
नई दिल्ली: भारतीय रेलवे (Indian Railways) करोड़ों यात्रियों के सफर को और अधिक पारदर्शी और डिजिटल बनाने के लिए अपने बोर्डिंग नियमों में एक बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। नए नियमों के लागू होने के बाद, यदि आप अपने तय बोर्डिंग स्टेशन पर ट्रेन में सवार नहीं होते हैं, तो आपकी सीट तुरंत किसी और यात्री को आवंटित कर दी जाएगी।
🚆 अब नहीं होगा ‘अगले स्टेशन’ का इंतज़ार
अभी तक के नियम के अनुसार, यदि कोई यात्री अपने बोर्डिंग स्टेशन पर नहीं पहुंचता था, तो टीटीई (TTE) अगले एक या दो स्टेशन तक यात्री का इंतजार करता था। लेकिन नई व्यवस्था में:
- जैसे ही ट्रेन बोर्डिंग स्टेशन से चलेगी और यात्री अपनी सीट पर नहीं मिलेगा, टीटीई अपने हैंडहेल्ड डिवाइस (HHT) पर तुरंत ‘Not Turn Up’ की एंट्री कर देगा।
- यह एंट्री होते ही सिस्टम उस सीट को खाली मान लेगा। टीटीई के पास अब सीट को रोक कर रखने का विकल्प नहीं होगा।

📉 वेटिंग और RAC यात्रियों की होगी ‘चांदी’
रेलवे के इस कदम से सबसे बड़ी राहत वेटिंग लिस्ट और आरएसी (RAC) वाले यात्रियों को मिलेगी।
- ऑटो-अलॉटमेंट: जैसे ही कोई सीट ‘खाली’ घोषित होगी, रेलवे का सॉफ्टवेयर खुद-ब-खुद अगले वेटिंग यात्री को वह बर्थ अलॉट कर देगा।
- इंस्टेंट मैसेज: सीट अलॉट होते ही यात्री के मोबाइल पर कन्फर्मेशन का मैसेज चला जाएगा। इससे भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी और खाली सीटों का बेहतर प्रबंधन हो सकेगा।
⚠️ यात्री रखें ध्यान: 24 घंटे पहले बदलना होगा बोर्डिंग स्टेशन
अगर आप अपने तय स्टेशन की बजाय किसी और स्टेशन से ट्रेन पकड़ना चाहते हैं, तो अब आपको बहुत सावधान रहना होगा।
नया प्रोटोकॉल: चार्ट बनने से कम से कम 24 घंटे पहले आपको आधिकारिक तौर पर अपना बोर्डिंग स्टेशन बदलना होगा। यदि आपने ऐसा नहीं किया और आप तय स्टेशन पर नहीं मिले, तो आपकी सीट किसी और को मिल जाएगी और आप उस पर दावा भी नहीं कर पाएंगे।

💻 CRIS को सॉफ्टवेयर अपडेट करने के निर्देश
रेल मंत्रालय ने इस व्यवस्था को देशभर में लागू करने के लिए रेल सूचना प्रणाली (CRIS) को सॉफ्टवेयर में बदलाव करने के निर्देश दिए हैं। रेलवे का मानना है कि यह डिजिटलीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है, जिससे खाली सीटों को लेकर होने वाली शिकायतों में कमी आएगी।



