संभल हिंसा मामला: युवक को गोली मारने के आरोप में ASP अनुज चौधरी सहित 12 पर FIR, पढ़िए किसका है आदेश

संभल हिंसा मामला: उत्तर प्रदेश के संभल जिले से जुड़ा एक अहम घटनाक्रम सामने आया है। संभल हिंसा के दौरान एक युवक को गोली लगने के मामले में अब न्यायिक स्तर पर बड़ी कार्रवाई हुई है। संभल के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) विभांशु सुधीर की अदालत ने इस मामले में ASP अनुज चौधरी सहित 12 पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दिया है। कोर्ट के इस आदेश के बाद प्रशासनिक और पुलिस महकमे में हलचल मच गई है।
यह आदेश उस याचिका के आधार पर पारित किया गया है, जो घायल युवक के पिता द्वारा अदालत में दायर की गई थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि संभल हिंसा के दौरान पुलिस फायरिंग में उनके बेटे को गोली लगी, और इस मामले में जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों के खिलाफ अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
इसलिए दर्ज की गई एफआईआर
अदालत में प्रस्तुत याचिका के अनुसार, हिंसा के दौरान पुलिस ने स्थिति नियंत्रित करने के नाम पर कथित रूप से अनुचित बल प्रयोग किया, जिसके चलते एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। याचिकाकर्ता ने यह भी दावा किया कि घटना के बाद पुलिस द्वारा निष्पक्ष जांच नहीं की गई, जिससे उन्हें न्याय के लिए अदालत की शरण लेनी पड़ी।
इस मामले की सुनवाई के बाद, CJM कोर्ट ने प्रथम दृष्टया तथ्यों को गंभीर मानते हुए ASP अनुज चौधरी, इंस्पेक्टर अनुज तोमर और 12 अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज करने का निर्देश दिया है। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि मामले की निष्पक्ष जांच कानून के दायरे में की जाए।
अज्ञात पुलिस कर्मचारियों की हो रही पहचान
महत्वपूर्ण बात यह है कि जिन पुलिसकर्मियों के खिलाफ आदेश दिया गया है, उनमें कुछ नामजद हैं, जबकि कुछ को अज्ञात के रूप में शामिल किया गया है। कोर्ट ने कहा कि जांच के दौरान सभी तथ्यों और सबूतों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। इससे पहले इस प्रकरण में पुलिस स्तर पर कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई थी, जिस पर अदालत ने संज्ञान लिया।
गौरतलब है कि संभल हिंसा के दौरान क्षेत्र में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई थी। प्रशासन द्वारा शांति व्यवस्था बनाए रखने के प्रयास किए जा रहे थे, लेकिन इसी बीच गोली लगने की यह घटना सामने आई। इसके बाद पीड़ित पक्ष ने लगातार न्याय की मांग उठाई और अंततः अदालत का रुख किया।
पढ़िए क्या कह रहे कानून के विशेषज्ञ
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अदालत का यह आदेश न्यायिक निगरानी में पुलिस कार्रवाई की जांच का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। कोर्ट ने यह स्पष्ट किया है कि कानून के तहत कोई भी व्यक्ति या अधिकारी जांच से ऊपर नहीं है, और यदि आरोप प्रथम दृष्टया सही प्रतीत होते हैं, तो FIR दर्ज करना अनिवार्य है।
वहीं, पुलिस प्रशासन की ओर से इस मामले पर अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, सूत्रों के अनुसार, पुलिस विभाग कोर्ट के आदेश का अध्ययन कर आगे की कानूनी प्रक्रिया अपनाने की तैयारी में जुट गया है।
प्रदेश में है चर्चा
इस आदेश के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। कुछ सामाजिक संगठनों ने इसे न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है, जबकि कुछ लोगों ने निष्पक्ष जांच की मांग दोहराई है, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
फिलहाल, CJM कोर्ट के आदेश के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि FIR दर्ज होने के पश्चात जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और क्या पीड़ित परिवार को न्याय मिल पाता है। यह मामला न केवल संभल बल्कि पूरे प्रदेश में पुलिस जवाबदेही और कानून व्यवस्था को लेकर एक अहम उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।



