कानपुर: कमिश्नर पुलिस की बड़ी कार्रवाई: फर्जी डिग्री और मार्कशीट बनाने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़

रिपोर्ट – शुभम शर्मा
कानपुर: पुलिस कमिश्नरेट ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए फर्जी डिग्री और मार्कशीट बनाने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है। किदवई नगर थाना पुलिस और सर्विलांस टीम की संयुक्त कार्रवाई में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। इस कार्रवाई के बाद शिक्षा क्षेत्र में फर्जीवाड़े के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है।

पुलिस के अनुसार, यह गिरोह देशभर में विभिन्न विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों के नाम पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर लोगों से धोखाधड़ी करता था। इस मामले में पुलिस की जांच लगातार आगे बढ़ रही है।
किदवई नगर पुलिस और सर्विलांस टीम ने की संयुक्त कार्रवाई
जानकारी के अनुसार, किदवई नगर थाना पुलिस और सर्विलांस टीम ने तकनीकी इनपुट और खुफिया जानकारी के आधार पर यह कार्रवाई की। दोनों टीमों ने मिलकर छापेमारी की और दो आरोपियों को मौके से गिरफ्तार किया।

गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान मनीष कुमार उर्फ रवि और अर्जुन यादव के रूप में हुई है। पुलिस ने इनके पास से लैपटॉप, दो मोबाइल फोन और बड़ी संख्या में फर्जी शैक्षणिक दस्तावेज बरामद किए हैं।
फर्जी विश्वविद्यालयों के नाम पर चल रहा था नेटवर्क
जांच में यह सामने आया है कि आरोपी कई फर्जी विश्वविद्यालयों और संस्थानों के नाम पर नकली डिग्री, मार्कशीट और माइग्रेशन सर्टिफिकेट तैयार करते थे। इसके बाद इन्हें जरूरतमंद लोगों को बेचकर मोटी रकम वसूली जाती थी।

इसके अलावा, यह गिरोह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और फर्जी वेबसाइट्स के जरिए लोगों से संपर्क करता था। विशेष रूप से वे ऐसे लोगों को निशाना बनाते थे जो बिना परीक्षा या कम समय में डिग्री प्राप्त करना चाहते थे।
सोशल मीडिया के जरिए अपनाते थे ठगी का तरीका
पुलिस जांच में यह भी पता चला है कि आरोपी सोशल मीडिया के माध्यम से ग्राहकों से संपर्क करते थे। वे लोगों को यह झांसा देते थे कि वे बिना परीक्षा के आसानी से डिग्री और प्रमाणपत्र उपलब्ध करा सकते हैं।

इसके बाद वे उनसे लाखों रुपये की मांग करते थे और फर्जी दस्तावेज उपलब्ध कराते थे। यह पूरा नेटवर्क कई राज्यों में सक्रिय बताया जा रहा है, जिससे इसकी गंभीरता और बढ़ जाती है।
पढ़िए पुलिस अधिकारी का बयान
इस मामले में एक पुलिस अधिकारी ने जानकारी देते हुए बताया कि बरामद किए गए दस्तावेजों में कई विश्वविद्यालयों की फर्जी मार्कशीट और डिग्रियां शामिल हैं।

उन्होंने कहा, “आरोपियों से पूछताछ की जा रही है और उनके नेटवर्क की गहराई से जांच की जा रही है। इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की पहचान कर जल्द कार्रवाई की जाएगी।”
पहले से आपराधिक रिकॉर्ड की भी होगी जांच
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ पहले भी कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। अब उनके पुराने रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि वे कितने समय से इस अवैध गतिविधि में शामिल थे।

इसके साथ ही पुलिस उनके बैंक खातों और डिजिटल लेनदेन की भी जांच कर रही है, जिससे पूरे वित्तीय नेटवर्क का खुलासा किया जा सके।
जानिए डिजिटल नेटवर्क और जांच का दायरा
जांच अधिकारियों का मानना है कि यह गिरोह केवल स्थानीय स्तर पर नहीं, बल्कि अंतरराज्यीय स्तर पर सक्रिय था। इसलिए इसके पूरे नेटवर्क की पहचान के लिए डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जा रही है।

साथ ही, यह भी देखा जा रहा है कि किन-किन लोगों ने इनसे फर्जी डिग्री या दस्तावेज प्राप्त किए हैं। इससे भविष्य में होने वाली धोखाधड़ी को रोकने में मदद मिलेगी।

कानपुर पुलिस की यह कार्रवाई शिक्षा क्षेत्र में हो रहे फर्जीवाड़े के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। दो आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद एक बड़े अंतरराज्यीय नेटवर्क का खुलासा हुआ है।

पुलिस की जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और भी गिरफ्तारियां होने की संभावना है। यह कार्रवाई यह संदेश देती है कि फर्जी दस्तावेज और शिक्षा से जुड़े अपराधों पर अब सख्त नजर रखी जा रही है।



