
सुल्तानपुर: कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सुल्तानपुर में अपने खिलाफ चल रहे मानहानि केस में आज (18 फरवरी 2026) को अदालत में अपना बयान दर्ज कराया। राहुल गांधी ने अदालत में अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों को निराधार बताते हुए अपनी बेगुनाही का पक्ष रखा। उन्होंने अदालत में यह स्पष्ट किया कि उन्हें किसी भी प्रकार की मानहानि या झूठे आरोपों का सामना नहीं करना चाहिए और जल्द ही वह अपने बचाव में साक्ष्य पेश करेंगे।
सुल्तानपुर एमपी-एमएलए कोर्ट में हुई कार्यवाही
सुल्तानपुर के एमपी-एमएलए कोर्ट में राहुल गांधी की पेशी के दौरान अदालत के दरवाजे करीब आधे घंटे के लिए बंद कर दिए गए थे, जब उनका 313 बयान दर्ज किया जा रहा था। इस दौरान उनके समर्थकों की भीड़ कोर्ट परिसर में काफी बड़ी संख्या में मौजूद रही, जिसके कारण सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद किया गया। कोर्ट कक्ष से लेकर बाहर तक कड़ी सुरक्षा के इंतजाम किए गए थे, ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना से बचा जा सके।
सुरक्षा व्यवस्था में था कड़ा नियंत्रण
राहुल गांधी के समर्थकों की भारी भीड़ को नियंत्रित करने में सुरक्षा कर्मियों के पसीने छूट गए। कड़ी सुरक्षा के बावजूद समर्थकों ने राहुल गांधी के पक्ष में नारेबाजी की, जिसके कारण कोर्ट परिसर में स्थिति कुछ समय के लिए गहमागहमी का सामना कर रही थी। पुलिस और सुरक्षा कर्मियों ने किसी भी प्रकार के विवाद से बचने के लिए पूरी कोशिश की और कोर्ट परिसर में शांति बनाए रखी।
राहुल गांधी की सफाई और साक्ष्य पेश करने की प्रक्रिया
राहुल गांधी ने अपनी बातों को सामने रखते हुए अदालत से अनुरोध किया कि उन्हें पूरी तरह से अपनी सफाई पेश करने का मौका दिया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि वह जल्द ही इस मामले में अपने बचाव के साक्ष्य अदालत में पेश करेंगे। अदालत ने राहुल गांधी के इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए मामले की अगली सुनवाई 9 मार्च 2026 को तय की है, जब वह अपने बचाव में साक्ष्य पेश करेंगे।
मानहानि केस का पृष्ठभूमि
यह मानहानि केस उस समय शुरू हुआ था जब राहुल गांधी ने एक सार्वजनिक भाषण में कुछ टिप्पणियां की थीं, जिन्हें लेकर उनके खिलाफ मानहानि का केस दर्ज किया गया था। यह मामला सुल्तानपुर के एक स्थानीय नेता ने राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज कराया था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि राहुल गांधी की टिप्पणियों से उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा था।
राहुल गांधी ने इस मामले में अदालत के समक्ष यह कहा था कि उनकी टिप्पणियां पूरी तरह से संदर्भ से बाहर ली गई हैं और उनका किसी भी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ कोई दुर्भावना नहीं थी। उन्होंने अदालत में यह भी कहा कि वह राजनीति में रहते हुए अपने विचार रखने का पूरा अधिकार रखते हैं और किसी के खिलाफ व्यक्तिगत हमले नहीं कर रहे हैं।
राहुल गांधी का बयान और राजनीति में उनका रुख
राहुल गांधी ने अपनी बात रखते हुए यह भी कहा कि वह राजनीति में बने रहने के दौरान देश और जनता के मुद्दों पर हमेशा आवाज उठाते रहेंगे। उनका यह बयान उस समय सामने आया जब देश में कई राजनीतिक दलों के बीच तीखी आलोचना और आरोप-प्रत्यारोप चल रहे हैं। राहुल गांधी ने यह भी कहा कि वह राजनीति के इन मामलों को लेकर कभी डरने वाले नहीं हैं और अपने पक्ष को दृढ़ता से प्रस्तुत करेंगे।
अगली सुनवाई की तारीख
अदालत ने इस मामले की सुनवाई 9 मार्च 2026 को तय की है, जब राहुल गांधी अपने बचाव में साक्ष्य पेश करेंगे। यह तारीख महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इसके बाद ही यह स्पष्ट होगा कि राहुल गांधी इस मानहानि केस में कैसे अपनी बेगुनाही साबित करते हैं।
समर्थकों की जुटान और राजनीति में उनकी भूमिका
राहुल गांधी के समर्थक उनके साथ हर कदम पर खड़े हैं। इस मामले में अदालत में उनकी उपस्थिति और समर्थन से यह स्पष्ट हो गया है कि उनकी राजनीति में सक्रियता और जनता के बीच उनकी प्रभावशीलता को लेकर कोई कमी नहीं आई है। उनका यह मामला भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ का संकेत देता है, जहां राजनीति और अदालतें एक-दूसरे के साथ जुड़ी हुई हैं।
कांग्रेस और राहुल गांधी के पक्ष में बयान
कांग्रेस पार्टी ने भी राहुल गांधी के बयान को सही ठहराते हुए उनका समर्थन किया है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने यह कहा कि यह मामला पूरी तरह से राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा है और राहुल गांधी को न्याय मिलेगा। कांग्रेस के नेताओं ने यह भी कहा कि राहुल गांधी की आवाज कभी दबाई नहीं जा सकती और वह हमेशा अपने दृष्टिकोण को सार्वजनिक रूप से रखेंगे।
सामाजिक और राजनीतिक परिपेक्ष्य में यह मामला
यह मामला भारतीय राजनीति में एक और उदाहरण पेश करता है, जहां नेताओं के खिलाफ मानहानि के मामलों की संख्या बढ़ रही है। राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का खेल अक्सर चलता रहता है, लेकिन अदालत का काम है कि वह प्रत्येक मामले की सुनवाई निष्पक्ष रूप से करे और सही फैसले तक पहुंचे। इस मामले में भी अब यह देखना होगा कि राहुल गांधी अपने बयान और साक्ष्य के माध्यम से किस हद तक अपने पक्ष को साबित कर पाते हैं।



