कानपुर: अंतर्राज्यीय साइबर ठगी गिरोह पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई, पढ़िए कैसे ड्रोन के सहारे 19 आरोपी गिरफ्तार?

रिपोर्ट – नौशाद अली / अंजनी शर्मा
कानपुर: साइबर अपराध के खिलाफ पुलिस ने बड़ी और संगठित कार्रवाई करते हुए एक अंतर्राज्यीय साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस अभियान के तहत कुल 19 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के अनुसार, यह गिरोह सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के नाम पर लोगों को ठगता था और अब तक सैकड़ों लोगों को आर्थिक नुकसान पहुंचा चुका है।

यह कार्रवाई सुनियोजित तरीके से की गई। पहले खुफिया जानकारी जुटाई गई, फिर ड्रोन कैमरों की मदद से पूरे क्षेत्र की निगरानी की गई। इसके बाद पुलिस ने घेराबंदी कर तलाशी अभियान चलाया और आरोपियों को हिरासत में लिया। फिलहाल सभी आरोपियों से पूछताछ जारी है और पुलिस आज इस मामले में और बड़े खुलासे कर सकती है।
ड्रोन कैमरे से की गई निगरानी, फिर हुई घेराबंदी
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, गिरोह की गतिविधियों की जानकारी मिलने के बाद विस्तृत रणनीति तैयार की गई। चूंकि मामला अंतर्राज्यीय नेटवर्क से जुड़ा हुआ था, इसलिए स्थानीय पुलिस के साथ-साथ साइबर सेल की टीम को भी सक्रिय किया गया।

सबसे पहले संदिग्ध क्षेत्र की ड्रोन कैमरों से निगरानी की गई, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि कितने लोग इसमें शामिल हैं और किस प्रकार की गतिविधियां संचालित हो रही हैं। इसके बाद भारी पुलिस बल के साथ रेउना क्षेत्र के एक गांव में सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया। पुलिस ने पूरे गांव को चारों ओर से घेर लिया, ताकि कोई भी संदिग्ध मौके से फरार न हो सके।

हालांकि पुलिस ने कार्रवाई से पहले लाउडस्पीकर के माध्यम से लोगों को चेतावनी भी दी, लेकिन पर्याप्त जवाब न मिलने पर 19 लोगों को हिरासत में लिया गया। तलाशी के दौरान बड़ी संख्या में मोबाइल फोन, सिम कार्ड और म्यूल अकाउंट्स से जुड़े दस्तावेज बरामद किए गए।
म्यूल अकाउंट्स और मोबाइल उपकरण हुए बरामद
जांच में सामने आया है कि गिरोह के सदस्य विभिन्न राज्यों के लोगों से संपर्क कर सरकारी योजनाओं में लाभ दिलाने का झांसा देते थे। इसके लिए वे मोबाइल कॉल, मैसेज और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग करते थे। पीड़ितों से बैंक खाते की जानकारी और ओटीपी लेकर रकम ट्रांसफर कर ली जाती थी।

पुलिस को मौके से कई मोबाइल फोन, संदिग्ध सिम कार्ड और तथाकथित “म्यूल अकाउंट्स” की जानकारी मिली है। म्यूल अकाउंट्स वे बैंक खाते होते हैं जिनका उपयोग अवैध लेन-देन के लिए किया जाता है। प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि इन खातों के माध्यम से विभिन्न राज्यों में धनराशि ट्रांसफर की जाती थी।

इसके अलावा, पुलिस अब इन खातों से जुड़े लेन-देन का डिजिटल विश्लेषण कर रही है। इससे यह पता लगाया जा सकेगा कि अब तक कितनी रकम की ठगी की गई और किन-किन राज्यों में इसका प्रभाव पड़ा।
सरकारी योजनाओं के नाम पर करते थे ठगी
जांच अधिकारियों के अनुसार, गिरोह के सदस्य खासतौर पर उन लोगों को निशाना बनाते थे जिन्हें सरकारी योजनाओं की जानकारी सीमित होती है। वे प्रधानमंत्री आवास योजना, पेंशन योजना, कृषि सब्सिडी और अन्य लाभकारी योजनाओं का नाम लेकर कॉल करते थे।

इसके बाद वे लाभार्थी को दस्तावेज सत्यापन या पंजीकरण शुल्क के नाम पर रकम ट्रांसफर करने के लिए कहते थे। कई मामलों में फर्जी वेबसाइट या लिंक भी भेजे जाते थे। परिणामस्वरूप, पीड़ित अपनी निजी और बैंकिंग जानकारी साझा कर देते थे, जिसका दुरुपयोग किया जाता था।

हालांकि पुलिस ने अभी तक आधिकारिक रूप से ठगी की कुल राशि का खुलासा नहीं किया है, लेकिन प्रारंभिक अनुमान के अनुसार यह रकम लाखों रुपये में हो सकती है।
गांव स्तर पर संगठित नेटवर्क की है आशंका
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, जिस गांव में कार्रवाई की गई वहां बड़ी संख्या में लोग इस गतिविधि में संलिप्त पाए गए। हालांकि यह जांच का विषय है कि सभी ग्रामीण इसमें शामिल थे या कुछ लोग मुख्य भूमिका में थे। फिर भी प्रारंभिक जांच से संकेत मिलता है कि यह संगठित नेटवर्क गांव स्तर पर संचालित हो रहा था।

जानकारों का मानना है कि साइबर अपराध अब बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी तकनीकी संसाधनों के माध्यम से संचालित किया जा रहा है। इसलिए पुलिस की यह कार्रवाई साइबर अपराध पर अंकुश लगाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
पूछताछ जारी, जल्द हो सकता है बड़ा खुलासा
गिरफ्तार किए गए सभी 19 आरोपियों से विस्तृत पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि गिरोह का मास्टरमाइंड कौन है और नेटवर्क किन-किन राज्यों तक फैला हुआ है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि क्या किसी अन्य जिले या राज्य से जुड़े लोग भी इस नेटवर्क का हिस्सा हैं।

इसके अतिरिक्त, साइबर विशेषज्ञ डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक जांच कर रहे हैं। मोबाइल डेटा, कॉल रिकॉर्ड, बैंक ट्रांजेक्शन और ऑनलाइन गतिविधियों का विश्लेषण किया जा रहा है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद विस्तृत प्रेस ब्रीफिंग के माध्यम से जानकारी साझा की जाएगी।
साइबर सुरक्षा को लेकर सतर्कता है जरूरी
इस घटना ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि साइबर ठगी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इसलिए नागरिकों को सतर्क रहने की आवश्यकता है। किसी भी अनजान कॉल, मैसेज या लिंक पर भरोसा न करें। विशेष रूप से बैंकिंग जानकारी, ओटीपी या व्यक्तिगत दस्तावेज साझा करने से बचें।

यदि किसी को संदेहास्पद कॉल या मैसेज प्राप्त होता है, तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन या स्थानीय पुलिस से संपर्क करना चाहिए। समय पर सूचना देने से न केवल आर्थिक नुकसान रोका जा सकता है, बल्कि अपराधियों तक पहुंचना भी आसान होता है।
कानपुर में अंतर्राज्यीय साइबर ठगी गिरोह के खिलाफ की गई यह कार्रवाई पुलिस की सक्रियता और तकनीकी तैयारी का उदाहरण है। ड्रोन निगरानी, सुनियोजित घेराबंदी और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर 19 आरोपियों की गिरफ्तारी साइबर अपराध के खिलाफ सख्त संदेश देती है।

हालांकि जांच अभी जारी है, लेकिन उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में इस नेटवर्क से जुड़े और भी तथ्य सामने आएंगे। फिलहाल, पुलिस की इस कार्रवाई को साइबर अपराध के विरुद्ध एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जो आम नागरिकों की सुरक्षा और विश्वास को मजबूत करेगा।



