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कानपुर: अधिवक्ताओं ने किया जोरदार प्रदर्शन: लखनऊ लाठीचार्ज के विरोध में डीएम कार्यालय पर सौंपा ज्ञापन

रिपोर्ट – ब्रजेश शर्मा 

कानपुर: सोमवार को अधिवक्ताओं ने लखनऊ में हुए कथित लाठीचार्ज और अतिक्रमण कार्रवाई के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया। सैकड़ों की संख्या में जुटे अधिवक्ताओं ने जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर नारेबाजी करते हुए सरकार के खिलाफ अपना आक्रोश व्यक्त किया और एक ज्ञापन भी सौंपा।

यह प्रदर्शन कानपुर बार एसोसिएशन के नेतृत्व में आयोजित किया गया, जिसमें अधिवक्ताओं ने एकजुट होकर न्याय और सम्मान की मांग उठाई। प्रदर्शन के दौरान पूरे परिसर में अधिवक्ताओं की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली।

बार एसोसिएशन नेतृत्व में हुआ प्रदर्शन

इस प्रदर्शन का नेतृत्व कानपुर बार एसोसिएशन के अध्यक्ष योगेंद्र कुमार अवस्थी और महामंत्री विनय कुमार मिश्रा ने किया। दोनों पदाधिकारियों ने कहा कि लखनऊ में अधिवक्ताओं के साथ किया गया व्यवहार अस्वीकार्य है और इसकी कड़ी निंदा की जानी चाहिए।

उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि अधिवक्ता समाज न्याय व्यवस्था की रीढ़ होते हैं और उनके साथ इस प्रकार की कार्रवाई लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।

सरकार से रखी माफी और मुआवजे की मांग

प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं ने राज्य सरकार से मांग की कि लखनऊ में हुए कथित लाठीचार्ज के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगी जाए। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जिन अधिवक्ताओं को नुकसान हुआ है, उन्हें उचित मुआवजा दिया जाना चाहिए।

अधिवक्ताओं का कहना था कि यदि सरकार इस मामले को गंभीरता से नहीं लेती है तो यह न्याय व्यवस्था के प्रति गलत संदेश जाएगा। इसलिए आवश्यक है कि सभी पीड़ितों को न्याय मिले और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

कचहरी परिसर में सुविधाओं की भी रखी मांग

इसके अलावा अधिवक्ताओं ने यह भी मांग रखी कि प्रदेश के सभी कचहरी परिसरों में बुनियादी सुविधाओं को बेहतर किया जाए। उन्होंने कहा कि गर्मी, बारिश और सर्दी जैसे मौसम में अधिवक्ताओं को कार्य करने में कठिनाई होती है।

अधिवक्ताओं ने सुझाव दिया कि बैठने की उचित व्यवस्था, पेयजल और अन्य मूलभूत सुविधाओं को प्राथमिकता के आधार पर विकसित किया जाए, ताकि न्याय व्यवस्था सुचारू रूप से चल सके।

पढ़िए अधिवक्ताओं का सख्त बयान

बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने अपने संबोधन में कहा कि अधिवक्ता कठिन परिस्थितियों में भी न्याय दिलाने का कार्य करते हैं। उन्होंने कहा, “46 डिग्री की भीषण गर्मी में भी अधिवक्ता अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं, लेकिन उनके साथ इस तरह का व्यवहार उचित नहीं है।”

उन्होंने आगे कहा कि पूरे प्रदेश के अधिवक्ता संगठन इस घटना का विरोध कर रहे हैं और एकजुट होकर अपनी आवाज उठा रहे हैं।

2027 चुनाव को लेकर दी चेतावनी

प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं ने सरकार को चेतावनी भी दी। उन्होंने कहा कि यदि अधिवक्ताओं के हितों की लगातार अनदेखी की गई तो आने वाले 2027 के चुनाव में इसका राजनीतिक प्रभाव देखने को मिल सकता है।

हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगों को रखना है, लेकिन यदि समाधान नहीं निकला तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

प्रशासनिक स्तर पर हुई बढ़ी हलचल

इस प्रदर्शन के बाद प्रशासनिक स्तर पर भी हलचल देखी गई। डीएम कार्यालय परिसर में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरती गई। वहीं, अधिकारियों ने ज्ञापन प्राप्त कर संबंधित स्तर पर भेजने का आश्वासन दिया। प्रशासन का कहना है कि सभी मांगों और शिकायतों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

कानपुर में अधिवक्ताओं का यह प्रदर्शन लखनऊ में हुए लाठीचार्ज के विरोध में एक बड़ा सामूहिक संदेश माना जा रहा है। अधिवक्ताओं ने न केवल सरकार से माफी की मांग की, बल्कि अपने हितों और सुविधाओं को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए हैं।

आने वाले समय में यह मुद्दा और अधिक राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय बन सकता है, क्योंकि अधिवक्ता समुदाय ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वे अपने अधिकारों के लिए संगठित रहेंगे और अपनी आवाज उठाते रहेंगे।

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