संस्कार और समर्पण के हुए 18 वर्ष

कानपुर। युगदृष्टा स्वामी विवेकानंद जी ने भारतीय सभ्यता, सनातन संस्कृति और राष्ट्र निर्माण की जिस विचारधारा को विश्व पटल पर प्रतिष्ठित किया, वह आज भी देश के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है। स्पष्ट दृष्टिकोण, आत्मविश्वास और राष्ट्र के प्रति समर्पण का संदेश देने वाले स्वामी विवेकानंद के विचार वर्ष 2047 तक भारत को एक सक्षम, समर्थ और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाने की दिशा में युवाशक्ति के लिए मजबूत आधार सिद्ध हो रहे हैं। इसी विचारधारा को केंद्र में रखते हुए राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर कामता सेवा संस्थान द्वारा अपने 18वें वार्षिकोत्सव का आयोजन भव्य और गरिमामय रूप में किया गया।

यह आयोजन कानपुर के सिविल लाइंस स्थित मर्चेंट चैंबर हॉल में संपन्न हुआ, जिसमें समाज, शिक्षा, स्वास्थ्य और राष्ट्रसेवा से जुड़े अनेक गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति रही। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रख्यात शिक्षाविद् डॉ. नरेंद्र द्विवेदी ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में नगर के यशस्वी सांसद रमेश अवस्थी उपस्थित रहे।

स्वामी विवेकानंद के विचार आज भी प्रासंगिक
मुख्य अतिथि श्री रमेश अवस्थी ने अपने संबोधन में कहा कि स्वामी विवेकानंद जी ने सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति की वैचारिक शक्ति को वैश्विक मंच पर स्थापित किया। उन्होंने युवाओं को आत्मनिर्भर, राष्ट्रनिष्ठ और कर्तव्यपरायण बनने की प्रेरणा दी। आगे उन्होंने कहा कि आज प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत न केवल सांस्कृतिक रूप से पुनः गौरवशाली हुआ है, बल्कि आर्थिक रूप से भी विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनकर उभरा है। राम मंदिर निर्माण से लेकर वैश्विक जिम्मेदारियों के निर्वहन तक, यह परिवर्तन राष्ट्रवादी सोच और सांस्कृतिक चेतना का परिणाम है।

वैदिक परंपरा के साथ हुआ समारोह का शुभारंभ
कार्यक्रम की शुरुआत गौरियापुर आश्रम, कानपुर देहात के महंत अनंत विभूषित श्री 108 देव नारायण दास जी महाराज एवं अन्य आचार्यों द्वारा स्वस्ति वाचन, वैदिक मंत्रोच्चार और शंकराचार्य परंपरा के अनुरूप मंगलाचरण से की गई। इस अवसर पर युवाओं को सनातन संस्कृति, गुरु-शिष्य परंपरा और राष्ट्र धर्म को जीवन में आत्मसात करने का संदेश दिया गया।

अखंड भारत की विरासत हैं विवेकानंद: नीलिमा कटियार
कल्याणपुर विधानसभा क्षेत्र की विधायिका श्रीमती नीलिमा कटियार ने स्वामी विवेकानंद जी के जीवन और कार्यों को अखंड भारत की अमूल्य धरोहर बताया। उन्होंने कहा कि स्वामी जी की कर्मप्रधान जीवनशैली, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्र के प्रति निष्ठा ही एक सशक्त, संगठित और समृद्ध भारत की नींव है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे केवल अधिकारों की नहीं, बल्कि कर्तव्यों की भी चिंता करें।

पाँच विभूतियों को मिला ‘कामता सेवा रत्न’ सम्मान
समारोह के दौरान समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाली पाँच विशिष्ट विभूतियों को “कामता सेवा रत्न” सम्मान से अलंकृत किया गया। इनमें समाजसेवा के क्षेत्र में सुरेश गुप्ता, शिक्षा के क्षेत्र में कुमारी मुदिता मिश्रा, चिकित्सा क्षेत्र में कैंसर सर्जन डॉ. अरुण प्रकाश द्विवेदी, नशामुक्ति अभियान के लिए लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड धारक योग गुरु ज्योति बाबा, तथा स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में स्नेह पैथोलॉजी की संचालक श्रीमती पूनम तिवारी शामिल रहीं।

विशेष रूप से डॉ. अरुण प्रकाश द्विवेदी द्वारा मंदबुद्धि, दिव्यांग और निर्धन बच्चों के लिए निःशुल्क कैंसर उपचार की पहल तथा पूनम तिवारी द्वारा गरीबों के लिए नियमित जांच शिविरों के आयोजन की सराहना की गई।
पर्यावरण संरक्षण भी राष्ट्रसेवा का अंग
संस्थान के प्रदेश अध्यक्ष श्रीनारायण त्रिपाठी ने अपने संबोधन में पर्यावरण संरक्षण को राष्ट्रसेवा का अभिन्न अंग बताया। उन्होंने युवाओं से अधिकाधिक वृक्षारोपण करने, प्रकृति का संरक्षण करने और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि जागरूक युवा ही सुरक्षित भविष्य की नींव रख सकते हैं।
राष्ट्रीय युवा दिवस केवल उत्सव नहीं, आत्मचिंतन का अवसर
कार्यक्रम का कुशल संचालन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम नारायण त्रिपाठी ने किया। वहीं संस्थान की राष्ट्रीय महामंत्री श्रीमती मंजू त्रिपाठी ने कहा कि राष्ट्रीय युवा दिवस केवल उत्सव मनाने का अवसर नहीं है, बल्कि यह आत्मचिंतन और राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों को समझने का दिन है। उन्होंने बताया कि कामता सेवा संस्थान विगत 18 वर्षों से सेवा, शिक्षा, स्वास्थ्य, संस्कार और मानवीय मूल्यों के माध्यम से समाज के कमजोर वर्गों के उत्थान हेतु निरंतर कार्य कर रहा है।

सामाजिक सहभागिता का सशक्त उदाहरण
कार्यक्रम में सौरभ तिवारी, दिलीप मिश्रा, राजकुमार गुप्ता, जुगुल किशोर सहित अनेक समाजसेवी, युवा और संस्थान के पदाधिकारी उपस्थित रहे। समापन अवसर पर सभी ने संस्थान के सेवा कार्यों की सराहना करते हुए भविष्य में भी समाजहित में ऐसे आयोजनों की आवश्यकता पर बल दिया।



