बजट 2026: कानपुर के फुटवियर, टेक्सटाइल और MSME सेक्टर को ‘पंख’

कानपुर के आर्थिक परिदृश्य के लिए बजट 2026 एक क्रांतिकारी मोड़ साबित होने वाला है। सरकार ने लेदर, टेक्सटाइल और लघु उद्योगों (MSME) के लिए पिटारा खोल दिया है।

- फुटवियर और लेदर इंडस्ट्री को बड़ी बूस्ट
सीमा शुल्क में राहत: जूते के ऊपरी हिस्से (Shoe-uppers) के निर्माण पर सीमा शुल्क में बड़ी छूट दी गई है।
निर्यात में वृद्धि: इस राहत से कानपुर के फुटवियर निर्यात में सालाना 10 से 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी की उम्मीद है।
IGCR स्कीम का विस्तार: उद्यमियों ने IGCR (Import of Goods at Concessional Rate) योजना के विस्तार का दिल खोलकर स्वागत किया है।
समयसीमा में बदलाव: निर्यात की समयसीमा को 6 महीने से बढ़ाकर 1 वर्ष कर दिया गया है, जो व्यापारियों को बड़ी राहत देगा।
योजना की अवधि: इस योजना को अब 31 मार्च 2028 तक बढ़ा दिया गया है।
एक्सेसरीज पर छूट: टैग, लेबल, स्टिकर और बेल्ट जैसे आयातित सामानों पर कस्टम ड्यूटी कम की गई है।
- MSME और टेक्सटाइल: विकास का नया रोडमैप
एमएसएमई क्लस्टर योजना: 1.40 लाख MSME इकाइयों वाले कानपुर के लिए 10,000 करोड़ रुपये की क्लस्टर योजना शुरू की गई है।
नई उड़ान: इस फंड से छोटे उद्यमियों को आधुनिक मशीनरी और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर प्राप्त करने में मदद मिलेगी।
टेक्सटाइल पार्क की उम्मीद: टेक्सटाइल पार्क की मांग कर रहे उद्यमियों को बजट प्रावधानों से नया हौसला मिला है।
वैल्यू एडेड प्रोडक्ट्स: बजट का मुख्य फोकस वैल्यू एडेड उत्पादों के निर्यात को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देना है।
- दम तोड़ती इकाइयों को मिला ‘संजीवनी’ का सहारा
बंद होती फैक्ट्रियों को राहत: कानपुर के आसपास संचालित लगभग 1,000 छोटी-बड़ी इकाइयों को बंदी के संकट से बाहर निकलने का रास्ता मिला है।
मुक्त व्यापार समझौते (FTA): यूरोपीय देशों के साथ हुए समझौतों और बजट के तालमेल से लेदर इंडस्ट्री दोबारा पटरी पर लौटेगी।
रोजगार के अवसर: उद्योगों के विस्तार से स्थानीय युवाओं के लिए हजारों नए रोजगार सृजित होने की संभावना है।
कानपुर की ग्लोबल पहचान: इन सुधारों के बाद कानपुर एक बार फिर वैश्विक स्तर पर ‘लेदर सिटी’ के रूप में अपनी धाक जमाएगा।
कानपुर के उद्योगों के लिए बजट 2026: एक नई सुबह!
यह बजट केवल आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि कानपुर की लेदर और टेक्सटाइल इंडस्ट्री के पुनरुद्धार का ब्लूप्रिंट है।
उद्यमियों के लिए संदेश
“यूरोपीय देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौतों और बजट की इस राहत ने कानपुर की दम तोड़ती इकाइयों में नई जान फूंक दी है। अब वक्त है ‘लोकल से ग्लोबल’ होने का!”



