
रिपोर्ट – ब्रजेश शर्मा
लखनऊ: विधानसभा के एक दिवसीय विशेष सत्र से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पत्रकार वार्ता के दौरान कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (सपा) और इंडी गठबंधन पर कड़ा राजनीतिक प्रहार किया। उन्होंने इन दलों को महिला विरोधी बताते हुए कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम जैसे महत्वपूर्ण विधेयक के प्रति इनके रवैये की सार्वजनिक रूप से समीक्षा और चर्चा आवश्यक है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह विशेष सत्र इसलिए बुलाया गया है ताकि महिलाओं के अधिकारों और उनके राजनीतिक सशक्तीकरण से जुड़े मुद्दों पर गंभीरता से विचार किया जा सके।
विपक्ष पर महिला विरोधी रवैये का लगाया आरोप
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने बयान में कांग्रेस और सपा पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि इन दलों का इतिहास महिलाओं के प्रति संवेदनशील नहीं रहा है। उन्होंने कहा कि जब भी इन दलों को सत्ता का अवसर मिला, महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान को लेकर कई सवाल उठे।

उन्होंने आगे कहा कि समाजवादी पार्टी के शासनकाल में कई घटनाएं ऐसी रहीं, जिन्हें लेकर आज भी चर्चा होती है। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि उस समय महिलाओं की स्थिति को लेकर गंभीर सवाल उठे थे और कई मामलों में प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हुए थे।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर विवाद – सीएम
सीएम योगी ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम का उल्लेख करते हुए कहा कि यह विधेयक महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दलों ने इस प्रक्रिया में सहयोगात्मक भूमिका नहीं निभाई।

उन्होंने कहा कि यदि विपक्ष इस विषय पर सकारात्मक भूमिका निभाता, तो इसे और अधिक प्रभावी ढंग से लागू किया जा सकता था। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि सरकार इस दिशा में लगातार काम कर रही है ताकि महिलाओं को नीति-निर्धारण में अधिक भागीदारी मिल सके।
विशेष सत्र में चर्चा और रणनीति – सीएम
मुख्यमंत्री ने बताया कि विशेष सत्र के दौरान पूरे दिन इस विषय पर विस्तृत चर्चा होगी। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल राजनीतिक बहस करना नहीं है, बल्कि महिलाओं के अधिकारों और उनके सशक्तिकरण को मजबूत करना है।

इसके साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि केंद्र सरकार द्वारा महिलाओं के लिए कई ऐतिहासिक कदम उठाए गए हैं, जिनसे उनकी भागीदारी हर क्षेत्र में बढ़ी है।
विपक्ष को घेरने की रणनीति – सीएम
सीएम योगी ने स्पष्ट कहा कि विशेष सत्र में विपक्षी दलों की भूमिका और उनके रुख पर भी चर्चा होगी। उन्होंने कांग्रेस, सपा के साथ-साथ अन्य क्षेत्रीय दलों जैसे डीएमके और टीएमसी पर भी सवाल उठाए।

उन्होंने कहा कि यह अवसर है जब सभी दलों को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए कि वे महिलाओं के अधिकारों के प्रति किस प्रकार का दृष्टिकोण रखते हैं।
सपा और कांग्रेस से किया सवाल
मुख्यमंत्री ने सपा और कांग्रेस के विधायकों से अपील की कि यदि उनके पास नैतिक साहस है तो वे सदन में खुलकर चर्चा में भाग लें। उन्होंने कहा कि उन्हें यह स्पष्ट करना चाहिए कि उन्होंने नारी शक्ति वंदन अधिनियम का विरोध क्यों किया।

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि यदि किसी को लगता है कि उनके दल की नीति गलत रही है, तो उन्हें सार्वजनिक रूप से इसकी समीक्षा करनी चाहिए और आवश्यक हो तो निंदा प्रस्ताव में भाग लेना चाहिए।
महिलाओं के सशक्तिकरण पर दिया जोर
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि सरकार का उद्देश्य महिलाओं को केवल अधिकार देना ही नहीं, बल्कि उन्हें समाज और राजनीति में बराबरी का स्थान दिलाना है।

उन्होंने कहा कि आज देश में महिलाओं की भूमिका पहले से कहीं अधिक मजबूत हुई है और नीति-निर्धारण में उनकी भागीदारी लगातार बढ़ रही है। यह बदलाव देश के विकास के लिए सकारात्मक संकेत है।
ऐतिहासिक संदर्भों का किया उल्लेख
सीएम योगी ने अपने बयान में इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि पहले भी कई अवसरों पर महिलाओं के आरक्षण और उनके अधिकारों को लेकर राजनीतिक मतभेद देखने को मिले हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार इस दिशा में लगातार सुधारात्मक कदम उठा रही है।

उन्होंने यह भी कहा कि सरकार का उद्देश्य किसी भी दल की आलोचना करना नहीं है, बल्कि महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करना है।

लखनऊ में आयोजित इस विशेष सत्र से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बयान राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट रूप से विपक्षी दलों पर महिला विरोधी रवैये का आरोप लगाते हुए नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर उनकी भूमिका पर सवाल उठाए हैं।

फिलहाल, इस मुद्दे पर विधानसभा में होने वाली चर्चा पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। उम्मीद की जा रही है कि इस बहस से महिलाओं के सशक्तीकरण से जुड़े मुद्दों पर और स्पष्टता सामने आएगी तथा नीति स्तर पर नए निर्णय लिए जा सकते हैं।



