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मुरादाबाद: काली माता मंदिर में महंतों की छुट्टी, जूना अखाड़े की जांच के बाद लिया गया बड़ा निर्णय

रिपोर्ट – शाहरुख़ हुसैन 

मुरादाबाद: काली माता मंदिर महंत हटाए गए मामले ने धार्मिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है। लालबाग स्थित सिद्ध पीठ प्राचीन काली माता मंदिर के महंत सज्जन गिरी और रामगिरी को श्री पंच दशनाम जूना अखाड़े ने तत्काल प्रभाव से उनके पदों से हटा दिया है। यह निर्णय कथित अनैतिक गतिविधियों की शिकायतों और विस्तृत जांच के बाद लिया गया।

25 सदस्यीय दल ने की विस्तृत जांच

मामले की गंभीरता को देखते हुए जूना अखाड़े के वरिष्ठ पदाधिकारी नारायण गिरी महाराज 25 सदस्यीय दल के साथ मुरादाबाद पहुंचे। टीम ने मंदिर परिसर, व्यवस्थाओं और संबंधित आरोपों की गहन समीक्षा की।

सूत्रों के अनुसार, जांच प्रक्रिया में विभिन्न पक्षों से बातचीत की गई और उपलब्ध तथ्यों का परीक्षण किया गया। इसके बाद अखाड़े ने अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए दोनों महंतों को पद से हटाने का निर्णय लिया।

प्रशासन को दी गई आधिकारिक जानकारी

जांच पूरी होने के बाद नारायण गिरी महाराज ने मुरादाबाद के जिलाधिकारी अनुज सिंह से मुलाकात की। इस दौरान अखाड़े के निर्णय की औपचारिक जानकारी प्रशासन को दी गई।

मीडिया से बातचीत में नारायण गिरी महाराज ने कहा कि मंदिर की गरिमा और परंपराओं को बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि दोनों पूर्व महंतों को किसी अन्य स्थान पर भेजा जाएगा।

मंदिर की मर्यादा पर जोर

लालबाग स्थित प्राचीन काली माता मंदिर क्षेत्र की आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है। यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में मंदिर से जुड़े किसी भी विवाद को गंभीरता से लिया जाता है।

जूना अखाड़े ने अपने बयान में कहा कि मंदिर की पवित्रता और अनुशासन से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। इसी उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है।

जल्द होगी नए महंत की नियुक्ति

अखाड़े के पदाधिकारियों के अनुसार, अगले दो से तीन दिनों के भीतर नए महंत की नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। तब तक मंदिर की समस्त व्यवस्था जूना अखाड़े की निगरानी में संचालित की जाएगी।

इसके अलावा, श्रद्धालुओं की सुविधा और नियमित पूजा-पाठ में किसी प्रकार की बाधा न आए, इसके लिए विशेष व्यवस्था की गई है।

धार्मिक संस्थाओं में जवाबदेही का संकेत

लोगों का मानना है कि यह कार्रवाई धार्मिक संस्थाओं में जवाबदेही और पारदर्शिता के महत्व को रेखांकित करती है। जब किसी संस्था के भीतर अनुशासनात्मक शिकायतें आती हैं, तो निष्पक्ष जांच और त्वरित निर्णय से विश्वास कायम रहता है।

हालांकि, अखाड़े ने आरोपों के विस्तृत विवरण सार्वजनिक नहीं किए हैं, लेकिन यह स्पष्ट किया है कि जांच के आधार पर ही निर्णय लिया गया है।

श्रद्धालुओं की प्रतिक्रिया

घटना की जानकारी मिलते ही मंदिर से जुड़े श्रद्धालुओं में चर्चा शुरू हो गई। कई लोगों ने अखाड़े के निर्णय को मंदिर की गरिमा बनाए रखने की दिशा में आवश्यक कदम बताया।

वहीं, कुछ लोगों का कहना है कि नए महंत की नियुक्ति के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी। फिलहाल, मंदिर परिसर में सामान्य गतिविधियां जारी हैं।

मुरादाबाद काली माता मंदिर महंत हटाए गए प्रकरण ने यह संकेत दिया है कि धार्मिक संस्थाएं भी अनुशासन और मर्यादा के मामले में सख्त रुख अपना रही हैं। जूना अखाड़े की 25 सदस्यीय टीम की जांच के बाद लिया गया यह निर्णय आने वाले समय में मंदिर प्रशासन की दिशा तय करेगा।

अब सभी की नजर नए महंत की नियुक्ति पर है। तब तक मंदिर की व्यवस्था अखाड़े की निगरानी में संचालित होती रहेगी, ताकि श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास बना रहे।

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