मुरादाबाद: नूरानी मस्जिद में 23वें रोजे की रात मुकम्मल कुरान-ए-पाक, महफिल-ए-दुआ का हुआ आयोजन

रिपोर्ट – शाहरुख़ हुसैन
मुरादाबाद: करुला मियां कॉलोनी स्थित मशहूर नूरानी मस्जिद में रमजान के 23वें रोजे की रात एक रूहानी मंजर देखने को मिला। इस खास मौके पर तरावीह की नमाज के दौरान मुकद्दस कुरान-ए-पाक (कलामे पाक) की तिलावत मुकम्मल हुई।

मस्जिद परिसर इस अवसर पर ‘अल्लाह-हू-अकबर’ और ‘सुभान अल्लाह’ की अद्भुत सदाओं से गूंज उठा। तिलावत के बाद मस्जिद के इमाम और हाफिज साहब की मौजूदगी में विशेष महफिल-ए-दुआ का आयोजन किया गया।
जानिए महफिल-ए-दुआ का महत्व
इस अवसर पर नमाजियों ने बड़ी तादाद में शिरकत की और अल्लाह की बारगाह में सिर झुकाया। यह महफिल केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि एक सामाजिक और सांस्कृतिक पहल भी थी। लोगों ने मुल्क की तरक्की और अमन-चैन के लिए दुआ की।

महफिल के दौरान मस्जिद को खूबसूरती से सजाया गया, जिससे वातावरण और भी रूहानी और प्रेरणादायक बन गया। इस आयोजन ने सभी उपस्थित लोगों में एकता और भाईचारे की भावना को भी बढ़ावा दिया।
तिलावत और नमाज का दिखा दृश्य
तरावीह की नमाज और मुकम्मल कुरान की तिलावत के समय मस्जिद परिसर में शांति और पवित्रता का अद्भुत माहौल था। इमाम और हाफिज साहब की उपस्थिति में तिलावत का क्रम सभी के दिलों को छू गया।

नमाजियों ने न केवल अपने व्यक्तिगत लिए दुआ की, बल्कि पूरे भारत देश में अमन, भाईचारा और तरक्की के लिए भी विशेष दुआएं मांगीं।
दुआ के दौरान मांगी गई विशेष दुआएं
महफिल-ए-दुआ में उपस्थित लोगों ने निम्नलिखित मुद्दों के लिए दुआ की:
1. वतन की तरक्की और समृद्धि
2. देश में अमन-चैन और भाईचारा कायम रहे
3. मुल्क की अर्थव्यवस्था और विकास दिन-दूनी रात-चौगुनी बढ़े
4. सभी नागरिकों की खुशहाली और सुरक्षा
इस प्रकार, यह महफिल केवल धार्मिक महत्व नहीं रखती, बल्कि समाज में सकारात्मक और रचनात्मक ऊर्जा का संचार भी करती है।
मस्जिद में दिखी सजावट और तैयारी
मुकम्मल कुरान की खुशी में मस्जिद को बेहद खूबसूरती से सजाया गया। रोशनियों, झंडियों और सजावटी प्रतीकों से मस्जिद का वातावरण और भी आकर्षक बन गया। इस सजावट ने उपस्थित लोगों को प्रेरित और उत्साहित किया।

इसके साथ ही, मस्जिद की प्रबंध समिति ने साफ-सफाई और व्यवस्था का भी पूरा ध्यान रखा। सभी उपस्थित लोगों के लिए आरामदायक और व्यवस्थित बैठने की व्यवस्था सुनिश्चित की गई।
दिखा सामाजिक और सांस्कृतिक प्रभाव
इस प्रकार की धार्मिक महफिलों का समाज पर गहरा प्रभाव पड़ता है। यह न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत करती है, बल्कि सामाजिक एकता और भाईचारे को भी बढ़ावा देती है।

महफिल में उपस्थित लोगों ने इस अवसर का लाभ उठाते हुए एक-दूसरे के साथ मेल-जोल और सहयोग की भावना को और मजबूत किया।
रूहानी और प्रेरणादायक रहा मंजर
मुरादाबाद की नूरानी मस्जिद में 23वें रोजे की रात का यह आयोजन एक रूहानी और प्रेरणादायक मंजर था। मुकम्मल कुरान-ए-पाक की तिलावत और महफिल-ए-दुआ ने न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी एक महत्वपूर्ण संदेश दिया।

इस अवसर ने यह स्पष्ट किया कि धार्मिक आयोजनों के माध्यम से समाज में अमन, भाईचारा और तरक्की को बढ़ावा दिया जा सकता है। आने वाले दिनों में भी इस प्रकार के आयोजन समाज में सकारात्मक और रचनात्मक ऊर्जा फैलाने में सहायक होंगे।



