Kanpur: राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस पर डीएम ने बच्चों को दी पेट के कीड़े की दवा, अभियान की हुई शुरुआत

कानपुर: जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने 10 फरवरी को कानपुर नगर में राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस का शुभारंभ किया। यह अभियान स्वास्थ्य विभाग द्वारा शहर और जिले के विभिन्न सरकारी, गैर-सरकारी स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों और निजी विद्यालयों में आयोजित किया जा रहा है। इस मौके पर जिलाधिकारी ने बच्चों को पेट के कीड़े की दवा खिलाकर अभियान का उद्घाटन किया। साथ ही उन्होंने बच्चों को कृमि संक्रमण के दुष्प्रभावों के बारे में जानकारी दी और इसका बचाव कैसे किया जा सकता है, इस पर प्रकाश डाला।
पढ़िए इस अभियान का उद्देश्य
राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस का उद्देश्य बच्चों में कृमि संक्रमण को खत्म करना और उनके शारीरिक तथा मानसिक विकास को बढ़ावा देना है। चिकित्सकों के अनुसार, कृमि संक्रमण से बच्चों के शारीरिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, जिससे उनकी शिक्षा और मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर हो सकता है। डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि इस अभियान से बच्चों को स्वस्थ रखने में मदद मिलेगी और वे बेहतर शारीरिक और मानसिक विकास की दिशा में आगे बढ़ेंगे।
दवाओं का वितरण और खुराक
स्वास्थ्य विभाग द्वारा बच्चों को निर्धारित खुराक में दवाएं दी जा रही हैं। अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. रमित रस्तोगी ने बताया कि:
- 1 से 2 वर्ष तक के बच्चों को आधी गोली पीसकर दी जाएगी।
- 2 से 3 वर्ष तक के बच्चों को एक गोली पीसकर दी जाएगी।
- 3 से 19 वर्ष तक के बच्चों को एक गोली चबाकर दी जाएगी।

अगर किसी बच्चे को दवा लेने के बाद कोई असुविधा होती है, तो हेल्पलाइन नंबर 18001803024 पर संपर्क किया जा सकता है। 10 फरवरी को जो बच्चे दवा लेने से छूट गए, उन्हें 13 फरवरी को मॉप अप राउंड में दवा दी जाएगी।
अब मॉप अप राउंड: 13 फरवरी
10 फरवरी के अभियान में यदि कोई बच्चा दवा लेने से छूट जाता है, तो उसे 13 फरवरी को मॉपअप राउंड के दौरान दवा दी जाएगी। इस राउंड का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी बच्चों को समय पर दवा मिल जाए, जिससे कोई बच्चा कृमि संक्रमण से प्रभावित न रहे। मॉप अप राउंड के दौरान सभी बच्चों की स्वास्थ्य स्थिति की निगरानी भी की जाएगी ताकि किसी भी प्रकार की दवा से संबंधित समस्या का तुरंत समाधान किया जा सके।
स्वास्थ्य विभाग की टीमें भी रहीं सक्रिय
स्वास्थ्य विभाग की टीमें इस अभियान के तहत विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय हैं और बच्चों को दवाएं उपलब्ध करा रही हैं। इन टीमों में उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. कैलाश चंद्र, प्रधानाचार्य मंगलम गुप्ता, डीसीपीएम योगेंद्र सिंह पाल, डीईआईसी मैनेजर अजीत सिंह, और डीपीएम अश्वनी गौतम सहित स्वास्थ्य विभाग के अन्य अधिकारी और कर्मचारी भी शामिल हैं। ये टीमें सुनिश्चित कर रही हैं कि सभी बच्चों तक दवा पहुंचाई जाए और अभियान पूरी तरह से सफल हो।
पढ़िए अभियान का प्रभाव
यह अभियान बच्चों के स्वास्थ्य के लिहाज से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह पेट के कीड़े और कृमि संक्रमण से होने वाली समस्याओं को खत्म करने में मदद करेगा। चिकित्सकों के अनुसार, कृमि संक्रमण से बच्चों को पेट दर्द, उल्टी, दस्त, कमजोरी, वजन घटना, और पोषक तत्वों की कमी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसके अलावा, कृमि संक्रमण से बच्चों के मानसिक विकास में भी रुकावट आ सकती है, क्योंकि ये संक्रमण उनकी सोचने-समझने की क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए इस अभियान को बच्चों के समग्र विकास और स्वस्थ समाज की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
बच्चों की शिक्षा और विकास में योगदान
डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह ने बच्चों से संवाद करते हुए यह भी बताया कि यह अभियान उनके शारीरिक और मानसिक विकास के लिए अत्यधिक फायदेमंद है। उन्होंने कहा, “जब बच्चे स्वस्थ रहेंगे, तभी उनका शारीरिक और मानसिक विकास ठीक से हो पाएगा। इसके परिणामस्वरूप बच्चे अच्छी शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे और समाज के विकास में अपना योगदान दे सकेंगे।”
अभियान के दौरान बच्चों को कृमि संक्रमण से बचाव के उपाय भी बताए गए। उन्हें बताया गया कि किस प्रकार नियमित रूप से कृमि मुक्ति दवाओं का सेवन करके वे स्वस्थ रह सकते हैं और कृमि संक्रमण से बच सकते हैं।
जानिए क्या है राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस का महत्व
राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के आयोजन का उद्देश्य देशभर में बच्चों के बीच कृमि संक्रमण को लेकर जागरूकता फैलाना है। इस दिन विशेष रूप से बच्चों को कृमि मुक्ति दवाएं दी जाती हैं ताकि वे इस संक्रमण से मुक्त हो सकें और स्वस्थ जीवन जी सकें। यह अभियान पूरे देश में हर साल 10 फरवरी को मनाया जाता है, और इसका लक्ष्य सभी बच्चों को कृमि संक्रमण से मुक्त करना है। इसके अलावा, यह दिवस बच्चों के स्वास्थ्य और कल्याण के लिए सरकार द्वारा उठाए गए एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जाता है।



