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मुरादाबाद: बच्चों की पहली पसंद डियर पार्क अब बना चिंता का केंद्र, मिनी चिड़ियाघर का देखा गया था सपना

रिपोर्ट – शाहरुख़ हुसैन 

मुरादाबाद: जिसे पीतल नगरी के नाम से जाना जाता है, अपने इतिहास और सांस्कृतिक विरासत के साथ-साथ मनोरंजन के स्थलों के लिए भी मशहूर रहा है। लेकिन शहर का एक प्रमुख आकर्षण, डियर पार्क, आज अपनी खोती पहचान और जीर्ण-शीर्ण हालत के कारण चिंताजनक स्थिति में है। कभी यह पार्क बच्चों की किलकारियों और हिरणों की मंडली से गूंजता था, वहीं आज इसे झाड़ियों और टूट-फूट के निशानों ने घेर लिया है।

जानिए वर्तमान में डियर पार्क की स्थिति

64 एकड़ में फैले इस विशाल पार्क की वर्तमान स्थिति बेहद हताश जनक है। बच्चों के लिए बनाए गए झूले उखड़ चुके हैं, पार्क की बेंचें टूट गई हैं और कैंटीन पूरी तरह जमींदोज हो चुकी है। इसके अलावा, बाउंड्री वॉल जगह-जगह से क्षतिग्रस्त है, जिससे यह असामाजिक तत्वों के लिए एक ठिकाना बन गया है।

वन विभाग के अनुसार, पार्क के पास बजट और संसाधनों की भारी कमी है। इसके परिणामस्वरूप, पार्क के भीतर के रास्ते झाड़ियों से घिरे हैं और सामान्य जनता के लिए यह क्षेत्र लगभग अनुपयोगी हो गया है।

देखा गया था मिनी चिड़ियाघर का सपना और अब जानिए वास्तविकता

साल 2021 में शासन स्तर पर डियर पार्क को आधुनिक मिनी चिड़ियाघर के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव तैयार किया गया था। योजना के तहत नए वन्यजीवों को लाने और शहर को एक नए पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की उम्मीद जताई गई थी।

लेकिन अब साल 2026 आ चुका है और यह प्रस्ताव सरकारी फाइलों में ही धूल फांक रहा है। इस विफलता के कारण, पार्क आज केवल रेस्क्यू सेंटर के रूप में काम कर रहा है।

रेस्क्यू सेंटर की है उपयोगिता

प्रशासनिक दृष्टि से पार्क का वर्तमान उपयोग केवल घायल या पकड़े गए वन्यजीवों के इलाज और अस्थायी आश्रय के रूप में किया जा रहा है। हाल ही में छजलैट और आसपास के इलाकों से पकड़े गए तेंदुए और अन्य वन्यजीव यहाँ लाए गए, लेकिन आम जनता के लिए पार्क के दरवाजे कई सालों से बंद हैं।

वन विभाग का कहना है कि कम बजट और कर्मचारियों की कमी के कारण पार्क का सामान्य रखरखाव मुश्किल हो गया है। इससे न केवल पार्क का स्वरूप बिगड़ा है, बल्कि बच्चों और पर्यटकों के लिए यह आकर्षण स्थल बनने से रह गया है।

स्थानीय लोगों ने कर रखी है मांग

मुरादाबाद के नागरिक इस स्थिति से बेहद चिंतित हैं। उनके अनुसार, शहर के बीच में स्थित इतनी बड़ी और महत्वपूर्ण जगह का बर्बाद होना दुर्भाग्यपूर्ण है। लोग चाहते हैं कि सरकार और स्थानीय प्रशासन पार्क के जीर्णोद्धार के लिए ठोस कदम उठाए, ताकि मुरादाबाद के बच्चे मनोरंजन के लिए दूसरे शहरों की ओर न देखें।

स्थानीय जानकारों का मानना है कि पार्क का पुनः विकास केवल वन्यजीव संरक्षण के लिए ही नहीं, बल्कि शहर के पर्यटन और सामाजिक जीवन के लिए भी महत्वपूर्ण है। इसके लिए नए झूले, साफ-सफाई, बाउंड्री वॉल की मरम्मत और बच्चों के लिए मनोरंजन सुविधाओं का निर्माण अनिवार्य है।

पुनर्जीवित किए जाने पर जिले को मिल सकता है नया पर्यटन स्थल 

 डियर पार्क न केवल वन्यजीवों का आश्रय स्थल है, बल्कि बच्चों और परिवारों के लिए प्रकृति से जुड़ने का अवसर भी प्रदान करता है। यह पार्क शिक्षा, मनोरंजन और सामाजिक गतिविधियों का मिश्रण है। यदि इसे पुनर्जीवित किया जाए, तो यह मुरादाबाद के लिए नया पर्यटन केंद्र भी बन सकता है।

जानिए आगे का रास्ता क्या हो सकता है 

स्थानीय प्रशासन और वन विभाग को मिलकर एक विस्तृत जीर्णोद्धार योजना बनानी होगी। इसके तहत पार्क के भीतर की झाड़ियों को काटना, पुराने झूले और बेंचों की मरम्मत, सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करना और मिनी चिड़ियाघर की वास्तविकता को लागू करना शामिल होना चाहिए।

इस योजना के सफल कार्यान्वयन से पार्क में बच्चों की हंसी फिर से गूंज सकेगी और यह मुरादाबाद की पहचान का एक गौरवशाली हिस्सा बन जाएगा।

सरकार को देना होगा ध्यान 

डियर पार्क की वर्तमान स्थिति केवल वन्यजीवों या प्रशासन की समस्या नहीं है, बल्कि यह मुरादाबाद के नागरिकों, विशेषकर बच्चों के लिए भी चिंता का विषय बन चुकी है। यदि सरकार और स्थानीय प्रशासन समय रहते पार्क के जीर्णोद्धार पर ध्यान दें, तो यह न केवल एक सुरक्षित और सुंदर पार्क बन सकता है, बल्कि मुरादाबाद के लिए सांस्कृतिक और पर्यटन की नई दिशा भी निर्धारित कर सकता है।

याद रखिए, शहर का हर पार्क केवल हरी-भरी जगह नहीं, बल्कि बच्चों की हँसी, पर्यटकों की उत्सुकता और वन्यजीवों की सुरक्षा का प्रतीक भी होता है। डियर पार्क का पुनर्निर्माण इस प्रतीक को फिर से जीवित कर सकता है।

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