कानपुर: घरेलू विवाद में पुलिस की बेरहमी से घायल हुआ पति, पढ़िए कौन चौकी प्रभारी हुआ निलंबित, जांच जारी

रिपोर्ट – शुभम शर्मा
कानपुर: घरेलू विवाद में पुलिस की कथित बेरहमी का मामला सामने आया है, जिसने शहर में पुलिस जवाबदेही और घरेलू मामलों में उनके दखल पर सवाल खड़ा कर दिया है। शास्त्री नगर इलाके में एक प्राइवेट नौकरी करने वाले युवक को उसकी पत्नी की शिकायत के आधार पर शास्त्री नगर पुलिस चौकी में बुलाया गया, जहां उसे कथित रूप से इतनी बेरहमी से पीटा गया कि उसके कान का पर्दा फट गया और पूरे शरीर पर नीले-काले निशान उभर आए।
पीड़ित युवक की मां की शिकायत पर उच्च अधिकारियों ने तुरंत जांच शुरू की। जांच में दोषी पाए गए शास्त्री नगर चौकी प्रभारी पवन मिश्रा को तत्काल निलंबित कर दिया गया है, जबकि अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय जांच जारी है।

यह रहा घटना का क्रम
बीते मंगलवार को काकादेव इलाके में घरेलू कलह ने यह विवाद खड़ा किया। परिवार के सदस्यों ने बताया कि युवक की पत्नी छोटी-छोटी बातों पर अक्सर झगड़ा करती रहती है। घटना के दिन युवक अपनी डेढ़ साल की मासूम बेटी और मां के साथ सोया था। इस पर नाराज पत्नी ने विवाद शुरू कर दिया।
युवक ने झगड़े को अनदेखा करते हुए ड्यूटी पर निकल गए। गुस्से में पत्नी ने शास्त्री नगर पुलिस चौकी में पति के खिलाफ शिकायत दर्ज करा दी। इसके बाद चौकी प्रभारी पवन मिश्रा ने युवक को तुरंत बुलाया।

पुलिस चौकी में हुई बेरहमी
ड्यूटी से थककर लौटे युवक को चौकी में बुलाया गया, जहां प्रभारी पवन मिश्रा के साथ दरोगा अरुण त्रिवेदी, राजू खरवार, जसवंत सिंह और सुमित सिंह चौहान ने कथित रूप से उसे बेरहमी से पीटा। लात-घूंसे, थप्पड़ों और जेल भेजने की धमकियों के बीच युवक की चीखें थाने में गूंजती रहीं, लेकिन किसी ने मदद नहीं की। देर रात तक बेटे का घर न लौटना देखकर उसकी मां स्वयं चौकी पहुंचीं।
पीड़ित की हालत और चिकित्सीय जांच
मां ने बेटे को घर लाया, लेकिन उसका हाल देखकर उनका दिल कांप गया। चेहरा सूजा हुआ था, कान से खून बह रहा था और शरीर पर थर्ड डिग्री की पिटाई के निशान साफ दिखाई दे रहे थे।
अगले दिन प्राइवेट अस्पताल में चिकित्सीय जांच हुई। डॉक्टरों ने बताया कि कान का पर्दा पूरी तरह फट चुका है और सुनने की क्षमता स्थायी रूप से प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा पूरे शरीर पर गंभीर चोटों के निशान थे।

अधिकारियों ने शुरू की जांच और लिया एक्शन
पीड़ित की मां ने एसीपी स्वरूप नगर शिखर से शिकायत की। एसीपी ने मौके पर जाकर पूरे मामले की जांच की। दोषी पाए गए चौकी प्रभारी पवन मिश्रा को डीसीपी सेंट्रल अतुल श्रीवास्तव ने तत्काल निलंबित कर दिया।
डीसीपी ने स्पष्ट किया कि बाकी शामिल पुलिसकर्मियों की जांच भी चल रही है और दोषियों को सख्त सजा दी जाएगी। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि जांच पूरी निष्पक्ष तरीके से होगी।
घटना के बाद बिखरा परिवार
इस घटना के बाद पीड़ित युवक की पत्नी अपनी बच्ची लेकर मायके चली गई है। पूरा परिवार सदमे में है। मां बेटे की हालत देखकर लगातार रो रही हैं और न्याय की उम्मीद लगाए बैठी हैं। युवक की चोटों और स्थायी सुनने की क्षमता पर प्रभाव के कारण परिवार मानसिक और भावनात्मक रूप से बेहद परेशान है।

कानपुर में पुलिस जवाबदेही का बड़ा सवाल
यह मामला कानपुर में पुलिस की जवाबदेही और उनके दखल पर गंभीर सवाल उठाता है। घरेलू विवाद में पुलिस का दुरुपयोग न केवल पीड़ितों के लिए खतरा बन सकता है, बल्कि समाज में कानून व्यवस्था पर भी असर डालता है।
विशेष रूप से ऐसे मामलों में उच्च अधिकारियों की सतर्कता और तत्काल कार्रवाई ही विश्वास बनाए रखती है। इस घटना से यह स्पष्ट होता है कि पुलिस के दुरुपयोग की शिकायत पर तेज़ और निष्पक्ष कार्रवाई कितनी आवश्यक है।
घरेलू मामलो में है धैर्य की आवश्यकता अब पीड़ित को है न्याय की आस
कुल मिलाकर, शास्त्री नगर की यह घटना न केवल कानपुर में पुलिस जवाबदेही के महत्व को उजागर करती है, बल्कि घरेलू मामलों में पुलिस के दुरुपयोग के खतरों को भी सामने लाती है। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और उच्च अधिकारियों की सतर्कता ने यह संदेश दिया है कि कानून का पालन हर स्तर पर होना चाहिए।
पीड़ित युवक और उसके परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद अभी भी बनी हुई है। यह घटना समाज के लिए चेतावनी भी है कि पुलिस का दखल हमेशा निष्पक्ष और संवेदनशील होना चाहिए।



