देश

Mumbai: हनुमान कथा के दौरान मुस्लिम महिला ने बच्चों संग अपनाया सनातन धर्म, विधिवत हुआ स्वागत

गोंदिया (महाराष्ट्र)। महाराष्ट्र के गोंदिया जिले के आमगांव क्षेत्र में आयोजित श्रीराममय हनुमान कथा के दौरान एक महत्वपूर्ण सामाजिक घटना सामने आई है। कथा के चौथे दिन, विराम आरती से ठीक पहले, गोंदिया नगर की निवासी एक मुस्लिम महिला ने अपने दो बच्चों के साथ स्वेच्छा से सनातन धर्म को अपनाने की घोषणा की। यह आयोजन प्रसिद्ध कथावाचक पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री (बागेश्वर महाराज) की उपस्थिति में संपन्न हुआ।

दरअसल, आमगांव में चल रही श्रीराममय हनुमान कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रतिदिन पहुंच रहे हैं। कथा के चौथे दिन का वातावरण विशेष रूप से भावनात्मक रहा। इसी क्रम में एक महिला अपने दोनों बच्चों के साथ मंच के समीप पहुंची और सार्वजनिक रूप से सनातन धर्म में आस्था व्यक्त करते हुए उसे अपनाने की इच्छा जताई। आयोजन समिति के अनुसार, यह निर्णय महिला द्वारा पूर्णतः स्वेच्छा और निजी आस्था के आधार पर लिया गया।

पंडित धीरेन्द्र शास्त्री ने किया तिलक 

इसके बाद पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने वैदिक परंपरा के अनुरूप महिला और उसके बच्चों का तिलक कर, पट्टिका पहनाकर विधिवत स्वागत किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि सनातन धर्म किसी पर दबाव नहीं डालता, बल्कि यह आत्मिक शांति, संस्कार और मानवता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि धर्म का चयन प्रत्येक व्यक्ति का निजी और संवैधानिक अधिकार है।

धर्म परिवर्तन होते ही किया गया नामकरण 

जानकारी के अनुसार, सनातन धर्म अपनाने से पूर्व महिला का नाम परवीन मौसिम शेख था। उनकी पुत्री का नाम जुमेरा मोशीन शेख और पुत्र का नाम रजा मौसिन शेख दर्ज था। धर्म परिवर्तन के बाद महिला ने अपना नया नाम जया जैकी दास स्वीकार किया। वहीं उनके पुत्र का नाम राजू जैकी दास और पुत्री का नाम जय श्री जैकी दास रखा गया।

इस दौरान कथा पंडाल में उपस्थित श्रद्धालुओं ने शांति और संयम बनाए रखा। कार्यक्रम में किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या विवाद की स्थिति नहीं बनी। आयोजकों ने भी यह सुनिश्चित किया कि कार्यक्रम पूरी तरह धार्मिक मर्यादाओं और कानून के दायरे में संपन्न हो।

प्रत्यक्षदर्शियों ने महिला का बताया विवरण 

स्थानीय लोगों के अनुसार, महिला पिछले कुछ समय से सनातन परंपराओं, पूजा-पद्धतियों और आध्यात्मिक विचारों से प्रभावित थीं। उन्होंने अपने स्तर पर अध्ययन और आत्मचिंतन के बाद यह निर्णय लिया। हालांकि, महिला या उनके परिवार की ओर से किसी प्रकार का विस्तृत बयान सार्वजनिक रूप से नहीं दिया गया है।

गौरतलब है कि भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को अपने धर्म को मानने, अपनाने और उसका प्रचार करने की स्वतंत्रता देता है। ऐसे मामलों में प्रशासन की भूमिका यह सुनिश्चित करने की होती है कि कोई भी निर्णय दबाव, प्रलोभन या भय के आधार पर न लिया गया हो। इस आयोजन में भी किसी प्रकार की प्रशासनिक आपत्ति या हस्तक्षेप की सूचना सामने नहीं आई है।

पूरे देश में हो रही चर्चा 

इस घटना को लेकर सामाजिक और धार्मिक हलकों में चर्चा जरूर है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर इसे एक व्यक्तिगत आस्था से जुड़ा मामला बताया जा रहा है। वहीं, आयोजन समिति ने भी स्पष्ट किया कि कथा का उद्देश्य केवल धार्मिक कथा-वाचन और आध्यात्मिक संदेश देना है, न कि किसी प्रकार का धर्मांतरण अभियान।

अंततः, यह घटना एक बार फिर यह रेखांकित करती है कि भारत की सामाजिक संरचना विविधताओं से भरी है, जहां प्रत्येक व्यक्ति को अपने विश्वास और आस्था के अनुसार जीवन पथ चुनने की स्वतंत्रता प्राप्त है। ऐसे आयोजनों में संयम, संवेदनशीलता और कानून का सम्मान बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।

UP Now

Upnownews.com एक स्वतंत्र न्यूज़ चैनल है, जो आपको सबसे तेज और सटीक खबरें प्रदान करता है। हमारा लक्ष्य है कि हम दुनिया भर की महत्वपूर्ण और प्रासंगिक खबरें आप तक पहुँचाएँ। राजनीति, मनोरंजन, खेल, बिज़नेस, टेक्नोलॉजी, और अन्य विषयों पर हमारी निष्पक्ष और प्रमाणिक रिपोर्टिंग हमें सबसे अलग बनाती है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button