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हमीरपुर: रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया चकबंदी विभाग का पेशकार – एंटी करप्शन टीम की बड़ी कार्रवाई

रिपोर्ट – मोहम्मद अकरम

हमीरपुर: जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई सामने आई है। एंटी करप्शन टीम ने चकबंदी विभाग में तैनात एक पेशकार को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई से विभागीय स्तर पर हड़कंप मच गया है और सरकारी कार्यालयों में कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

यह पूरी कार्रवाई बांदा से आई 20 सदस्यीय एंटी करप्शन टीम द्वारा की गई, जिसने योजनाबद्ध तरीके से ट्रैप लगाकर आरोपी को पकड़ा।

नक्शा सुधार के नाम पर मांगी जा रही थी रिश्वत

प्राप्त जानकारी के अनुसार, चकबंदी विभाग के पेशकार अल्ताफ़ पर आरोप है कि उन्होंने एक रिटायर्ड आर्मी हवलदार से जमीन के नक्शे में सुधार कराने के बदले रिश्वत की मांग की थी।

शुरुआत में आरोपी ने 1.5 लाख रुपये की मांग की थी, लेकिन बाद में सौदा घटाकर 25 हजार रुपये पर तय किया गया। इसी लेन-देन के दौरान एंटी करप्शन टीम ने कार्रवाई करते हुए पेशकार को पकड़ लिया।

कलेक्ट्रेट परिसर में हुई गिरफ्तारी

यह पूरी घटना सदर कोतवाली क्षेत्र के कलेक्ट्रेट परिसर स्थित चकबंदी कार्यालय की बताई जा रही है। जैसे ही रिश्वत की रकम का लेन-देन हुआ, पहले से तैयार एंटी करप्शन टीम ने मौके पर पहुंचकर आरोपी को रंगे हाथों पकड़ लिया।

इसके बाद आरोपी को तुरंत हिरासत में लेकर कोतवाली पहुंचाया गया, जहां आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई।

20 सदस्यीय टीम ने की सुनियोजित कार्रवाई

एंटी करप्शन टीम ने इस कार्रवाई को बेहद गोपनीय तरीके से अंजाम दिया। बांदा से आई 20 सदस्यीय टीम ने पूरी योजना के तहत ट्रैप बिछाया और रिश्वत के लेन-देन की पुष्टि होते ही कार्रवाई की।

अधिकारियों के अनुसार, यह ऑपरेशन पहले से प्राप्त शिकायत के आधार पर किया गया था। शिकायतकर्ता धर्मवीर सिंह द्वारा दी गई तहरीर के बाद मामले की जांच शुरू हुई थी।

शिकायत के बाद शुरू हुई थी जांच

धर्मवीर सिंह की ओर से एंटी करप्शन विभाग को दी गई शिकायत में आरोप लगाया गया था कि चकबंदी कार्यालय में नक्शा सुधार के नाम पर अवैध रूप से पैसे की मांग की जा रही है।

शिकायत मिलने के बाद विभाग ने सत्यापन किया और फिर ट्रैप कार्रवाई की योजना बनाई गई। जांच में आरोप सही पाए जाने पर यह कार्रवाई की गई।

प्रशासनिक स्तर पर सख्ती के संकेत

इस घटना के बाद प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सरकारी कार्यालयों में भ्रष्टाचार किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ऐसे मामलों में दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

साथ ही, विभागीय स्तर पर भी निगरानी बढ़ाने की बात कही गई है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

चकबंदी विभाग पर उठे सवाल

इस गिरफ्तारी के बाद चकबंदी विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर चर्चा है कि यदि समय पर शिकायत न होती तो यह मामला सामने नहीं आता।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में पारदर्शिता और सख्त निगरानी व्यवस्था की आवश्यकता है।

आगे की कार्रवाई है जारी

फिलहाल आरोपी पेशकार को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। एंटी करप्शन विभाग आगे की जांच में यह भी पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि क्या इस मामले में अन्य लोग भी शामिल हैं।

इसके अलावा, विभागीय रिकॉर्ड और लेन-देन से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है।

हमीरपुर में चकबंदी विभाग के पेशकार की गिरफ्तारी ने एक बार फिर सरकारी कार्यालयों में पारदर्शिता और ईमानदारी की आवश्यकता को उजागर किया है। एंटी करप्शन टीम की इस कार्रवाई से यह संदेश गया है कि भ्रष्टाचार के मामलों में अब सख्त रुख अपनाया जा रहा है।

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