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स्मार्ट प्रीपेड मीटर पर आयोग हुआ सख्त, 2 घंटे में बिजली न जोड़ने पर पावर कॉरपोरेशन को भेजा नोटिस

रिपोर्ट – ब्रजेश शर्मा

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटर व्यवस्था को लेकर बिजली नियामक आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। रिचार्ज के दो घंटे बाद भी बिजली कनेक्शन बहाल न होने की लगातार मिल रही शिकायतों के बाद आयोग ने पावर कॉरपोरेशन को नोटिस जारी किया है। साथ ही, नियमों के उल्लंघन पर प्रतिदिन एक लाख रुपये तक की पेनाल्टी लगाने के संकेत भी दिए गए हैं।

आयोग ने प्रबंधन निदेशक (एमडी) से 15 दिनों के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है। यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो जुर्माना लगाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है। इस कार्रवाई से स्पष्ट है कि उपभोक्ताओं को समय पर सेवा उपलब्ध कराना अब प्राथमिकता के केंद्र में है।

2 घंटे में कनेक्शन जोड़ना अनिवार्य, फिर भी हो रहा उल्लंघन

नियमानुसार, प्रीपेड स्मार्ट मीटर उपभोक्ता द्वारा रिचार्ज करने के दो घंटे के भीतर बिजली कनेक्शन स्वतः बहाल होना चाहिए। हालांकि आयोग के समक्ष प्रस्तुत आंकड़ों में सामने आया कि बड़ी संख्या में इस नियम का पालन नहीं किया गया।

रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 95 प्रतिशत मामलों में निर्धारित समयसीमा के भीतर कनेक्शन नहीं जोड़े गए, जिसे आयोग ने “गंभीर लापरवाही” की श्रेणी में रखा है। कुछ दिनों में तो केवल 77 प्रतिशत कनेक्शन ही समय पर जुड़ सके। इससे लाखों उपभोक्ताओं को असुविधा का सामना करना पड़ा।

1.93 लाख उपभोक्ता हैं प्रभावित

आंकड़ों के मुताबिक करीब 1.93 लाख उपभोक्ता सीधे तौर पर इस समस्या से प्रभावित हुए हैं। ऐसे में आयोग ने साफ कहा है कि तकनीकी खामियों या प्रशासनिक लापरवाही का खामियाजा आम उपभोक्ता को नहीं भुगतना चाहिए।

इसके अतिरिक्त आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि बिजली कंपनियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी और जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी।

जानिए स्मार्ट मीटर परियोजना का वर्तमान स्वरूप

प्रदेश में अब तक लगभग 85 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। इनमें से 70 लाख से अधिक मीटर प्रीपेड मोड में संचालित हो रहे हैं। सरकार का उद्देश्य डिजिटल प्रणाली के माध्यम से पारदर्शिता और राजस्व संग्रह में सुधार लाना था।

हालांकि, लगातार आ रही शिकायतों ने इस व्यवस्था की कार्यक्षमता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। विशेष रूप से, रिचार्ज के बावजूद बिजली बहाल न होने की समस्या ने उपभोक्ताओं में असंतोष बढ़ाया है।

सीएम की नाराजगी पहले ही हो चुकी है जाहिर

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले ही स्मार्ट मीटर व्यवस्था में आ रही खामियों पर नाराजगी जता चुके हैं। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि उपभोक्ता हितों से कोई समझौता नहीं होना चाहिए।

अब आयोग की सख्ती के बाद यह संकेत मिल रहे हैं कि बिजली व्यवस्था में सुधार के लिए प्रशासनिक स्तर पर व्यापक समीक्षा की जा सकती है।

उपभोक्ता परिषद ने उठाए सवाल

उपभोक्ता परिषद ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया है। परिषद का कहना है कि बिना स्पष्ट सहमति और पर्याप्त जागरूकता के बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं को प्रीपेड मोड में स्थानांतरित किया गया।

परिषद ने मांग की है कि प्रीपेड मीटर की अनिवार्यता समाप्त की जाए और 70 लाख मीटर को पोस्टपेड मोड में परिवर्तित किया जाए। इसके अलावा, नए कनेक्शनों को भी स्वचालित रूप से प्रीपेड करने की प्रक्रिया पर पुनर्विचार करने की मांग की गई है।

जानिए आयोग का स्पष्ट संदेश

आयोग ने अपने आदेश में कहा है कि उपभोक्ताओं को समय पर और निर्बाध सेवा उपलब्ध कराना बिजली कंपनियों की कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी है। यदि तय समय में सेवा बहाल नहीं होती, तो यह सेवा शर्तों का उल्लंघन माना जाएगा।

इसी क्रम में आयोग ने संकेत दिया है कि यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो वित्तीय दंड के साथ-साथ अन्य प्रशासनिक कार्रवाई भी की जा सकती है।

लगातार जारी है तकनीकी जांच

पावर कॉरपोरेशन की ओर से बताया गया है कि स्मार्ट मीटर प्रणाली में आ रही तकनीकी खामियों की जांच की जा रही है। सर्वर, नेटवर्क और सॉफ्टवेयर इंटीग्रेशन से जुड़ी समस्याओं की समीक्षा की जा रही है ताकि भविष्य में ऐसी शिकायतें न आएं।

हालांकि आयोग ने स्पष्ट किया है कि तकनीकी कारणों को लगातार बहाने के रूप में स्वीकार नहीं किया जाएगा। उपभोक्ताओं को सेवा में देरी का सामना नहीं करना चाहिए।

बिजली व्यवस्था पर बढ़ता दबाव

वर्तमान स्थिति ने प्रदेश की बिजली व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव बना दिया है। एक ओर डिजिटल परिवर्तन की प्रक्रिया जारी है, तो दूसरी ओर उपभोक्ताओं की संतुष्टि सुनिश्चित करना भी आवश्यक है।

विशेषज्ञों का मानना है कि स्मार्ट मीटर प्रणाली पारदर्शिता और दक्षता बढ़ा सकती है, लेकिन इसके सफल क्रियान्वयन के लिए मजबूत तकनीकी ढांचा और सतत निगरानी जरूरी है।

स्मार्ट प्रीपेड मीटर विवाद अब प्रशासनिक और नियामकीय स्तर पर गंभीर विषय बन चुका है। आयोग की सख्ती से यह संकेत मिला है कि उपभोक्ता हित सर्वोपरि हैं और सेवा में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

आने वाले दिनों में पावर कॉरपोरेशन द्वारा दिए जाने वाले स्पष्टीकरण और संभावित सुधारात्मक कदमों पर सबकी नजर रहेगी। यदि व्यवस्था में पारदर्शिता और तकनीकी मजबूती लाई जाती है, तो स्मार्ट मीटर प्रणाली अपने उद्देश्य को प्राप्त कर सकती है। अन्यथा, इसे लेकर असंतोष और बढ़ सकता है।

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