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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चाइनीज मांझे की बिक्री और इस्तेमाल पर लगाया सख्त प्रतिबंध, सरकार को दी ये चेतावनी

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने चाइनीज मांझे की खरीद-बिक्री और इस्तेमाल पर कड़ा रुख अपनाया है। न्यायालय ने स्पष्ट रूप से कहा है कि इसे रोकने के लिए सिर्फ शासनादेश नहीं बल्कि एक ठोस कानूनी प्रावधान बनाना अनिवार्य है। कोर्ट ने चेतावनी दी है कि यदि चाइनीज मांझे की बिक्री और इस्तेमाल जारी रहता है, तो सरकार को पीड़ितों को मुआवजा देना होगा। यह आदेश न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति एके चौधरी की खंडपीठ ने एक जनहित याचिका पर पारित किया है।

जानिए चाइनीज मांझा क्या है और क्यों यह खतरनाक है?

चाइनीज मांझा वह मांझा होता है जो लेड (सीसा) और नायलॉन के तारों से बना होता है। इसका प्रमुख खतरा यह है कि यह बहुत तेज और खतरनाक होता है। इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से पतंगबाजी में किया जाता है, लेकिन यह मानव जीवन के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। जब यह मांझा गलती से किसी व्यक्ति या जानवर से टकराता है, तो इससे गंभीर चोटें लग सकती हैं। इसी कारण, इसे एक बडी सुरक्षा चुनौती माना जाता है।

इस मांझे के कारण कई लोगों की जान जा चुकी है, जबकि बहुत सारे लोग गंभीर रूप से घायल भी हुए हैं। इसके अलावा, कई जानवर भी इसकी चपेट में आकर घायल हो जाते हैं। चाइनीज मांझा के चलते होने वाले इन हादसों को लेकर कई बार मीडिया रिपोर्ट्स भी सामने आ चुकी हैं, जिनमें लोगों ने इस मांझे पर प्रतिबंध की मांग की है।

यह रहा इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चाइनीज मांझे की बिक्री और उपयोग पर प्रतिबंध लगाने के लिए केवल प्रशासनिक आदेशों को पर्याप्त नहीं माना। कोर्ट ने कहा कि इस समस्या को प्रभावी रूप से हल करने के लिए कानूनी ढांचा बनाना जरूरी है। न्यायालय ने कहा कि यह केवल सरकार का कर्तव्य नहीं है, बल्कि इसे रोकने के लिए सख्त कानूनी प्रावधानों की आवश्यकता है।

इसके अलावा, कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि चाइनीज मांझे की बिक्री और इस्तेमाल जारी रहता है, तो सरकार को पीड़ितों को मुआवजा देने की जिम्मेदारी लेनी होगी। यह आदेश न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति एके चौधरी की खंडपीठ ने दी, जो स्थानीय अधिवक्ता मोतीलाल यादव की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहे थे।

पढ़िए चाइनीज मांझे पर प्रतिबंध के लिए क्या कदम उठाने होंगे?

कोर्ट ने इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए सरकार से कहा कि चाइनीज मांझे की बिक्री और इस्तेमाल को रोकने के लिए एक ठोस और प्रभावी कानूनी ढांचा तैयार किया जाए। इसके लिए निम्नलिखित कदम उठाए जा सकते हैं:

  1. सख्त कानून बनाना: सरकार को चाइनीज मांझे की खरीद-बिक्री और उपयोग पर कड़े कानूनी प्रावधान लाने होंगे। यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि इस प्रकार के खतरनाक मांझे का उत्पादन, बिक्री और वितरण पूरी तरह से बंद हो जाए।
  2. सजाएं और दंड: ऐसे व्यक्तियों और दुकानदारों पर कड़ी सजा और दंड लागू किए जाएं जो चाइनीज मांझा बेचने या इस्तेमाल करने में लिप्त पाए जाएं।
  3. सार्वजनिक जागरूकता अभियान: चाइनीज मांझे के खतरों के बारे में लोगों को जागरूक करना बेहद जरूरी है। इसके लिए सरकार को स्कूलों, कॉलेजों और सार्वजनिक स्थानों पर अभियान चलाने चाहिए।
  4. कड़ा निरीक्षण: पुलिस और प्रशासन को चाइनीज मांझे के अवैध बिक्री और उपयोग पर नजर रखने के लिए कड़ी निगरानी और जांच अभियान चलाना चाहिए।

सरकार को मुआवजा देने का निर्देश – हाई कोर्ट 

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि चाइनीज मांझे के कारण किसी की जान जाती है या गंभीर चोट आती है, तो सरकार को उस पीड़ित को मुआवजा देना होगा। यह निर्देश सरकार को न केवल न्यायपूर्ण तरीके से पीड़ितों के हित में काम करने के लिए बाध्य करेगा, बल्कि यह एक कड़ा संदेश भी देगा कि इस प्रकार की घटनाओं को किसी भी कीमत पर सहन नहीं किया जाएगा।

समाज के लिए भी अति महत्वपूर्ण है यह फैसला – जानिए 

इलाहाबाद हाईकोर्ट का यह आदेश चाइनीज मांझे की समस्या को लेकर सरकार और समाज दोनों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। इस आदेश के माध्यम से न्यायालय ने यह स्पष्ट कर दिया है कि चाइनीज मांझे के उपयोग और बिक्री पर रोक लगाने के लिए केवल प्रशासनिक आदेश ही पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि एक मजबूत कानूनी ढांचा तैयार करना जरूरी है। इसके अलावा, पीड़ितों को मुआवजा देने की चेतावनी सरकार के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि ऐसे खतरनाक उत्पादों के उपयोग को नियंत्रित किया जा सके।

अगर इस आदेश को गंभीरता से लागू किया जाता है, तो आने वाले समय में चाइनीज मांझे के कारण होने वाली घटनाओं में काफी कमी आएगी, और लोगों को सुरक्षा मिलेगी। इसके साथ ही, यह आदेश अन्य राज्य सरकारों के लिए भी एक उदाहरण प्रस्तुत करेगा कि वे इस दिशा में कदम उठाएं और अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करें।

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