हमीरपुर: जल जीवन मिशन पर बड़ा सवाल – स्थानीय ग्रामीणों ने उठाया मुद्दा – जानिए क्यों?

रिपोर्ट – मोहम्मद अकरम
हमीरपुर: जिले के गोहांड ब्लॉक में जल जीवन मिशन के तहत बनाई गई पानी की टंकी और पाइपलाइन व्यवस्था को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। चंदवारी डांडा क्षेत्र में बनी पानी की टंकी में दिखाई दे रही दरारों ने स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता मानकों का सही तरीके से पालन नहीं किया गया, जिसके कारण परियोजना शुरू होने से पहले ही समस्याएं सामने आने लगी हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि इस योजना का उद्देश्य हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाना था, वहां आज भी कई परिवार पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। वहीं जहां पानी की सप्लाई शुरू हुई है, वहां पाइपलाइन लीकेज और अधूरी व्यवस्थाओं के कारण लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
जानिए जल जीवन मिशन का मुख्य उद्देश्य
केंद्र और राज्य सरकार की ओर से जल जीवन मिशन की शुरुआत ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने के उद्देश्य से की गई थी। इस योजना के तहत गांवों में पानी की टंकियां, पाइपलाइन और घरेलू कनेक्शन उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

हमीरपुर जिले के गोहांड ब्लॉक में भी इसी योजना के अंतर्गत कई गांवों में जलापूर्ति व्यवस्था विकसित की जा रही है। हालांकि चंदवारी डांडा और आसपास के क्षेत्रों में सामने आई शिकायतों ने योजना के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पानी की टंकी में दिखीं दरारें
स्थानीय लोगों के अनुसार चंदवारी डांडा में बनी पानी की टंकी के फाउंडेशन और आसपास के हिस्सों में दरारें दिखाई दे रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि टंकी के निर्माण में इस्तेमाल की गई सामग्री की गुणवत्ता पर संदेह है।

लोगों का कहना है कि यदि समय रहते जांच और मरम्मत नहीं की गई, तो भविष्य में बड़ी तकनीकी समस्या खड़ी हो सकती है। कई ग्रामीणों ने प्रशासन से निर्माण कार्य की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
ग्रामीणों को अब भी पानी की समस्या
बिलगांव और आसपास के कई इलाकों में लोगों का कहना है कि जलापूर्ति योजना के बावजूद उन्हें नियमित पानी नहीं मिल पा रहा है। कई परिवार अब भी पारंपरिक जल स्रोतों पर निर्भर हैं।

ग्रामीणों के अनुसार कुछ स्थानों पर पाइपलाइन तो बिछा दी गई है, लेकिन पानी की सप्लाई नियमित नहीं है। वहीं कुछ घरों में नलों की टोटियां तक नहीं लगाई गई हैं, जिससे योजना का पूरा लाभ लोगों तक नहीं पहुंच पा रहा।
पाइपलाइन लीकेज से हो रही पानी की बर्बादी
स्थानीय लोगों ने पाइपलाइन में कई जगह लीकेज होने की शिकायत भी की है। उनका कहना है कि पाइपलाइन फटने के कारण बड़ी मात्रा में पानी सड़कों और खाली जगहों पर बह रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि एक तरफ लोग पानी की कमी से परेशान हैं, वहीं दूसरी तरफ कीमती पानी की बर्बादी हो रही है। इससे न केवल जल संकट बढ़ रहा है, बल्कि सड़कें भी खराब हो रही हैं।
निर्माण गुणवत्ता पर उठे सवाल
ग्रामीणों का आरोप है that निर्माण कार्य के दौरान गुणवत्ता मानकों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया। लोगों का कहना है कि यदि निर्माण सही तरीके से किया जाता, तो इतनी जल्दी दरारें और लीकेज जैसी समस्याएं सामने नहीं आतीं।

हालांकि संबंधित विभाग की ओर से अभी तक इस मामले पर विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। प्रशासन का कहना है कि शिकायतों की जानकारी ली जा रही है और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
जांच की हुई मांग तेज
गांव के लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने पूरे प्रकरण की तकनीकी जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि निर्माण कार्य में किसी प्रकार की लापरवाही हुई है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि जल जीवन मिशन के तहत चल रहे कार्यों की नियमित निगरानी की जाए ताकि योजनाओं का लाभ सही तरीके से लोगों तक पहुंच सके।
विशेषज्ञों ने दी गुणवत्ता निगरानी की सलाह
इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्रामीण विकास से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि बड़ी सरकारी योजनाओं में गुणवत्ता नियंत्रण बेहद जरूरी होता है। यदि निर्माण कार्य के दौरान तकनीकी मानकों की अनदेखी की जाती है, तो बाद में रखरखाव और सुरक्षा दोनों प्रभावित हो सकते हैं।

निर्माण विशेषज्ञों का कहना है कि जल आपूर्ति जैसी बुनियादी योजनाओं में नियमित निरीक्षण और समय-समय पर तकनीकी ऑडिट होना चाहिए।
ग्रामीणों को प्रशासन से है यह उम्मीद
स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि प्रशासन उनकी समस्याओं को गंभीरता से लेगा और जल्द समाधान निकालेगा। ग्रामीणों का कहना है कि पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा पर किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती।

लोग चाहते हैं कि पाइपलाइन लीकेज ठीक कराए जाएं, अधूरे कनेक्शन पूरे किए जाएं और टंकी की गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच कराई जाए।

हमीरपुर के गोहांड ब्लॉक में जल जीवन मिशन से जुड़ी शिकायतों ने ग्रामीण विकास योजनाओं की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पानी की टंकी में दरारें, पाइपलाइन लीकेज और अधूरी सुविधाएं स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा रही हैं।

ऐसे में जरूरी है कि प्रशासन समय रहते शिकायतों की निष्पक्ष जांच कर प्रभावी कार्रवाई करे, ताकि लोगों को सुरक्षित और नियमित पेयजल सुविधा मिल सके तथा सरकारी योजनाओं पर जनता का भरोसा बना रहे।



