Kanpur News: छठ घाट विवाद: 25 लाख खर्च के बाद भी सफाई योजना नाकाम, श्रद्धालुओं ने जताई नाराजगी

कानपुर। कानपुर में हाल ही में छठ घाट की सफाई और विकास योजना विवाद का विषय बन गई है। यह प्रोजेक्ट 25 लाख की लागत से तैयार किया गया था, लेकिन उद्घाटन के कुछ ही समय बाद यह योजना श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों के लिए निराशाजनक साबित हुई।
सफाई योजना का विवरण और विवाद
जानकारी के अनुसार, सतीश महाना द्वारा छठ घाट का उद्घाटन किया जाना था। हालांकि, उद्घाटन समारोह में उनका हिस्सा नहीं रहा। घाट पर सफाई और सौंदर्यीकरण का काम केवल एक सप्ताह तक प्रभावी रूप से चला, जिसके बाद पुनः घाट कूड़े और मलबे से भर गया।
स्थानीय नागरिकों और श्रद्धालुओं का कहना है कि घाट पर यह कार्य केवल PR और फोटोशूट के लिए किया गया था, न कि वास्तविक विकास और साफ-सफाई सुनिश्चित करने के लिए। इसके चलते लोगों में नाराजगी बढ़ गई और कई श्रद्धालुओं ने अधिकारियों को चेतावनी दी है कि अगर घाट की स्थिति नहीं सुधरी तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे।
यह है प्रोजेक्ट की वास्तविक स्थिति
घाट के निरीक्षण से पता चला कि यह प्रोजेक्ट असल में नहर या नाला में तब्दील हो गया है। साफ-सफाई के अभाव में घाट पर कूड़े के ढेर बने हुए हैं और पानी की निकासी सही ढंग से नहीं हो रही। स्थानीय निवासी और श्रद्धालु इस स्थिति से खासे परेशान हैं।
एक स्थानीय नागरिक ने कहा, “प्रोजेक्ट की शुरुआत में सब कुछ ठीक दिखा, लेकिन वास्तविकता में घाट कूड़े और गंदगी से भर गया। यह श्रद्धालुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ जैसा है।”
पढ़िए विकास के दावों और वास्तविकता
सरकारी अधिकारियों ने इस परियोजना को साफ-सफाई और सांस्कृतिक संरचना सुधार के उद्देश्य से ₹25 लाख की लागत से तैयार किया था। लेकिन जनता के अनुसार, यह पैसा और प्रयास PR फोटोशूट और उद्घाटन के लिए ही खर्च हुआ। वास्तविकता में घाट पर सफाई और रख-रखाव निरंतर नहीं हुआ।
अधिकारियों की फोटो-बाजी के कारण इस योजना की वास्तविक स्थिति समाज और श्रद्धालुओं तक सही तरीके से नहीं पहुंच पाई, जिससे सार्वजनिक नाराजगी और असंतोष बढ़ गया।
श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की है यह प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं ने चेतावनी दी है कि यदि घाट की स्थिति में सुधार नहीं किया गया तो वे आंदोलन करने पर मजबूर होंगे। उनका कहना है कि धार्मिक और सांस्कृतिक स्थल की ऐसी स्थिति स्वीकार्य नहीं है।
एक श्रद्धालु ने बताया, “छठ पूजा हमारे लिए विशेष महत्व रखती है। घाट की यह स्थिति न केवल असुविधा पैदा कर रही है बल्कि हमारी आस्था के साथ भी खिलवाड़ है। प्रशासन को तुरंत कदम उठाना चाहिए।”
जानिए आगे की कार्यवाही और प्रशासन की जिम्मेदारी
प्रशासन ने फिलहाल स्थिति का आकलन कर सुधार के निर्देश दिए हैं। स्थानीय अधिकारियों को कहा गया है कि वे घाट की सफाई और रख-रखाव को नियमित और स्थायी रूप से सुनिश्चित करें। इसके अलावा, परियोजना में नियमित निगरानी और नागरिक फीडबैक भी लिया जाएगा, ताकि ऐसी समस्याएं भविष्य में उत्पन्न न हों।
विशेषज्ञों का कहना है कि सार्वजनिक परियोजनाओं में PR और वास्तविक कार्यान्वयन के बीच संतुलन बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। केवल उद्घाटन और फोटोशूट से काम नहीं चलेगा; इसके लिए सतत निगरानी और रख-रखाव अनिवार्य है।
तत्काल सुधर की है आवश्यकता
कानपुर का यह छठ घाट प्रोजेक्ट दर्शाता है कि विकास कार्यों में केवल दिखावा नहीं, बल्कि वास्तविक सुधार भी जरूरी है। 25 लाख की लागत के बावजूद घाट की सफाई और रख-रखाव निरंतर नहीं किया गया। अब स्थानीय नागरिक और श्रद्धालु प्रशासन से त्वरित सुधार की अपेक्षा कर रहे हैं।
यदि प्रशासन समय पर कार्यवाही करता है तो श्रद्धालुओं की आस्था और जनता का विश्वास दोनों बनाए रखा जा सकता है। यह घटना एक सावधान करने वाला उदाहरण है कि सार्वजनिक परियोजनाओं में योजना बनाना, वास्तविक कार्यान्वयन और निगरानी तीनों का संतुलन होना चाहिए।



