लखनऊ की ‘समिट बिल्डिंग’ में चल रहा था 200 करोड़ का साइबर घोटाला: 40 युवतियों समेत 119 गिरफ्तार

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में साइबर अपराध का एक बड़ा नेटवर्क ध्वस्त हुआ है। गोमती नगर स्थित पॉश ‘समिट बिल्डिंग’ की 11वीं मंजिल पर चल रहे एक फर्जी इंटरनेशनल कॉल सेंटर पर पुलिस ने छापेमारी कर 40 लड़कियों समेत कुल 119 लोगों को हिरासत में लिया है। यह गिरोह ‘डॉलर’ नामक ऐप के जरिए विदेशियों को निशाना बनाकर करीब 200 करोड़ रुपए की ठगी कर चुका था।
आलीशान दफ्तर, लेकिन अंदर छिपा था अपराध का काला सच
पुलिस की छापेमारी में ‘सोलेरिस सॉल्यूशन’ नाम से चल रही इस कंपनी की पोल खुल गई। बाहर से देखने पर यह बेहद प्रोफेशनल और आधुनिक दफ्तर लगता था, जिसका मासिक किराया और अन्य खर्च करीब 3 करोड़ रुपए था। छापेमारी के दौरान पुलिस ने मौके से 100 लैपटॉप, 178 कॉलिंग फोन, डिजिटल मशीनें और कई आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद किए हैं।
कैसे काम करता था ठगों का यह नेटवर्क?
पुलिस की प्रारंभिक जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं:
- कार्य प्रणाली: यह कॉल सेंटर मुख्य रूप से शाम 7 बजे से रात 3 बजे तक सक्रिय रहता था, क्योंकि इनका मुख्य टारगेट विदेशों में बैठे लोग थे।
- ठगी का तरीका: जालसाज मुख्य रूप से उन लोगों को शिकार बनाते थे जो ऑनलाइन शॉपिंग के बाद ‘रिफंड’ के लिए गूगल पर सर्च करते थे। सर्च करते ही ग्राहकों का डेटा इन ठगों तक पहुँच जाता था। ये लोग कस्टमर केयर बनकर कॉल करते और मदद के बहाने ओटीपी (OTP) लेकर बैंक खाता खाली कर देते थे।
- इनसेंटिव का लालच: पकड़े गए कर्मचारियों का वेतन 25 से 28 हजार रुपए था, लेकिन अगर उनके जरिए किसी के साथ ठगी होती थी, तो उन्हें ठगी गई रकम का 10% इनसेंटिव के रूप में मिलता था। 5 राउंड के इंटरव्यू के बाद ही यहाँ युवाओं को नौकरी मिलती थी।
अहमदाबाद से जुड़े तार, ऑपरेशन मैनेजर गिरफ्तार
इस पूरे रैकेट का संचालन अहमदाबाद के रहने वाले नारायणदास खैराजानी, ललित खैराजानी और विक्रम सिंह परमार द्वारा किया जा रहा था। पुलिस ने फिलहाल दोनों ऑपरेशन मैनेजरों (ललित और विक्रम) को गिरफ्तार कर लिया है, जो गोमतीनगर विस्तार में रह रहे थे। पुलिस अब इन दोनों से पूछताछ कर गिरोह के मुख्य सरगना तक पहुँचने की कोशिश कर रही है।
पुलिस की चेतावनी
पुलिस प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। उन्होंने कहा कि रिफंड या किसी भी तकनीकी समस्या के लिए केवल अधिकृत वेबसाइटों का ही उपयोग करें। किसी भी अनजान व्यक्ति को अपना ओटीपी या बैंक विवरण साझा न करें।
फिलहाल, पुलिस पूरे मामले की गहनता से जांच कर रही है और उम्मीद है कि इस कार्रवाई के बाद साइबर ठगी के इस बड़े नेटवर्क के और भी कई राज खुलेंगे।



