बिजनौर: आवारा कुत्तों का बढ़ता जा रहा आतंक: मासूम बच्ची और बुजुर्गों पर किया हमला – जानिए कहां?

रिपोर्ट – ताबिश मिर्जा
बिजनौर: आवारा कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे स्थानीय नागरिकों में चिंता और सुरक्षा की भावना बढ़ गई है। मासूम बच्चों और बुजुर्गों पर आवारा और हिंसक कुत्तों के हमले की घटनाएँ लगातार सामने आ रही हैं। हाल ही में नजीबाबाद इलाके में एक बच्ची, जो ट्यूशन पढ़ने जा रही थी, पर कुत्तों ने हमला कर गंभीर रूप से घायल कर दिया।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों से आवारा कुत्तों की शिकायत संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से की जा रही थी, लेकिन किसी भी प्रकार की ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इस अनदेखी के कारण स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि मासूम बच्चियों और बुजुर्गों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है।
आवार कुत्तों की समस्या से बढ़ती जा रही नागरिकों की चिंता
नजीबाबाद इलाके की रहने वाली जीशान ने बताया कि कई बार उन्होंने संबंधित विभाग के अधिकारियों से आवारा कुत्तों की समस्या को लेकर शिकायत की थी। हालांकि, किसी भी अधिकारी ने सुनवाई नहीं की, जिसके कारण स्थानीय लोगों में प्रशासन के प्रति रोष बढ़ा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि आवारा कुत्तों को पकड़कर उन्हें सुरक्षित स्थान पर छोड़ने की व्यवस्था की जाए ताकि मासूम बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
पढ़िए कहां आवारा कुत्तों ने बच्ची को बनाया अपना शिकार
हालिया घटना में ट्यूशन पढ़ने जा रही बच्ची पर हमला हुआ। बच्ची को गंभीर चोटें आई हैं और उसे नज़दीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। परिवार और स्थानीय नागरिकों का कहना है कि प्रशासन को स्थिति की गंभीरता का अहसास होना चाहिए और तुरंत कदम उठाने चाहिए।

जानिए प्रशासन की भूमिका पर क्यों उठ रहे सवाल
स्थानीय प्रशासन ने अभी तक इस मामले में कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। क्षेत्रवासियों का आरोप है कि प्रशासन ‘कुंभकर्णी नींद’ सो रहा है और उनका मुख्य ध्यान नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में नहीं है।
हालांकि, प्रशासन ने बताया कि आवारा कुत्तों के नियंत्रण और उनका उचित प्रबंधन करने के लिए योजना बनाई जा रही है। इस योजना के अंतर्गत आवारा कुत्तों को पकड़कर सुरक्षित स्थानों पर छोड़ा जाएगा और उनकी संख्या नियंत्रित करने के उपाय किए जाएंगे।
सुरक्षा के उपाय की है तलाश और और नागरिकों की भी है जिम्मेदारी
विशेषज्ञों का कहना है कि आवारा कुत्तों के हमलों को रोकने के लिए स्थानीय नागरिकों को भी सतर्क रहना चाहिए। इसके साथ ही, आवारा जानवरों के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाना और उन्हें सुरक्षित जगह पर छोड़ने की प्रशासनिक योजना का समर्थन करना आवश्यक है।
इसके अलावा, नागरिकों को चाहिए कि वे अपने बच्चों को सुरक्षित मार्गों से स्कूल और ट्यूशन तक जाने की सलाह दें। बड़े बुजुर्गों को भी शाम और रात के समय अकेले निकलने से बचना चाहिए।
समाज और प्रशासन के बीच होना चाहिए सहयोग
इस समस्या का समाधान केवल प्रशासन द्वारा नहीं किया जा सकता, बल्कि स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी भी आवश्यक है। आवारा जानवरों के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण और प्रशासन के सहयोग से ही इस तरह के हमलों से बचाव संभव हो सकता है।

स्थानीय नागरिकों ने भी प्रशासन से अपील की है कि आवारा कुत्तों की समस्या को प्राथमिकता दें और बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करें।
अब इस चिंता को किया जायेगा कैसे दूर
बिजनौर में आवारा कुत्तों का आतंक गंभीर चिंता का विषय बन गया है। हालिया घटनाओं ने यह साबित किया कि तत्काल और प्रभावी कदम उठाना न केवल आवश्यक है, बल्कि बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा के लिए अनिवार्य भी है।
स्थानीय नागरिकों और प्रशासन के बीच सहयोग, सही योजना और जागरूकता ही इस समस्या का स्थायी समाधान सुनिश्चित कर सकती है। इसलिए, आवारा कुत्तों के हमलों से सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जागरूकता, प्रशासनिक कार्रवाई और समाजिक सहयोग सबसे महत्वपूर्ण तत्व हैं।



