टेक्नोलॉजीदेशनई दिल्ली

आज से लागू हुए नए नियम – AI द्वारा बने फोटो, वीडियो और ऑडियो पर लेबल लगाना हुआ अनिवार्य – आगे जानिए

नई दिल्ली: सूचना प्रौद्योगिकी (IT) नियमों में बड़े बदलाव करते हुए केंद्र सरकार ने आज से एक महत्वपूर्ण संशोधन लागू किया है, जिसके तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जरिए बनाए गए सभी फोटो, वीडियो और ऑडियो कंटेंट पर स्पष्ट लेबल लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। यह कदम विशेष रूप से ‘डीपफेक’ (deepfake) जैसे फर्जी और भ्रामक कंटेंट को नियंत्रित करने के लिए उठाया गया है, जो इंटरनेट और सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहा है।

नई IT नीति का उद्देश्य

नए संशोधित IT नियमों का मुख्य उद्देश्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा उत्पन्न किए गए फर्जी वीडियो, ऑडियो और तस्वीरों के प्रभाव को नियंत्रित करना है। डीपफेक जैसी तकनीकों का इस्तेमाल अब तक विभिन्न प्रकार की धोखाधड़ी, समाज में अशांति फैलाने और व्यक्तिगत छवि को नुकसान पहुंचाने के लिए किया जा रहा था। इस नए नियम के तहत अब AI से उत्पन्न कंटेंट पर स्पष्ट रूप से “AI-Generated” (AI द्वारा उत्पन्न) लेबल लगाना होगा, जिससे उपयोगकर्ता आसानी से यह पहचान सकें कि यह कंटेंट वास्तविक नहीं है।

AI कंटेंट पर लेबल लगाने के नियम

इन नए नियमों के तहत, अब AI से बनाए गए किसी भी प्रकार के फोटो, वीडियो या ऑडियो पर एक स्पष्ट लेबल लगाना अनिवार्य होगा। यह लेबल कंटेंट के शुरुआत में ही दिखाई देगा, ताकि उपयोगकर्ता तुरंत पहचान सकें कि यह सामग्री किसी मशीन द्वारा उत्पन्न की गई है। इसके साथ ही, सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर इस तरह के कंटेंट को अपलोड करने से पहले उपयोगकर्ताओं को यह सुनिश्चित करना होगा कि उन्होंने इन नियमों का पालन किया है।

इसके अलावा, यह नियम केवल व्यक्तिगत उपयोगकर्ताओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि कंपनियां, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और कंटेंट क्रिएटर्स भी इसके दायरे में आएंगे।

डीपफेक पर कड़ी कार्रवाई

डीपफेक की तकनीक के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए सरकार ने इस पर कड़ी कार्रवाई करने का निर्णय लिया है। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर ऐसे फर्जी वीडियो और ऑडियो की पहचान करने के लिए मजबूत सिस्टम विकसित किए जाएंगे। अगर कोई व्यक्ति या संस्था बिना लेबल लगाए फर्जी कंटेंट अपलोड करता है, तो उसे कानूनी दंड का सामना करना पड़ सकता है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग का उपयोग सोशल मीडिया, समाचार चैनलों और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर तेज़ी से बढ़ रहा है, जिससे कई बार झूठी और भ्रामक जानकारी फैलने का खतरा उत्पन्न हो जाता है। अब सरकार ने इस खतरे को कम करने के लिए यह महत्वपूर्ण कदम उठाया है।

नए नियमों का यह पड़ेगा प्रभाव

नए नियमों का असर न केवल सामान्य उपयोगकर्ताओं पर पड़ेगा, बल्कि वे कंपनियां और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स भी प्रभावित होंगे जो AI आधारित कंटेंट का निर्माण करते हैं। अब उन प्लेटफॉर्म्स को भी यह सुनिश्चित करना होगा कि उनकी साइट्स पर जो AI-Generated कंटेंट अपलोड किया जा रहा है, वह उचित लेबल के साथ हो।

विशेषज्ञों का मानना है कि इन नियमों से सोशल मीडिया पर फैली भ्रांतियों और फर्जी खबरों को नियंत्रित किया जा सकेगा, जो समाज में कई बार नकारात्मक प्रभाव डालते हैं। इसके अलावा, इस कदम से जनता में डिजिटल मीडिया के प्रति जागरूकता भी बढ़ेगी और लोग अधिक सतर्क हो सकेंगे।

जानिए आगे की दिशा

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह समय-समय पर इस कानून के लागू होने के बाद उसके प्रभाव का मूल्यांकन करेगी और जरूरत के मुताबिक इसे और कड़ा भी कर सकती है। इसके साथ ही, सरकार ने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और कंटेंट क्रिएटर्स को प्रशिक्षण देने की भी योजना बनाई है, ताकि वे इन नियमों का पालन सही तरीके से कर सकें।

विशेषज्ञों के अनुसार, AI और मशीन लर्निंग तकनीकों का सकारात्मक उपयोग तब तक संभव नहीं है, जब तक इनके दुरुपयोग को नियंत्रित करने के लिए सख्त नियम न हों। इसलिए इस कदम से न केवल डिजिटल दुनिया में निष्पक्षता बढ़ेगी, बल्कि समाज में होने वाले विभिन्न प्रकार के डिजिटल अपराधों में भी कमी आएगी।

फर्जी कंटेंट पर लगेगी लगाम 

20 फरवरी 2026 से लागू किए गए इन नए IT नियमों से यह स्पष्ट हो गया है कि अब AI द्वारा बनाए गए किसी भी फोटो, वीडियो या ऑडियो कंटेंट पर स्पष्ट रूप से लेबल लगाया जाएगा। यह कदम फर्जी कंटेंट और डीपफेक जैसी तकनीकों से बचाव के लिए उठाया गया है। इसके माध्यम से सरकार का उद्देश्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर फैल रहे भ्रामक और धोखाधड़ी वाले कंटेंट को रोकना है, ताकि समाज में सही और निष्पक्ष जानकारी फैल सके।

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