जानिए कहां है सीता अम्मा मंदिर – भगवान राम और सीता की पवित्र स्मृतियों का है स्थल

रिपोर्ट – ब्रजेश शर्मा
श्रीलंका का नुवारा एलिया, जो अपनी ऊंची पहाड़ियों और हरियाली के लिए प्रसिद्ध है, वहां एक ऐसा पवित्र स्थल है, जो भगवान राम और सीता की अमिट यादों से जुड़ा हुआ है। यह स्थल सीता अम्मा मंदिर के रूप में प्रसिद्ध है, जिसे वहां की लोक कथाओं और इतिहास में एक विशेष स्थान प्राप्त है।

कहते हैं कि यही वह जगह है, जहाँ भगवान राम ने सीता जी को रावण के बंदीगृह से मुक्त किया था और फिर अयोध्या के लिए पहला कदम बढ़ाया था।
जानिए सीता अम्मा मंदिर का महत्त्व
सीता अम्मा मंदिर, नुवारा एलिया के घने जंगलों और पहाड़ी क्षेत्रों में स्थित है। इस क्षेत्र में अन्य कई मंदिर भी हैं, लेकिन सीता अम्मा मंदिर अपनी ऐतिहासिक और धार्मिक मान्यताओं के कारण सबसे अलग है। शाम के समय मंदिर में शांति का माहौल होता है, जब श्रद्धालु बहुत कम संख्या में आते हैं।

इस समय मंदिर की आंतरिक दीवारों पर जलते हुए दीपकों की रौशनी मंदिर के वातावरण को और भी पवित्र बना देती है। यहाँ का माहौल निश्चित रूप से भक्तों को आध्यात्मिक शांति प्रदान करता है।
सीता के साथ हनुमान का जुड़ाव
सीता अम्मा मंदिर के प्रवेश द्वार से लेकर अंदर तक हनुमान जी की कई मूर्तियाँ स्थापित हैं। यह स्थल भगवान राम और हनुमान के अद्वितीय रिश्ते को दर्शाता है। मंदिर के पीछे स्थित एक चट्टान पर हनुमान जी के चरण चिह्न भी पाए जाते हैं, जो उनकी सीता के प्रति भक्ति और समर्पण का प्रतीक हैं।

इसके अलावा, मंदिर के पास एक विशेष प्रकार का अशोक का पेड़ भी है, जिस पर अप्रैल महीने में लाल रंग के फूल खिलते हैं। यह वही पेड़ माना जाता है, जिसमें सीता जी को रावण से मुक्त करने के बाद भगवान राम ने हनुमान जी से मुलाकात की थी।
आयुर्वेदिक महत्व
यह भी कहा जाता है कि हनुमान जी संजीवनी बूटी लेने के लिए जिस पहाड़ को लाए थे, उसकी वनस्पतियाँ इस इलाके में आज भी फली-फूली हैं। श्रीलंका में सिंहली आयुर्वेद में इन पौधों को आज भी अत्यधिक प्रभावशाली माना जाता है। यहां की वनस्पतियाँ न केवल ऐतिहासिक दृष्टि से बल्कि चिकित्सा क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।
देवुरुम वेला: अग्नि परीक्षा का स्थल
देवुरुम वेला नामक स्थान के बारे में मान्यता है कि यही वह स्थल था, जहां सीता जी की अग्नि परीक्षा हुई थी। इस स्थान की मिट्टी की परत काली राख जैसी है, जबकि पूरे देश में मिट्टी का रंग सामान्यतः भूरा या हल्का लाल होता है।

स्थानीय लोक मान्यता के अनुसार, यह काली राख रावण की लंका के दहन की कहानी से जुड़ी हुई है। इस स्थान को अब एक पवित्र तीर्थ स्थल के रूप में माना जाता है और यहाँ भक्तों की श्रद्धा बनी रहती है।
पढ़िए रामायण का ऐतिहासिक संदर्भ
रामायण के अनुसार, भगवान राम ने अपना वनवास चित्रकूट से शुरू किया था और लगभग एक साल तक पंचवटी में रहे थे। यहीं से रावण ने सीता का हरण किया था, और राम ने अपनी सेना के साथ किष्किंधा की ओर यात्रा की थी। यह वही स्थान था जहां हनुमान और सुग्रीव से उनकी मित्रता हुई थी।

इसके बाद रामेश्वरम् में संपाति ने सीता का पता बताया और फिर राम ने सेतु बनाकर लंका में युद्ध की तैयारी की थी। अनुमान है कि सीता जी लंका में लगभग 11 महीने रहीं, और इस समय के दौरान भगवान राम ने उन्हें मुक्त करने के लिए कड़ा संघर्ष किया था।
पूजा और धार्मिक महत्व
श्रीलंका में हर महीने एक निश्चित दिन को पूजा का आयोजन किया जाता है, जिसे ‘पोएडे’ कहा जाता है। इस दिन सीता अम्मा मंदिर में विशेष रूप से भक्तों की भीड़ होती है। सैकड़ों सैलानी इस पवित्र स्थान पर आते हैं और भगवान राम और सीता की पूजा करते हैं।

विशेष रूप से जनवरी में पोंगल के एक महीने पहले से तमिल समाज के गांव-गांव में भजन गाए जाते हैं, और 15 जनवरी को पूर्णाहुति पर शोभायात्रा भी निकाली जाती है।

सीता अम्मा मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि ऐतिहासिक दृष्टि से भी अत्यधिक महत्वपूर्ण है। यह मंदिर भगवान राम और सीता के बीच के पवित्र रिश्ते और उनकी गहरी भक्ति का प्रतीक है। यहाँ का शांत वातावरण और हनुमान जी के चरण चिह्न, इस स्थल को एक विशेष स्थान प्रदान करते हैं।

यदि आप श्रीलंका के धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों की यात्रा पर हैं, तो सीता अम्मा मंदिर का दर्शन आपके अनुभव को और भी यादगार बना देगा।



