Kanpur: लैंबॉर्गिनी कार सड़क हादसे में बड़ा अपडेट: आरोपी ड्राइवर मोहन ने कोर्ट में किया सरेंडर, जांच जारी

रिपोर्ट – शुभम शर्मा
कानपुर: ग्वालटोली थाना क्षेत्र में एक लैंबॉर्गिनी कार के एक्सीडेंट के मामले में अब नया मोड़ आया है। घटना के बाद आरोपी पक्ष के वकील धर्मेंद्र सिंह ने अपने मुवक्किल मोहन को कोर्ट में पेश किया, हालांकि, यह मामला तब और जटिल हो गया जब मीडिया में वायरल वीडियो में यह देखा गया कि एक्सीडेंट के समय ड्राइवर सीट से एक और व्यक्ति, शिवम् मिश्रा को निकाला जा रहा था।
इस घटना के बाद ड्राइवर मोहन ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि गाड़ी वह खुद चला रहे थे, और उनका मानना है कि पुलिस की जांच में जो बातें सामने आई हैं, वे पूरी तरह से गलत हैं। वहीं, आरोपी पक्ष के वकील धर्मेंद्र सिंह ने इस मामले में पुलिस की जांच पर सवाल उठाया और कहा कि हम अपना काम कर रहे हैं, वहीं पुलिस अपनी जांच कर रही है।
इस तरह रहा घटनाक्रम और पुलिस जांच
पुलिस की जांच के दौरान, पुलिस कमिश्नर ने यह बयान दिया था कि गाड़ी को शिवम् मिश्रा चला रहे थे, न कि मोहन। यह बयान अब मामले में नया मोड़ ला रहा है। पुलिस कमिश्नर के बयान ने पूरे मामले को और पेचीदा बना दिया है क्योंकि दोनों पक्षों के आरोप अलग-अलग हैं।
डीजीसी दिलीप मिश्रा ने इस मामले पर बयान देते हुए कहा कि मोहन ने कोर्ट में सरेंडर करने की कोशिश की थी, लेकिन पुलिस की एफआईआर में यह साफ तौर पर उल्लेख किया गया था कि ड्राइवर सीट पर मोहन नहीं था, इसलिए कोर्ट ने मोहन का सरेंडर स्वीकार नहीं किया। उन्होंने यह भी कहा कि अब कोर्ट का कहना है कि आरोपी शिवम् मिश्रा को ही कोर्ट में आना होगा।
यह पूरा मामला तब और गंभीर हो गया जब वायरल हुए वीडियो में यह देखा गया कि एक्सीडेंट के बाद कार से किसी और को निकाला जा रहा था, जबकि मोहन का दावा था कि वह गाड़ी चला रहे थे। पुलिस ने अब तक अपनी जांच में यह साफ नहीं किया है कि असल में गाड़ी चला कौन रहा था।
जानिए आरोपी पक्ष की दलीलें
अभी तक आरोपी पक्ष की तरफ से जो बयान आए हैं, उनका कहना है कि यह एक हादसा था और गाड़ी के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद बहुत सी बातें गलत तरीके से प्रचारित की जा रही हैं। वकील धर्मेंद्र सिंह का कहना है कि पुलिस द्वारा की जा रही जांच में कई पहलुओं को नजरअंदाज किया जा रहा है। उनका यह भी कहना है कि उनकी पूरी कोशिश है कि उनके मुवक्किल मोहन को न्याय मिल सके। वहीं, पुलिस की जांच अब भी जारी है और यह माना जा रहा है कि जांच के दौरान कुछ नए तथ्य सामने आ सकते हैं।
पढ़िए पुलिस कमिश्नर और कोर्ट की भूमिका
पुलिस कमिश्नर ने यह स्पष्ट किया कि जांच में गाड़ी के ड्राइवर के बारे में जो जानकारी सामने आई, वह उनके विभाग की जांच का हिस्सा है। उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में जो भी तथ्य सामने आएंगे, वे उन्हें पूरी तरह से तफ्तीश करेंगे।
दूसरी ओर, कानपुर की कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि मोहन का सरेंडर स्वीकार नहीं किया जाएगा। कोर्ट का कहना है कि अब शिवम् मिश्रा को ही अपनी उपस्थिति दर्ज करानी होगी। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर शिवम् मिश्रा जांच में शामिल नहीं होते हैं, तो उनके खिलाफ और कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो का पड़ा सबसे बड़ा प्रभाव
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो ने पूरी स्थिति को और जटिल बना दिया है। वीडियो में यह देखा गया कि एक्सीडेंट के बाद मोहन की बजाय किसी और व्यक्ति को ड्राइवर सीट से बाहर निकाला जा रहा था। इस वीडियो ने पुलिस और मीडिया दोनों के लिए मामले में नए सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, इस वीडियो को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है।
कानूनी पहलू और आगे की कार्रवाई
यह मामला कानूनी दृष्टिकोण से भी बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें कई सवाल उठ रहे हैं कि गाड़ी असल में चला कौन रहा था। पुलिस की जांच के बाद यह भी पता चलेगा कि क्या आरोपी पक्ष ने जानबूझकर साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की है या यह एक सामान्य दुर्घटना थी।
कोर्ट ने इस मामले में आगे की कार्रवाई के लिए पुलिस को दिशा-निर्देश दिए हैं। पुलिस अब इस मामले में किसी भी प्रकार के साक्ष्य को नजरअंदाज नहीं करेगी और पूरी तरह से जांच करेगी। इस मामले में शिवम् मिश्रा का समन अब कोर्ट की कार्यवाही में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है, और उनकी उपस्थिति के बाद ही पुलिस के सामने वास्तविक तथ्यों की तस्वीर स्पष्ट हो पाएगी।



